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वे सैनिक हैं, वे रक्षक हैं


सुकून भरी गहरी नींद
जब हम रात में सोते हैं
सीमा पर जो जागते रहते हैं
वे सैनिक हैं वे रक्षक हैं
दोपहर की गर्मी में जब हम
ए सी में बैठे सुस्ताते हैं
सीमा पर जो खून पसीना बहाते हैं
वे सैनिक हैं वे रक्षक हैं
कड़ाके की सर्दी में जब हम
दुबक के बिस्तर में घुस जाते हैं
सीमा पर जो ठिठुरते हैं
वे सैनिक हैं वे रक्षक हैं
इक भारत माँ की सुरक्षा को
हर भारतवासी की रक्षा के लिए
जो तन मन अर्पण करते हैं
वे सैनिक हैं वे रक्षक हैं

लेखिका- आशु शर्मा ‘किताब ए ज़िन्दगी ‘

3 comments

  1. Wow.

  2. Beautiful expeessions

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