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वेयरहाउस के नाम में नर्मदा के आगे ‘मां’ नहीं लिखा, किसानों के गेहूं के 3.65 करोड़ अटके



पुनीत जैन | खातेगांव .समर्थन मूल्य पर बेची गई उपज (गेहूं) का जो भुगतान किसानों को 2 से 3 दिनों में ही हो जाना था, वह 12 दिन बाद भी नहीं हो पाया है। मामला संदलपुर के खरीदी केंद्र का है। यहां से जुड़ी तीन सोसायटियों के 310 किसानों के 3.65 करोड़ रुपए अटके हुए हैं। कारण यह है कि अधिकारियों ने पोर्टल पर एंट्री करते समय खरीदी केंद्र का नाम मां नर्मदा वेयरहाउस की जगह नर्मदा वेयरहाउस लिख दिया। मां नहीं लिखा। अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर किसानों को भुगतान के लिए आज-कल कहकर टाल रहे हैं।

खातेगांव ब्लॉक की इकलेरा सोसायटी के 131 किसानों से 7483 क्विंटल, मुरझाल सोसायटी के 120 किसानों से 8623 क्विंटल और बीजलगांव सोसायटी के 59 किसानों से 3740 क्विंटल गेहूं अब तक खरीदा गया। तीनों सोसायटी का जोड़ें तो कुल 310 किसानों से 19846 क्विंटल गेहूं खरीदा गया। शासन की ओर से अभी किसानों को 1840 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। इस हिसाब से इन 310 किसानों का 3 करोड़ 65 लाख 16 हजार 640 रुपए अटके हुए हैं।

इन तीनों सोसायटी के किसानों का अब तक भुगतान नहीं हो पाने का जो कारण सामने निकलकर आया वो चौंकाने वाला है। तीनों सोसायटी के किसानों का उपार्जन केंद्र संदलपुर स्थित मां नर्मदा वेयरहाउस है। जिस समय इसके नाम की पोर्टल पर मेपिंग की तब इसका नाम गलती से नर्मदा वेयरहाउस लिखा गया। अधिकारियों द्वारा वेयरहाउस नाम में की गई त्रुटि के कारण खरीदी गई उपज का स्वीकृति पत्र नहीं बन पा रहा है। यानी किसान की उपज तो बिक गई पर संबंधित वेयरहाउस ने उसे स्वीकार नहीं किया है और जब तक उपज का स्वीकृति पत्र (टीसी) नहीं निकलता, तब तक किसान को भुगतान नहीं हो सकता। खरीदी एजेंसी मार्कफेड, वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन और खाद्य विभाग के अधिकारी भुगतान नहीं होने का यही कारण बता रहे हैं, पर गलती आखिर किससे हुई, इसकी जवाबदारी कोई नहीं ले रहा।

तीन सोसायटियों को छोड़ कर अन्य जगह हो गया भुगतान :25 मार्च से समर्थन मूल्य पर शुरू होने वाली सरकारी खरीदी जैसे-तैसे अप्रेल के पहले हफ्ते में शुरू हो पायी। जिसके बाद से अब तक खातेगांव ब्लॉक में लगभग 50 हजार क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है। हालाँकि इन तीनों सोसायटी को छोड़कर बाकी सभी किसानों को तय समय में बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से भुगतान मिल रहा है।

क्या है जेआईटी : समर्थन मूल्य खरीदी के लिए इस बार शासन ने भुगतान की प्रक्रिया जेआईटी (जस्ट इन टाइम) के तहत बेहद सरल कर दी है। खरीदी से जुड़े अधिकारियों की माने तो जिस समिति में गेहूं खरीदा जाएगा, उसका प्रबंधक किसान के नाम पर ऑनलाइन ईपीओ (इलेक्ट्रॉनिक पे आर्डर) जारी करेगा। इसके बाद सहकारी सेवा समिति के खाते से संबंधित किसान का जिस बैंक में खाता है, उस शाखा में उपज की राशि ट्रांसफर कर देगा, जहां से बैंक उसे किसान के खाते में ट्रांसफर कर देगी। यदि प्रबंधक उसी दिन ही पैसा ट्रांसफर कर दे तो अधिकतम दूसरे दिन किसान के खाते में पैसे जमा हो जाएंगे।

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