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शूटिंग के लिए 12वीं की परीक्षा छोड़ी थी, अब श्रेया ने देश के लिए जीते तीन गोल्ड मेडल



जबलपुर. यहां की रहने वाली श्रेया ने सोमवार को ताइपे (ताइवान) में चल रही 12वीं एशियन एयरगन शूटिंग चैम्पियनशिप में 10 मीटर एयर राइफल जूनियर वर्गमें वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के साथ गोल्ड मेडल जीता। वे इससे पहले टीम और मिक्स्डटीम इवेंट में भी देश के लिए गोल्ड जीत चुकी हैं।इस प्रदर्शन से उनके घर में जश्न का माहौल है।पिता संजय अग्रवाल ने दैनिक भास्कर एप प्लस सेबातचीत की। उन्होंने श्रेया की जिंदगी के उस वाकये का जिक्र किया, जिसने बेटी को आज शिखर पर पहुंचा दिया।

पिता ने बताया कि तीन साल पहले, जब श्रेया 9वीं में थीं, तब वह स्कूल टीम के साथ एक शूटिंग इवेंट में गई थी। वहां उसनेगोल्ड मेडल जीत लिया।इसके बाद वह निशानेबाजी का नियमित ट्रेनिंग लेने लगी।दूसरी वजह, उसका भाई यश है। जो राष्ट्रीय स्तर का शूटर है।

रात को ही कह दिया था कि गोल्ड जीतूंगी
पिता बताते हैं कि श्रेया ने अपने पहले प्रदर्शन के बाद से पीछे मुड़कर नहीं देखा। रविवार रात 8.30 बजे श्रेया का फोन आया था। कहा- कल मैच है। मैंगोल्ड ही जीतूंगी। इसके बाद हमें आज 11 बजे उसके कोच निशांत नथवानी ने बताया कि बेटी ने वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता है।

परीक्षा और खेल में, खेल को चुना
संजय ने बताया कि एशियन चैम्पियनशिप के लिए दिल्ली में ट्रॉयल हो रहे थे और श्रेया को इसके लिए चुना। उसने मां (मीना अग्रवाल) और मुझसे कहा- शूटिंग चैम्पियनशिप का ट्रॉयल है और 12वीं की परीक्षा भी चालू हो रही है। इस पर हमने उसे कहा- परीक्षा होती रहेगी। तुम ट्रॉयल देने जाओ। वह गई और एशियन शूटिंग चैम्पियनशिप के लिए चुन ली गई।

तीन साल पहले उठाई गन, अब विश्व चैम्पियन
18 साल की छोटी सी उम्र में विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप में स्वर्णिम प्रदर्शन करने वाली श्रेया ने महज 3 साल पहले राइफल पकड़ी थी।नियमित अभ्यास, लगन और मेहनत के कारणउनकीदेश के शीर्ष जूनियर निशानेबाजों के बीच अलग पहचान है।

गगन नारंग फाउंडेशन का फायदा मिला
पिता ने बताया कि गगन नारंग फाउंडेशन से जुड़ने का श्रेया को फायदा मिला। उसने शूटिंग की बारीकियां तेजी से सीखीं। जबलपुर में उसके कोच निशांत नथवानी हैं। वे भी नारंग फाउंडेशन से जुड़े हैं।

बेटी पर गर्व है: पिता
ईपीएफ विभाग में कार्यरत पिता संजय कहते हैं, हमें अपनी बेटी पर गर्व है। उसने मप्र के साथ ही दुनिया में देश का मान बढ़ाया। इन तीन मेडल के साथ ही अब तक वह 13 इंटरनेशनल मेडल जीत चुकी है। सरकार ने उसे ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट (ओजीक्यू) के लिए भी चुना है। मां मीना अग्रवाल शासकीय शिक्षक हैं। बेटी की सफलता से बेहद खुश मीना कहती हैं- हमें उसके पदक जीतने की उम्मीद थी और उसने एक-दो नहीं पूरे तीन गोल्ड मेडल जीत लिए।

12वीं एशियन एयरगन शूटिंग चैंपियनशिप में श्रेया का प्रदर्शन-

1 – 10 मीटर व्यक्तिगत स्पर्धा – गोल्ड
2 – टीम इवेंट में गोल्ड

3 – मिक्स्ड डबल में गोल्ड

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श्रेया के बडे भाई यश अग्रवाल भी नेशनल शूटर हैं।


जबलपुर की श्रेया अग्रवाल ने ताइपे में चल रही एशियन एयरगन चैंपियनशिप में वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता है।


वह अब तक 13 इंटरनेशनल मेडल जीत चुकी हैं।


श्रेया अग्रवाल ने तीन साल पहले ही शूटिंग शुरू की है।


श्रेया ने एशियन चैंपियनशिप में देश के लिए तीन गोल्ड जीते हैं।


श्रेया अग्रवाल अपनी टीम मेट्स के साथ ताइपे में।


एशियन चैंपियनशिप में टीम इवेंट में भारतीय टीम के साथ श्रेया। (बीच में)


जबलपुर की शान श्रेया अग्रवाल।


The father said – proud of the daughter, Had left the 12th exam,   3 gold for the country now


वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी श्रेया अग्रवाल।


श्रेया अग्रवाल।


श्रेया अग्रवाल।

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