ब्रेकिंग न्यूज
loading...
Hindi News / टेक / हर साल 50 किमी खिसक रहे हैं धरती के चुंबकीय ध्रुव, इससे फोन के जीपीएस पर होता है असर

हर साल 50 किमी खिसक रहे हैं धरती के चुंबकीय ध्रुव, इससे फोन के जीपीएस पर होता है असर



गैजेट डेस्क. धरता के चुंबकीय ध्रुव बर साल 50 किलोमीटर तक खिसकते जा रहे हैं, जिसका असर हमारे नेविगेशन सिस्टम पर पड़ रहा है। दरअसल, धरती एक चुंबक है जिसके दो सिरे होते हैं और इन दो सिरों को ही धरती के चुंबकीय ध्रुव कहा जाता है। ये ध्रुव अपनी-अपनी जगहों से खिसकते रहते हैं। जिसको लेकर हर 5 साल में एक रिपोर्ट जारी की जाती है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इस बार धरती के मैग्नेटिक मॉडल को एक साल पहले ही अपडेट करने और रिपोर्ट जारी करने की सोची। इस रिपोर्ट को 15 जनवरी को आना था, लेकिन अमेरिका में शटडाउन होने की वजह से इस रिपोर्ट को पेश नहीं किया गया।

गूगल मैप्स से लेकर जहाजों पर इस्तेमाल होने वाले कुतुबनुमा तक पर असर

  • अब सवाल कि ध्रुवों के खिसकने की रिपोर्ट ना आने से हम पर क्या असर पड़ेगा? हमारे फोन के गूगल मैप, जीपीएस से लेकर जहाजों पर इस्तेमाल होने वाले कुतुबनुमा तक पर असर होगा। दरअसल, ध्रुवों के खिसकने का असर हर उस डिवाइस पर होता है, जो दिशा बताती है..रास्ता बताती है। ये सारी डिवाइस चुंबकीय ध्रुवों से खुद को को-ऑर्डिनेट करके ही दिशाएं या रास्ते बताती हैं। हर 5 साल में रिपोर्ट जारी कर इन ध्रुवों की नई स्थिति से तमाम नेविगेशन सिस्टम को को-ऑर्डिनेट किया जाता है।
  • अब रिपोर्ट देर से आने से नेविगेशन सिस्टम अपडेट नहीं हो पाएंगे। ऐसे में जीपीएस के बताए रास्ते भी आपको गलत मंजिल तक पहुंचा सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि लोग गूगल मैप्स जैसे एप्लीकेशन्स और ऐसे ही अन्य नेविगेशन सिस्टम पर पूरी तरह भरोसा करते हैं। ये सटीक रास्ते भी बताते हैं क्योंकि इनका ध्रुवों से सटीक को-ऑर्डिनेशन रहता है।

पृथ्वी के भीतर ढेर सारा लिक्विड आयरन है

  • अगर यह अपनी सटीक स्थिति का आकलन नहीं कर पाए तो नेविगेशन सिस्टम फेल होने लगेंगे। दरअसल पृथ्वी के भीतर ढेर सारा लिक्विड आयरन है, यानी तरल लौह पदार्थ। इसकी ढलान से ही चुंबकीय क्षेत्र की दिशा तय होती है। अब ग्लेशियर की बर्फ लगातार पिघलने से इस लिक्विड आयरन पर दबाव बढ़ गया है और इसकी ढलान अनियमित हो गई है। इसी वजह से चुंबकीय ध्रुव भी खिसक रहे हैं।
  • पृथ्वी की चुंबकीय थ्योरी 17वीं सदी के दार्शनिक विलियम गिलबर्ट की दी हुई है। ब्रिटिश खोजकर्ता जेम्स रॉस क्लार्क ने 1831 में बताया कि कुछ हिस्सों में चुंबकीय ध्रुव बढ़ गया है। इसके बाद नार्वे के वैज्ञानिक रोनाल्ड अमुंडसेन ने पाया कि ध्रुवों की स्थिति ही बदल रही है।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


earth magnetic field is moving faster which affects our navigation system

Check Also

फेक न्यूज पर लगाम लगाने की तैयारी में व्हाट्सएप, पता चलेगा कितनी बार फॉरवर्ड हुआ मैसेज

गैजेट डेस्क.व्हाट्सएप एक नए फीचर पर काम कर रहा है जिसके जरिए पता चल सकेगा …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *