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वे चुनाव हारे, फिर ऐसे जीते कि कोई 2-3 बार मुख्यमंत्री बना तो कोई भाजपा का संस्थापक सदस्य



जयपुर (कपिल भट्ट).राजनीति…नाम सुनते ही हमारा सारा ध्यान इससे जुड़ी नकारात्मक खबरों पर चला जाता है। लेकिन सियासत के समुंदर में थोड़ी गहराई से उतरने पर ऐसे तमाम उदाहरण मिलते हैं, जो सिखाते हैं कि पहली हार को कामयाबी के शिखर तक पहुंचने का पहला कदम भी बनाया जा सकता है। फिर चाहें मौजूदा सीएम अशोक गहलोत हों, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे हों या भाजपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे जसवंत सिंह…इन सभी में एक बात मिलती-जुलती है कि इन्होंने अपना पहला चुनाव हारा था और उसके बाद राजनीति के आकाश में बहुत ऊंची उड़ान भरी।

  1. इस वक्त तीसरी बार मुख्यमंत्री हैं। पांच बार सांसद रहे, तीन बार केंद्र में मंत्री बने, दो बार राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष रहे, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भी रहे। न सिर्फ राजस्थान, बल्कि वे कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता हैं।

    लेकिन…गहलोत 1977 में जोधपुर की सरदारपुरा विधानसभा सीट से पहला चुनाव हार गए थे। इमरजेंसी के खिलाफ देश में जनता पार्टी की लहर थी। उस चुनाव में गहलोत जनता पार्टी के माधो सिंह से चार हजार वोट से हारे थे।

  2. दो बार मुख्यमंत्री रहीं। प्रदेश भाजपा की अध्यक्ष रहीं। केंद्र में भी मंत्री रहीं। 1985 में विधानसभा चुनाव से राजस्थान में राजनीतिक जीवन शुरू किया था। धौलपुर से विधायक बनीं। लगातार 5 बार झालावाड़ से सांसद भी।

    लेकिन…वसुंधरा ने भाजपा से 1984 में मध्यप्रदेश की भिंड लोकसभा सीट से पहला चुनाव लड़ा था। इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति की लहर में वे हार गईं। भाजपा को पूरे देश में मात्र दो सीटें मिली थीं।

  3. 1980 में बनी भाजपा के संस्थापक नेताओं में रहे। केंद्र में वित्त, रक्षा और विदेश जैसे तीनों सबसे प्रमुख मंत्रालयों के मंत्री रहे। वे चार बार लोकसभा और पांच बार राज्यसभा के लिए चुने गए। राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता भी रहे।

    लेकिन…जसवंत सिंह ने 1966 में सेना की नौकरी छोड़ने के बाद 1967 में पहला चुनाव ओसियां विधानसभा सीट से लड़ा था। यहां स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जिसमें हार गए।

  4. भरतपुर लोकसभा सीट से तीन बार सांसद बने। केंद्र सरकार में लंबे समय तक मंत्री रहे और एक बार भरतपुर विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने। राजबहादुर नेपाल में भारत के राजदूत भी रहे थे।

    लेकिन…1952 के पहले आम चुनाव में दो सदस्यीय भरतपुर-सवाईमाधोपुर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव हार गए। लेकिन जल्द ही जयपुर-सवाईमाधोपुर सीट के लिए हुए उपचुनाव में जीतकर लोकसभा पहुंच गए।

    • जयनारायण व्यास :1952 के विधानसभा चुनावों में दो सीटों से चुनाव लड़े और दोनों पर हार गए। फिर किशनगढ़ सीट से उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बने।
    • महारावल लक्ष्मण सिंह : विस अध्यक्ष, स्वतंत्र पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष रहे। 1952 में सागवाड़ा और 1957 में आसपुर और चित्तौड़गढ़ से दोनों विस चुनाव हारे।
    • ललित किशोर चतुर्वेदी : प्रदेशाध्यक्ष, राज्य सरकार में मंत्री, राज्यसभा के सदस्य भी रहे। 1972 में दीगोद विधानसभा सीट से पहला चुनाव हारे।
    • भंवरलाल शर्मा : भाजपा प्रदेशाध्यक्ष, पार्टी के बड़े नेता, कई बार विधायक, राज्य सरकार में मंत्री। पहला चुनाव 1972 में किशनपोल सीट से हार गए।
    • डॉ. किरोड़ीलाल मीणा : मीणों के खांटी नेता। अभी राज्यसभा सदस्य हैं। राज्य सरकार में मंत्री, विधायक, सांसद रहे। पहला चुनाव 1980 में महुवा से हारे।
    • गिरधारीलाल भार्गव : छह बार जयपुर से सांसद। चार बार विधायक रहे। लेकिन पहला चुनाव हवामहल विधानसभा सीट से लड़ा था और हार गए।
    • राजेंद्र राठौड़ : पहला चुनाव 1980 में जनता पार्टी के टिकट पर बनीपार्क फिर दूसरा विस चुनाव 1985 में चूरू सीट से हारे। लेकिन 1990 के चुनावों से लगातार सात विधानसभा चुनाव जीते। वर्तमान में विस में प्रतिपक्ष के उपनेता हैं।
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      Leader who lost his first election but later succeeded in politics

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