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़110 के बजाय 130 दिन में पकी सरसों, इसलिए उत्पादन 35 % ज्यादा




मौसम की मेहरबानी से इस बार जिले में सरसों की बंपर पैदावार किसानों को मालामाल करेगी। जिले में सरसों का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 35 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद है। जिले में प्रति हेक्टेयर 16 क्विंटल तक सरसों निकल रही है। जबकि गत वर्ष जिले में सरसों की उत्पादकता 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही थी। कृषि विभाग के अधिकारी कहते हैं कि 110 दिन में पकने वाली सरसों इस बार 130 दिन में पकी है। इस कारण सरसों की गुणवत्ता के साथ पैदावार भी अच्छी हुई है। इस बार बारिश व ओलावृष्टि का ज्यादा प्रभाव सरसों पर नहीं पड़ा। इस कारण सरसों की पैदावार उम्मीद से ज्यादा बैठ रहा है।

कृषि विभाग के एसडीओ एसके शर्मा ने बताया कि इस बार मौसम सरसों की फसल के अनुकूल रहा। सर्दी का प्रभाव ज्यादा दिनों तक रहा। पिछले कुछ सालों से सरसों आमतौर पर 110 दिन में पक कर तैयार हो जाती थी। इस बार ऐसा नहीं हुआ। सर्दी का असर अधिक दिनों तक रहने से इस बार सरसों 130 दिन में पक कर तैयार हुई है। इससे सरसों की गुणवत्ता के साथ उत्पादकता भी बढ़ी है। इस बार अतिवृष्टि और ओला वृष्टि का प्रभाव भी सरसों की फसल पर नहीं पड़ा। इसलिए प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 16 क्विंटल से अधिक रहने की उम्मीद है। आजकल खेतों में सरसों की कटाई की जा रही है। इस बार जिले में किसानों ने 46 हजार हेक्टेयर में सरसों की बोवनी की थी। जबकि पिछले साल सरसों की बुआई 40 हजार हेक्टेयर में हुई थी और उत्पादकता 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही थी।

मानपुर के पास के खेत में थ्रेसर से सरसों की फसल तैयार करते किसान।

मंडी में बढ़ने लगी सरसों की आवक

कृषि उपज मंडी में सरसों की आवक बढ़ने लगी है। कहना है कि मंडी में फिलहाल सरसों की आवक 800 से 900 क्विटंल प्रतिदिन हो रही है। भाव 3000 से 3600 रुपए प्रति क्विंटल चल रहे हैं। मंडी में सरसों की आवक जल्द ही 10 से 15 हजार क्विंटल होने की संभावना है । व्यापारी दिनेशचंद्र मंगल का कहना है इस बार सरसों की क्वालिटी अच्छी आ रही है। हालांकि भाव में पिछले साल के मुकाबले अधिक अंतर नहीं है।

सर्दी का मौसम लंबा चलने से बढ़ी सरसों की पैदावार

<img src="images/p2.png"जिले में सरसों की फसल पकने के साथ कटाई का काम जोर पकड़ गया है। इस बार सर्दी का दौर लंबा खिंचने और फसल निरोगी होने की वजह से औसत पैदावार बेहतर होगी। जिले में सरसों की उत्पादकता 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से भी ज्यादा हो रही है। सरसों के अलावा इस बार गेहूं का उत्पादन भी बढ़ने की उम्मीद है। पी. गुजरे, उपसंचालक, कृषि विभाग श्योपुर

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