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1 साल में 800 पीड़ितों में से 740 को बैंकों से दिलाए पैसे



जयपुर (प्रमोद कुमार शर्मा).दो महीने में एक खाताधारक के खाते 68 बार एटीएम से फ्राड कर पैसे निकाल लिए। लेकिन ना बैंक को और ना ही ग्राहक को इसका पता लगा। हालांकि इस मामले में बैंक को नुकसान की भरपाई करनी पड़ी। बैंकों की लापरवाही से प्रदेश में पिछले एक साल में एटीएम फ्राड के केस 50 फीसदी से ज्यादा बढ़कर3,000 से ज्यादा होने अनुमान है। बैंकिंग लोकपाल कार्यालयों को एटीएम से संबंधित मिली शिकायतों में भी कार्ड क्लोनिंग कर खाते से पैसे निकालना। विभिन्न शहरों में एक ही समय में एक खाते से एटीएम से पैसे निकालना जैसे मामले सामने आए हैं। इन सब मामलों में बैंकिंग लोकपाल ने बैंकों को दोषी माना और खाताधारकों को राहत दी है।

  1. बैकिंग लोकपाल को आई शिकायत में शिकायतकर्ता के कार्ड से दो महीने में 68 बार एटीएम से पैसे निकाले गए थे। दो महीनेे बाद ग्राहक को पता लगा तो उसने बैंक से शिकायत की। बैंक ने कार्ड ब्लॉक कर दिया, पर नुकसान की भरपाई नहीं की। बैंक का जवाब था कि उसका नया कार्ड दो कूरियर एजेंसी से ग्राहक के पंजीकृत पते पर भेजा गया और उसने प्राप्त भी कर लिया। लेकिन शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने पता और मोबाइल नंबर दोनों बदल लिए थे। इसकी जानकारी बैंक को दी थी। लोकपाल ने माना कि बैंक ने सावधानी नहीं बरती और बिना सोचे एटीएम कार्ड और पिन भेज दिया। बैंकिंग लोकपाल ने बैंक को भरपाई के निर्देश दिए।

  2. आठ बार में शिकायतकर्ता के खाते से 80,000 रुपए निकाल लिए गए। तुरंत बैंक को शिकायत की लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला। कार्ड शिकायतकर्ता के पास था और कार्ड का विवरण भी किसी को शेयर नहीं किया था। वहीं, बैंक की दलील थी कि विभिन्न बैंकों के एटीएम से 8 अवैध लेन-देन किए गए। इसमें तीन बैंकों के एटीएम थे। मामला कार्ड क्लोनिंग का था। बैंकिंग लोकपाल ने कहा कि डेबिट कार्ड की सुरक्षा करना बैंक की जिम्मेदारी है। बैंक ने पूरी राशि जमा करा दी।

  3. शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसका एटीएम कार्ड उसके पास था, लेकिन खाते में 5 दिन में 5 ट्रांजेक्शन किए गए। उसने बैंक से तुरंत संपर्क किया। पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई। बैंक ने लेन-देन को सफल बताया, लेकिन फुटेज नहीं दे सका। देखा गया कि दो लेन-देन एक ही तारीख को एक समय में दो अलग-अलग एटीएम से हुए। जबकि शिकायतकर्ता कार्ड ब्लॉक कराने के लिए बैंक शाखा में था। बैंक को मुआवजे के साथ राशि लौटाने के निर्देश दिए गए।

  4. शिकायतकर्ता का आरोप था कि वह पैसे निकालने एटीएम में गई तब कुछ शरारती तत्वों ने उसका एटीएम बदल दिया। एसएमएस अलर्ट नहीं आया। बैंक की दलील थी कि लेन-देन के अलर्ट भेजे थे। जांच में पता चला कि गलत मोबाइल नंबर पंजीकृत था। वहीं, बैंक ने लेन-देन के पैटर्न की निगरानी नहीं की। दोनों को 50-50% राशि वहन करने का निर्देश दिया गया।

  5. }फ्रॉड की सूचना 3 दिन में बैंक को दें। आपकी लापरवाही नहीं तो बैंक नुकसान भरेगा।
    {बैंक समाधान न करे तो रामबाग सर्किल स्थित रिजर्व बैंक कार्यालय में बैंकिंग लोकपाल को लिखित में, ई-मेल या रिजर्व बैंक की वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन शिकायत करें।

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      people get justice from banking lokpal

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