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मासूम बचपन

न आंखों में सपने
न दिल में उमंगें
मासूम बचपन इनका
ईंट गारे में गुम है
इन बच्चों को हमने बचपन है लौटाना
इन्हें काबिल है बनाना
इन्हें है पढ़ाना
नन्हें नन्हें हाथों में किताबें ही सजती हैं
जुगनू सी आँखों की लौ रोशन जो करती हैं
बचाना है अपने इन भारत के बीजों को
मनाना है इनके संग त्यौहारों और तीजों को
बचपन में लिपटा बच्चा वापिस
है लाना
इन बच्चों को हमने बचपन है लौटाना
इन्हें काबिल है बनाना
इन्हें है पढाना ।

लेखिका-  आशु शर्मा ‘किताब ए जिन्दगी’ ( मुम्बई)

6 comments

  1. Bahut khoob….a true picture depicted through excellent lines

  2. Beautiful. Love it.

  3. Beaut. Loved it

  4. Woww awesomee very special message to all in a poetic way every line have its own meaning 😍😍😍😍

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