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वाहन बिक्री में 19 साल की सबसे बड़ी गिरावट, 10 लाख नौकरियों पर खतरा



डॉ. देवेन्द्र शर्मा (नई दिल्ली/भोपाल). ऑटो सेक्टर में करीब एक साल से मंदी है। जुलाई में वाहनों की बिक्री में लगातार 9वें महीने गिरावट दर्ज की गई। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमाबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सिआम) के आंकड़ों के मुताबिकघरेलू बिक्री 18.71% घट गई है। यह 19 साल में सबसे तेज गिरावट है। इससे पहले दिसंबर 2000में 21.81% कमी दर्ज की गई थी। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के मुताबिक, मंदी की वजह से बीते 3 महीने में 2 लाख लोगों का रोजगार छिन गया। सिआमके महानिदेशक विष्णु माथुर ने भास्कर ऐप से बातचीत में बताया कि ऑटो इंडस्ट्री ने 3.7करोड़ से ज्यादा लोगों को जॉब दे रखा है। मंदी खत्म नहीं हुई तो और नौकरियां जाएंगी। एक रिपोर्ट में ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स ने आने वाले कुछ महीनों में 10 लाख नौकरियों पर खतरा बताया है। इंडस्ट्री के लोगों की मांग है कि सरकार को ऑटोमोबाइल सेक्टर में जीएसटी की दर 28% से घटाकर 18% करनी चाहिए।

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सबसे बड़ी वजह : नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों का नकदी संकट
वाहन खरीदने के लिए बड़ी निजी और सरकारी बैंकों के अलावा फाइनेंस कंपनियां भी कर्ज मुहैया कराती हैं। ऐसी कंपनियों को नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां यानी एनबीएफसी कहते हैं। बैंकों से कर्ज लेने में मुश्किल महसूस करने वालों ग्राहकों के लिए नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां ही प्रमुख सहारा होती हैं। इन्फ्रा, फाइनेंस और ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़ी नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी ‘आईएल एंड एफएस’ का कर्ज और नकदी संकट पिछले साल सितंबर में सामने आया था। इसी के साथ जुलाई 2018 से जून 2019 के बीच फाइनेंशियल सेक्टर में म्यूचुअल फंड का निवेश 64,000 करोड़ रुपए घट गया। इन वजहों से एनबीएफसी नकदी संकट से जूझ रहा है। एनबीएफसी के संकट की वजह से लोगों को ऑटो लोन मिलने में परेशानी हो रही है। इस वजह से भी ऑटो सेल्स प्रभावित हो रही है।

कारों की बिक्री में पिछले छह महीने में 15% से 44% की गिरावट
ऑटो सेक्टर में मंदी का असर इसी से समझा जा सकता है कि घरेलू बाजार में 51% शेयर रखने वाली मारुति सुजुकी ने देश में जनवरी में 1.42 लाख कारें बेचीं, लेकिन छह महीने में ही बिक्री में 31% की गिरावट आ गई और जुलाई में उसकी सिर्फ 98,210 कारें बिकीं। मारुति के बाद 16.2% के साथ दूसरा सबसे बड़ा मार्केट शेयर रखने वाली ह्युंडई के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। ह्युंडई ने जनवरी में करीब 45 हजार कारें बेचीं, लेकिन 15% गिरावट के साथ जुलाई में उसकी सेल 39 हजार कारों की रही।

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सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए: फोर्ड इंडिया के एमडी
फोर्ड इंडिया के प्रेसिडेंट और एमडी अनुराग मेहरोत्रा ने दैनिक भास्कर ऐप से बातचीत में कहा कि ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के लिए यह समय चुनौतियों से भरा है। करीब एक साल से इंडस्ट्री में डी-ग्रोथ देखी जा रही है। नकदी की कमी, कमजोर कंज्यूमर सेंटीमेंट, बीएस-VI प्रदूषण मानक और नए सुरक्षा नियमों जैसी वजहों से ऑटो सेक्टर में मंदी है। सरकार जब तक मांग बढ़ाने के उपाय नहीं करेगी, तब तब हालात बिगड़ते रहेंगे।

सरकार लिक्विडिटी बढ़ाए : टोयोटा किर्लोस्कर के डिप्टी एमडी
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के डिप्टी एमडी एन राजा ने दैनिक भास्कर ऐप से कहा कि इंश्योरेंस कॉस्ट बढ़ने, नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के नकदी संकट और लोन के सख्त नियमों की वजह से पिछले कुछ महीनों में मंदी बढ़ी है। अगले साल लागू होने वाले बीएस-VI नॉर्म्स को लेकर भी ग्राहकों के मन में शंकाएं हैं। हम डीलर्स को ज्यादा से ज्यादा सपोर्ट देने की कोशिश कर रहे हैं। उम्मीद है कि सरकार बैंकों को पूंजी देकर लिक्विडिटी बढ़ाने जैसे जरूरी कदम उठाएगी।

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जुलाई में यात्री वाहनों की बिक्री में 31% गिरावट

टू-व्हीलर

पैसेंजर

कमर्शियल

जनवरी 2018

16,84,761

2,85,467

85,656

जनवरी 2019

15,97,572

2,80,125

87,591

गिरावट

5.18%

1.87%

2.21% (बढ़त)*

फरवरी 2018

16,86,180

2,75,346

87,782

फरवरी 2019

16,15,071

2,72,284

87,436

गिरावट

4.22%

1.11%

0.43%

मार्च 2018

17,42,307

3,00,722

1,09,000

मार्च 2019

14,40,663

2,91,806

1,09,030

गिरावट

17.31%

2.96%

अप्रैल 2018

19,58,761

2,98,504

72,787

अप्रैल 2019

16,38,388

2,47,541

68,680

गिरावट

16.36%

17.07%

5.98%

मई 2018

18,50,698

3,01,238

75,745

मई 2019

17,26,206

2,39,347

68,847

गिरावट

6.73%

20.55%

10.02%

जून 2018

18,67,884

2,73,748

80,670

जून 2019

16,49,477

2,25,732

70,771

गिरावट

11.69%

17.54%

12.27%

जुलाई 2018

18,17,406 2,90,931 76,545

जुलाई 2019

15,11,692 2,00,790 56,866

गिरावट

16.82% 30.98% 25.71%

*जनवरी में कमर्शियल वाहनों की बिक्री में 2.21% का इजाफा हुआ था।

आने वाले महीनों में चुनौतियां

1) बीएस-VI से लागत बढ़ेगी, पेट्रोल-डीजल भी महंगा हुआ तो वाहनों की मांग में कमी आएगी
अप्रैल 2020 से बीएस-VI के मानकों के अनुसार निर्मित वाहन बेचना जरूरी होगा। उत्सर्जन में कमी लाने वाले इन मानकों के मुताबिक वाहनों के निर्माण से लागत 20% तक बढ़ सकती है। इसका भार ग्राहकों पर पड़ेगा। वाहनों की कीमतों में 12% का इजाफा हो सकता है। बीएस-VI के साथ एक और चुनौती यह है कि इसके लिए तेल कंपनियों को भी फ्यूल अपग्रेड करना होगा। इसके लिए तेल कंपनियों पर 30 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ सकता है। अगर तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाईं तो ऑटो सेक्टर में डिमांड पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

2) वाहन रजिस्ट्रेशन फीस 10 से 20 गुना बढ़ सकती है, इससे वाहन महंगे होंगे
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के एक मसौदे में मध्यम श्रेणी के वाहनों की रजिस्ट्रेशन फीस मौजूदा 1,000 रुपए से बढ़ाकर 20,000 तक किए जाने का प्रस्ताव है। ट्रक और बसों की फीस भी इतनी ही किए जाने का विचार है। अभी फीस 1,500 रुपए है। दोपहिया वाहनों के लिए फीस 50 रुपए से बढ़ाकर 1,000 रुपए और कारों के लिए 600 रुपए से बढ़ाकर 5,000 करने का विचार है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बॉडी ने इस पर चिंता जताई है। सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमाबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सिआम) के प्रेसिडेंट राजन बढेरा के मुताबिक, रजिस्ट्रेशन चार्ज बढ़ने से बाजार की स्थिति और खराब होगी। फीस बढ़ाने की बजाय सरकार को इंडस्ट्री के ग्रोथ के लिए जरूरी उपाय करने चाहिए।

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3) बेरोजगारी बढ़ेगी
डेटा ग्रुप सीएमआईई के मुताबिक, देश में बेरोजगारी की दर जुलाई में 7.51% पहुंच गई। पिछले साल जुलाई में 5.66% थी। इसमें दिहाड़ी मजदूरों के आंकड़े शामिल नहीं हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, ऑटो इंडस्ट्री के स्लोडाउन से स्थिति और बिगड़ सकती है। इस सेक्टर ने 3.7 करोड़ लोगों को रोजगार दे रखा है। ऑटो इंडस्ट्री का कुल जीडीपी में 7% और मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में 49% योगदान है। हालात नहीं सुधरे तो ऑटो सेक्टर में 10 लाख नौकरियों पर खतरा रहेगा।

4) इंडस्ट्री की मांग- जीएसटी घटाकर 18% किया जाए
ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसीएमए) के मुताबिक, पूरी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए जीएसटी की दर घटाकर एक समान 18% की जाए ताकि मांग बढ़े और लाखों लोगों की नौकरियां बच सकें। फिलहाल 70 फीसदी ऑटो कंपोनेंट 18% जीएसटी के दायरे में आते हैं। 30 फीसदी कंपोनेंट पर 28% जीएसटी लगता है। सभी ऑटोमोबाइल्स पर भी जीएसटी की यही दर है। इस पर 1% से 15% तक सेस भी लागू होता है।

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Automobile Industry Jobs Losses India: Slowdown in auto sales, India To Lose 10 Lakh Automobile Industry Sector Jobs

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