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शरीर में अम्ल का संतुलन बिगड़ने से हाई बीपी, ब्लॉकेज और स्टोन का खतरा ज्यादा



हेल्थ डेस्क.शरीर को स्वस्थ रहने के लिए कई संतुलन बनाए रखने होते हैं जैसे ब्लड प्रेशर, पानी और मिनरल्स का संतुलन। एक और महत्त्व संतुलन है एसिड और बेस अल्कली का बैलेंस। हमारे शरीर का सामान्य पीएच 7 से थोड़ा अधिक होना चाहिए अर्थात् थोड़े से अल्कलाइन (क्षारीय) वातावरण में हमारे सेल्स स्वस्थ रहकर अपना काम सही ढंग से करते हैं। लेकिन आजकल शरीर में एसिड का लेवल बढ़ता जा रहा है। इस अवस्था को मेटाबॉलिक एसिडोसिस कहते हैं। एसिड का स्तर जब ब्लड में बढ़ता है तो यह ब्लॉकेज उत्पन्न करता है जो कि हार्ट अटैक, लकवा और वेरीकोस वेन्स जैसी समस्याएं उत्पन्न करता है। अगर बढ़े हुए एसिड को नियंत्रित कर लें तो इन बड़ी-बड़ी समस्याओं से बच सकते हैं।नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. सुदीप सचदेवा और आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. अबरार मुल्तानीसे समझें एसिड बढ़ने पर शरीर में क्या होता है बदलाव और कैसे निपटें….

क्यों बढ़ता है शरीर में अम्ल का स्तर
1- वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर कम होना और कार्बन डाई ऑक्साइड का स्तर बढ़ना बड़ा कारण है। सांस लेने पर यह बढ़ी हुई कार्बन डाइ ऑक्साइड रक्त के पीएच को कम कर देती है। शरीर से एसिड के उत्सर्जन का कार्य मुख्य रूप से फेफड़ों और किडनी का है, यदि यह दो अंग ठीक से काम नहीं करते हैं तो भी शरीर में एसिड का स्तर बढ़ जाता है। इसलिए मेटाबॉलिक एसिडोसिस के उपचार के समय इन दोनों अंगों का खास ख्याल रखना चाहिए।

2- भोजन में सब्ज़ियों, फ्रूट्स व मेवों की कमी और इसकी जगह नॉनवेज, शुगर, अल्कोहल, चाय, कॉफ़ी, रिफाइंड तेल और आटे का ज्यादा प्रयोग – यह सभी मिलकर शरीर में एसिड की बढ़ोतरी करते हैं।

मेटाबॉलिक एसिड कई तरह की समस्याओं का कारण बनता है
हाई ब्लड प्रेशर :
एसिड अधिक होने से अल्कलाइन मेटल्स जैसे पोटैशियम और मैग्नीशियम का स्तर खून में कम होना ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है।
किडनी स्टोन :एसिडिक वातावरण किडनी में स्टोन का निर्माण करता है, क्योंकि बढ़े हुए एसिड को कम करने के लिए उसे हड्डियों से कैल्शियम निकालना पड़ता है और यह कैल्शियम किडनी में जाकर जमा हो जाता है और पथरी या स्टोन्स बनाता है।
ऑस्टियोपोरोसिस:हड्डियों से कैल्शियम के निकलने से वे कमज़ोर होकर कमजोर हो जाती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस हो जाता है।
जल्दी बुढ़ापा आना :एसिड बढ़ने से सेल्स जल्दी-जल्दी मरने लगते हैं, इसलिए बुढ़ापा शीघ्र आ जाता है। बाल जल्दी सफेद होने लगते हैं, झुर्रियां आने लगती हैं, इम्युनिटी कम होने लगती है और थकान भी जल्दी होने लगती है।
दांत और मसूड़ों की समस्या :एसिड दांत, मसूड़ों की तकलीफ भी बढ़ाते हैं, जिससे वे जल्दी खराब होने लगते हैं।
दिमाग की एक्टिविटी डिस्टर्ब होना :एसिड बढ़ने से आरबीसी की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता में कमी आ जाती है और कम ऑक्सीजन मिलने से दिमाग अपने कार्यों को करने में दिन-ब-दिन कमजोर होता चला जाता है।
ब्लॉकेज बनना :एसिड बढ़ने से रक्त में थक्के बनने लगते हैं, जिससे ब्लॉकेज बनने लगते हैं और हार्ट अटैक लकवा जैसी घातक समस्या होने की आशंका बढ़ जाती है।

कैसे चेक करें पीएच का सही संतुलन है या नहीं
केमिकल शॉप या ऑनलाइन मिलने वाले हैड्रॉन पीएच पेपर का प्रयोग कर सकते हैं। उसे लेकर यूरिन या लार के द्वारा उसमे दिए कलर इंडिकेटर से शरीर में हो रहे बदलाव का आसानी से पता लगा सकते हैं। इसके लिए उसे कुछ सेकंड के लिए सुबह यूरिन सैम्पल को प्लास्टिक के कप में लेकर उसमें पीएच पेपर डुबाकर निकाल लें और जब पेपर सूख जाए तो उसके साथ दिए गए कलर चार्ट से मिलान करके पता कर लें कि यूरिन एसिडिक है या कि फिर अल्कलाइन (क्षारीय)। सुबह की लार के द्वारा ऐसे ही किया जा सकता है। यूरिन और लार का सामान्य पीएच 7 होता है।

एसिडिक पीएच को कैसे सही किया जाए

  • लौकी का जूस, पुदीने की चटनी या तुलसी की पत्तियों को कुछ दिन खाएं तो बढ़ा हुआ एसिड कंट्रोल होता है।
  • अधिक तेल और मसाले वाले खाने से बचें। डाइट में मौसमी फल और सब्जियों को शामिल करें।
  • अल्कोहल और कॉफी से दूर रहें।
  • पास्ता, व्हाइट ब्रेड और एनिमल फैट लेने से बचिए।

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