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सस्ती कृत्रिम त्वचा बनाई, सेल्स बनाने एंजाइम की जगह नमक का इस्तेमाल किया



लाहौर. एसिड अटैक के पीड़ितों के इलाज के लिए पाकिस्तान के डॉक्टर रऊफ अहमद ने कृत्रिम त्वचा बनाकर क्रांतिकारी आविष्कार किया है। अभी प्रयोगशाला में स्किन सेल्स बनाने के लिए ट्राइपीजाइन एंजाइम का इस्तेमाल किया जाता है। लाहौर के डॉ. रऊफ ने इसकी जगह सोडियम क्लोराइड यानी नमक का इस्तेमाल किया।

डॉक्टर का कहना है कि इस उपलब्धि से कृत्रिम त्वचा उगाने का खर्च घटकर मात्र 350 रुपए (पांच डॉलर) प्रति इंच रह गया है। इतना ही नहीं इस तरह से बनी त्वचा को दो साल तक स्टोर भी किया जा सकता है।

जानवरों के बाद इंसानों पर प्रयोग :इस कृत्रिम त्वचा का जानवरों पर सफल परीक्षण करने के बाद पिछले साल अक्टूबर में उन्होंने एसिड अटैक से पीड़ित लोगों पर इसका परीक्षण शुरू किया। अगले दो महीनों के भीतर यह परीक्षण पूरे हो जाएंगे। डॉ. रऊफ का कहना है कि परीक्षण के नतीजे शानदार रहे हैं। लाहौर की यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस के वीसी प्रो. जावेद इकराम के मुताबिक, पाकिस्तान में बनी यह कृत्रिम त्वचा गुणवत्ता में सबसे अच्छी है।

एसिड अटैक के पीड़ितों को मिलेगा सस्ता इलाज: इस खोज से एसिड अटैक पीड़ितों को बहुत ही कम दर पर इलाज उपलब्ध हो सकेगा। आज यह इलाज इससे कई गुना महंगा पड़ता है। अभी जलने पर लोगों का इलाज शरीर के दूसरे हिस्सों निकाली गई अथवा किसी डोनर से ली गई त्वचा से होता है। किसी मरीज के खुद के शरीर से त्वचा को निकालना काफी महंगा पड़ता है, जबकि डोनर द्वारा दी जाने वाली त्वचा को लंबे समय तक सुरक्षित रखना चुनौती होता है।

गांवों और छोटे शहरों की महिलाएंउठा सकेंगी खर्च: डॉक्टर लैब में बनाई गई कृत्रिम त्वचा की कीमत करीब 63 हजार रुपए (900 डॉलर) प्रति वर्ग इंच पड़ती है। गांवों या छोटे शहरों में एसिड अटैक की शिकार बनने वाली मध्यम वर्ग की महिलाएं इस खर्च को उठाने में सक्षम नहीं होती हैं।डॉक्टर रऊफ अहमद के आविष्कारने महंगे इलाज से मुक्ति मिल जाएगी।

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प्रतीकात्मक फोटो।

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