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सिटीजन बिल के मुद्दे पर भाजपा से अलग हुई थी अगप, चुनाव आते ही फिर साथ



गुवाहाटी (राजेश माली).40 साल के सेल्स एग्जीक्यूटिव बंधन डे गुवाहाटी के वोटर हैं लेकिन खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के लिए मशक्कत कर रहे हैं। यही हाल उनके परिवार के पांच सदस्यों का है, जिनमें 80 साल की उनकी बूढ़ी मां भी शामिल हैं। दरअसल असम की राजनीति में भूचाल ला देने वाले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप (एनआरसी) में उनका नाम नहीं है। एनआरसी सेवा केंद्र में दस्तावेज लेकर मौजूद बंधन चुनाव का जिक्र छेड़ते ही बिना पूछे प्रधानमंत्री मोदी का गुणगान शुरू कर देते हैं।

कहते हैं मोदी में ही निर्णय लेने की क्षमता है। एनआरसी के साथ ही यहां नागरिकता संशोधन विधेयक (सिटीजनशिप अमेेेंडमेंट बिल यानी कैब) भी बड़ा मुद्दा है। इस बिल का विरोध करने वाले कई संगठनों को कांग्रेस ने अपने साथ कर लिया था। असम गण परिषद (अगप) तो इस बिल के विरोध में भाजपा से गठबंधन तक तोड़ चुकी थी। इसके बावजूद अब दोनों में फिर से गठबंधन हो गया है। अगप असम में तीसरी बड़ी पार्टी है। 2016 के विधानसभा चुनाव में उसे 126 में से 14 सीट मिली थी।

फैंसी बाजार के कपड़ा व्यवसायी विकास जैन जीएसटी की जटिलताओं में उलझने के बावजूद कहते हैं- ‘राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद भ्रष्टाचार कम हुआ है।’ हाथीगांव गुवाहाटी का मुस्लिम बहुल इलाका है। यहां के कई लोगों के नाम एनआरसी में नहीं है। फार्मेसी दुकान के मालिक अशरफ अली का मानना है इससे भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

गुवाहाटी संसदीय क्षेत्र से मौजूदा भाजपा सांसद बिजया चक्रवर्ती तीन मर्तबा जीत चुकी हैं। वे राज्यसभा सदस्य भी रहीं। 2004 में भाजपा ने उनका टिकट काटकर असम के जाने माने गायक दिवंगत भूपेन हजारिका को दिया था। उनके गीत आज भी लोगों की जुबां पर हैं लेकिन चुनाव में लोगों ने उन्हें पसंद नहीं किया। 80 साल की उम्र को देखते हुए पार्टी चक्रवर्ती को राजनीति से रिटायरमेंट का संकेत दे चुकी है। शाम के वक्त धूप-अगरबत्ती के धुएं के बीच महक रहे भाजपा दफ्तर में बैठे पार्टी प्रदेश उपाध्यक्ष विजय कुमार गुप्ता भी कहते हैं- पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान पर की गई कार्रवाई के बाद हमारी स्थिति काफी मजबूत हो गई है।

इधर कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन परिसर में प्रवेश करते ही ‘रफाल’ पर नजर पड़ती है। कांग्रेस ने यहां रफाल का माॅडल बनवाकर रखा है। कांग्रेस के प्रवक्ता ऋतुपर्णो मानते हैं- रफाल अपनी जगह है लेकिन यहां एनआरसी, नागरिकता संशोधन बिल जैसे क्षेत्रीय मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। केब के विरोध में हम असम के लोगों के साथ खड़े हुए हैं, क्योंकि ये असम की अस्मिता का सवाल है।

मुद्दे… यहां स्थानीय मुद्दे पर वोट गिरेंगे
नागरिकता संशोधन बिल मुख्य मुद्दा है। विरोध करने वाले संगठनों का कहना है भाजपा हिंदू बांग्लादेशियों को नागरिकता दिलाना चाहती है। असम गण परिषद समेत कई दलों ने इसका विरोध किया।

गठबंधन… भाजपा संग बीपीएफ, अगप
भाजपा का बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट से गठबंधन है। असम गण परिषद भाजपा का हाथ थामने को लेकर उहापोह में रही। पर आखिरकार गठबंधन हो ही गया। कांग्रेस सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।
गुवाहाटी व उसके आसपास की 4 सीटों का हाल

  • मंगलदोई : इस संसदीय क्षेत्र में पिछले तीन चुनाव से भाजपा का कब्जा है। यहां बोडो बड़ी संख्या में हैं और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) का भाजपा से गठबंधन है।
  • नगांव : अब इसे भाजपा का गढ़ माना जाता है। रेल राज्य मंत्री राजेन गोहेन पिछले चार चुनाव से यहां से सांसद हैं।
  • स्वायत्तशासी जिला : कांग्रेस के बिरेन सिंह यहां से सातवीं बार संसद पहुंचे हैं। लेकिन पिछले महीने ही जिला परिषद के चुनाव में यहां भाजपा ने जीत दर्ज कर अपना बोर्ड बनाया है।
  • तेजपुर : पिछले चुनाव में पहली बार भाजपा ने यहां खाता खोला था। 2009 में असम गण परिषद का कब्जा था।

{गुवाहाटी: यहां भाजपा से बिजया चक्रवर्ती सांसद हैं।

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चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले गुवाहाटी में एनआरसी सेवा केंद्र का दृश्य। यहां भारतीय साबित करने के लिए रोज ऐसी ही भीड़ जुटती है। एनआरसी ड्राफ्ट में करीब 40 लाख लोगों के नाम नहीं थे। 

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