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शहीद की पत्नी को राखी पर गिफ्ट में 10 लाख का मकान, भाइयों के हाथ पर चलकर किया गृहप्रवेश



इंदौर. देपालपुर के पीरपीपलिया गांव के युवाओं ने स्वतंत्रता और रक्षा बंधन पर एक ऐसा देशभक्ति का काम किया, जो गर्व करने लायाक है। इन युवाओं ने भारत माता की रक्षा के लिए खुद को न्यौछावर करने वाले शहीद की पत्नी से ना सिर्फ राखी बंधवाई, बल्कि उसे उपहार में 11 लाख रुपए का घर बनाकर भी दिया। बहन ने जब गृह प्रवेश के लिए पैर आगे बढ़ाए तो इन युवा भाइयों ने अपने हाथ आगे बढ़ा दिया। बहन ने इनके हाथों से गुजरकर गृह प्रवेश किया।

दरअसल, बेटमा के पास पीरपीपलिया के रहने वाले मोहनलाल सुनेर दिसंबर 1992 में त्रिपुरा में दुश्मनों से लड़ते हुए सुनेर शहीद हो गए थे। उनकी शहादत के बाद सरकार ने उनके परिवार की सुध नहीं ली। इसके चलते शहीद की पत्नी के समक्ष आर्थिक समस्या खड़ी हो गई। दो बेटों को पालना मुश्किल हो गया। उन्होंने मजदूरी की और किसी तरह बेटों को पढ़ाया। पढ़ाई खत्म होने पर उन्होंने बड़े बेटे राजेश को सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

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पिता की तरह देशसेवा का जज्बा लेकर राजेश बीएसएफ में शामिल हो गया। छोटा बेटा राकेश मां के साथ बेटमा स्थित कच्चे मकान में रहता था। शहीद के परिवार का संघर्ष देख कई युवाओं ने उनकी माली हालत सुधारने की पहल की है। इसी के तहत देपालपुर के कुछ युवाओं ने वन चेक फॉर शहीद नामक अभियान चलाया और 15 अगस्त को बहन को 11 लाख रुपए का मकान रखी बंधवाकर उपहार में दिया। युवाओं ने एक लाख रुपए में शहीद की प्रतिमा स्थल बनाने का लक्ष्य रखा है।

हाथों पर चलकर बहन ने किया गृह प्रवेश
27 सालों से गरीबी में जीवन-यापन करने वाली शहीद की पत्नी से बड़ी संख्या में युवा राखी बंधवाने उनके कच्चे और टूटे-फूटे मकान में पहुंचे। यहां सभी ने राखी बंधवाई और उन्हें पक्के मकान की चाबी सौंपी तो उसकी आंखें नम हो गई। भरे गले से उन्होंने भाइयों का आभार माना और गृह प्रवेश के लिए आगे बढ़ीं। जैसे ही उन्होंने कदम आगे बढ़ाया। भाइयों ने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाते हुए जमीन पर रख दिए। बहन ने इन भाइयों के हथेलियों पर पांव रख नए घर में प्रवेश किया। गृह प्रवेश का दृश्य देखकर हर कोई भावविभोर हो गया।

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अभियान के संयोजक विशाल राठी ने बताया कि एक साल पहले जब शहीद के गांव गए तो उनका मकान देखकर काफी दुख हुआ। जो व्यक्ति देश हित में शहीद हुआ है, उसका परिवार टूटी-फूटी झोपड़ी में रह रहा है। उस टीस को मन में लेकर एक अभियान छेड़ा और शहीद के परिजनों को पक्का मकान बनाने के लिए लोगों से सहयोग मांगा। लोगों ने देखते ही देखते दिल खोलकर 11 लाख रुपए दान में दे दिए, जिससे शहीद के परिजनों के लिए सर्वसुविधा युक्त पक्के मकान का निर्माण किया गया और शाहिद की पत्नी को रक्षाबंधन पर उस मकान में गृह प्रवेश कराया गया।

बड़ा बेटा तीन साल का था, पत्नी थी गर्भवती
पत्नी राजूबाई ने बताया कि पति मोहन सिंह सुनेर जब शहीद उस वक्त उनका बड़ा बेटा तीन साल का था और वे चार माह की गर्भवती थीं। पति की शहादत के बाद दोनों बच्चों को पालने के लिए उन्हांेने कड़ी मेहनत की और टूटे झोपड़े में रहते हुए मजदूरी कर बच्चों को बड़ा किया। इस परिवार को आज तक किसी प्रकार का कोई सरकारी लाभ नहीं मिला।

स्कूल का नामकरण भी करेंगे शहीद के नाम पर
राठी के मुताबिक शहीद के परिवार के लिए 10 लाख रुपए में घर तैयार हो गया। इसके साथ ही एक लाख रुपए मोहन सिंह की प्रतिमा के लिए रखे हैं। प्रतिमा भी लगभग तैयार है। इसे पीर पीपल्या मुख्य मार्ग पर लगाएंगे। इसके साथ ही जिस सरकारी स्कूल में उन्होंने पढ़ाई की है, उसका नाम भी उनके नाम पर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान से जुड़े सोहन लाल परमार ने बताया की अभियान में बेटमा ,सांवेर, गौतमपुरा, पीथमपुर, सागौर कनाड़िया, बड़नगर, हातोद, आगरा तथा महू क्षेत्र के लोगों ने सहयोग किया।

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