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वेज से नॉनवेज तक, हर डिश में उपयोगी : गोंगुरा



हेल्थ डेस्क.मेथी, पालक, बथुआ जैसी पत्तेदार सब्जियों से तो सभी वाकिफ होंगे ही। लेकिन आज शेफ हरपाल सिंह सोखी बात कर रहे हैं एक ऐसी पत्तेदार सब्जी की, जिसके बारे में उत्तर भारत के लोग संभवत: कम ही जानते होंगे। यह पत्तेदार सब्जी है गोंगुरा। यह मूलत: दक्षिणी राज्यों-आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में खूब पाई और खाई जाती है। इसे कई लोग ‘मथा’ भी कहते हैं।

  1. दक्षिण भारतीय राज्यों में गोंगुरा का भोजन में इस्तेमाल सदियों से किया जाता रहा है। एक तो इसकी आसान उपलब्धता, सस्ता होना और साथ ही सेहत के लिए काफी लाभदायक होने के कारण गोंगुरा गरीब से लेकर अमीर तक बड़े चाव से खाते हैं। और यह केवल आंध्रप्रदेश या तेलंगाना तक ही सीमित नहीं रही है। यह दक्षिण के अन्य राज्यों जैसे कर्नाटक और तमिलनाडु के भी कई क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय है।

  2. कर्नाटक में यह ‘पुंडी’ के नाम से जानी जाती है और इसे जोलदा रोटी (ज्वार की रोटी) के साथ या फिर रागी मुड्डे (रागी के आटे से बनी बॉलनुमा डिश) के साथ खाते हैं। रागी कर्नाटक का प्रमुख खाद्य पदार्थ है। तमिलनाडु में इसे ‘पुलिचकीराई’ के नाम से जाना जाता है और वहां भी इसे रागी से बनी डिश ‘रागी कली’ (रागी मुड्डे का तमिल वर्जन) के साथ खाया जाता है। महाराष्ट्र के भी दक्षिण से सटे इलाकों में यह ‘अम्बाड़ी’ के रूप में खाई जाती है। इसी भाजी के कुछ अन्य क्षेत्रीय नाम हैं : पिटवा, अम्बाड भाजी, मेस्तापाट, खला पलंगा, नैलाइट साग और आमेली।

  3. गोंगुरा गर्मियों की फसल है। इसके पत्ते खटास लिए होते हैं। जितनी ज्यादा गर्मी पड़ती है, इसके पत्तों में खटास भी उतनी ही बढ़ती जाती है। गोंगुरा दो तरह की होती है- एक हरी डंथल वाली और दूसरी लाल डंथल वाली। लाल रंग की गोंगुरा में हरी गोंगुरा की तुलना में ज्यादा खटास होती है। इसलिए लाल गोंगुरा का इस्तेमाल चटनी-अचार में ज्यादा किया जाता है। लाल गोंगुरा ज्यादा पौष्टिक भी होती है।

  4. गोंगुरा का इस्तेमाल कई तरह से किया जाता है। इससे शाकाहारी चीजें भी बनाई जाती हैं और मांसाहारी चीजें भी। शाकाहारी में सबसे प्रचलित हैं गोंगुरा पचड़ी यानी गोंगुरा चटनी। इसको बनाने के लिए सबसे पहले गोंगुरा की पत्तियों को सूखी लाल मिर्च, खड़ा धनिया, मेथी के दानों, लहसुन और प्याज के साथ अच्छे से पीस लिया जाता है। इस मिश्रण को चना दाल, उड़द दाल, सरसों व मेथी के दानों, लाल मिर्च और करी पत्तों के साथ तड़का लगाया जाता है। यह चटनी खट्टा स्वाद लिए होती है जिसे चावल, कर्ड राइस या चपाती के साथ खाया जाता है।

  5. चटनी के अलावा गोंगुरा दाल भी बनाई जाती है जिसे आंध्रप्रदेश-तेलंगाना में ‘गोंगुरा पप्पू’ कहा जाता है। गोंगुरा से कई तरह के अचार भी बनाए जाते हैं जिसमें पुल्ला गोंगुरा (गोंगुरा और लाल मिर्च) और पुलिहरा गोंगुरा (गोंगुरा और इमली) काफी प्रचलन में है। गोंगुरा का इस्तेमाल कई तरह की मांसाहारी डिशेज में भी किया जाता है। चिकन के साथ इसे मिलाकर गोंगुरा चिकन बनाया जाता है। झींगा मछली के साथ मिलाकर गोंगुरा रॉयलू बनाया जाता है।

  6. चलते-चलते गोंगुरा के सेहत संबंधी फायदों की बात भी कर लेते हैं। यह विटामिन ए, विटामिन बी और विटामिन सी से भरपूर होती है। इस वजह से यह आंखों और त्वचा के लिए काफी अच्छी होती हैं। पोटैशियम और मैग्नीशियम से भरपूर होने की वजह से इसका नियमित सेवन करने से यह बीपी को कंट्रोल में रखती है।

  7. इसमें कैल्शियम और फॉस्फोरस भी पर्याप्त मात्रा में होते हैं। इस वजह से यह हड्डियों को मजबूत बनाए रखती है। गर्मियों के दिनों में इसका सेवन करने से यह शरीर को ठंडा रखती है और बॉडी डिटॉक्सिफिकेशन का काम भी करती है। मठे में इसका रस मिलाकर पीने से यह हाजमे की समस्या से भी निजात दिलवाती है।

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      Food history by Chef Harpal singh Sokhi- Green tangy leaves of gongura makes veg-non veg dishes more tastier

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