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शरीर के दोषों के अनुसार डाइट चुनने में मदद करता है वैदिक पोषण सिद्धांत



हेल्थ डेस्क.हमारे यहां सालों पहले वैदिक पोषण (वैदिक न्यूट्रिशन) का सिद्धांत बहुत प्रचलित था, लेकिन समय बीतने के साथ हम इसे भूलते गए। आयुर्वेद में इसी वैदिक पोषण की चर्चा की गई है। वैदिक पोषण शरीर के दोष के अनुसार सही डाइट बता रही हैं डाइट एंड वेलनेस एक्सपर्ट डॉ. शिखा शर्मा।

आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में तीन दोष होते हैं – वात, पित्त और कफ। तीनों का संतुलन जरूरी है। किसी का भी असंतुलन होने पर उससे संबंधित बीमारी की आशंका बढ़ जाती है। जैसे वात का असंतुलन होने पर नर्वस सिस्टम, पित्त का असंतुलन होने पर पाचन प्रणाली और कफ का असंतुलन होने पर इम्युनिटी पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए हर व्यक्ति को सबसे पहले तो इस बात को पहचानना जरूरी है कि उसमें क्या दोष है या उसके शरीर की प्रकृति कैसी है? इसकी पहचान आयुर्वेद का कोई अच्छा विशेषज्ञ ही कर सकता है।

  1. वात प्रकृति के लोगों को उस तरह का अनाज अवॉइड करना चाहिए जो फाइबर से भरपूर होता है, जैसे मक्का, बाजरा, ओट्स इत्यादि। ये ड्राय फाइबर कहलाते हैं। चूंकि वात की वजह से शरीर में ड्रायनेस बढ़ती है। ऐेसे में अगर वात प्रकृति का व्यक्ति इस डाइट को लेगा तो उसके भी शरीर में ड्राइनेस बढ़ती जाएगी।

  2. आयुर्वेद के अनुसार वात प्रकृति के व्यक्तियों को ड्राइनेस से बचने के लिए ड्राय फाइबर तो अवॉइड करना ही चाहिए, साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला फैट भी संतुलित मात्रा में जरूर लेना चाहिए। फैट वात के ड्राई नेचर को बैलेंस करने का काम करेगा। हाई क्वालिटी वाले फैट में सबसे बेहतर होगा कि आप देसी घी लें। देसी घी के अलावा तिल्ली का तेल और ऑलिव ऑइल भी अच्छे विकल्प हैं।

  3. पित्त और कफ प्रकृति के लोगों के लिए सलाद और फलों का सेवन काफी फायदेमंद होता है। वात प्रकृति के लोगों को हल्की उबली हुई सब्जियों का सेवन ज्यादा करना चाहिए। यानी सब्जियों को केवल दो से तीन मिनट तक उबालकर खाना चाहिए।

  4. कफ प्रकृति के लोगों में पानी की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए ऐसे लोगों को कम मात्रा में नमक लेना चाहिए, क्योंकि नमक से शरीर में पानी का जमाव (वॉटर रिटेंशन) बढ़ता है। इससे सूजन की समस्या हो सकती है। हालांकि लो ब्लड प्रेशर की समस्या वाले लोगों को इस मामले में अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

  5. आयुर्वेद के अनुसार सभी तरह के नट्स (अखरोट, बादाम और पिश्ते) और सूरजमुखी व कद्दूके बीज वात और कफ प्रकृति के लोगों के लिए अच्छे होते हैं। पित्त दोष में ब्लांच्ड बदाम का सेवन अच्छा माना जाता है। ब्लांच्ड बदाम बनाने के लिए एक कटोरी में थोड़ी-सी बादाम लीजिए। उसमें उबला हुआ पानी डालिए। इसे केवल एक मिनट तक रखिए। फिर इसमें से बादाम को बाहर निकालकर उनके छिलके निकाल लीजिए।

  6. आयुर्वेद के अनुसार एग योक (यानी अंडे का पीला हिस्सा) पित्त दोष को बढ़ाता है। इसलिए जिन्हें गैस या बहुत ज्यादा एसिडिटी की समस्या हो, उन्हें कम से कम अंडे का पीला भाग खाने से बचना चाहिए। हालांकि अंडे का सफेद हिस्सा लिया जा सकता है।

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      Diet Salah by dr shiksha sharma- vaidik poshan helps in having right diet as per body

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