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मैंने महसूस किया है

लेखिका- पूनम सोनछात्रा (कोलकाता)

तुम कहते हो… जिसकी बातें तुम्हें अच्छी लगती हैं… तुम्हे उससे प्यार हो जाता है…
और मैंने ये महसूस किया कि वो प्यार फिर तुम्हारी ज़िद बन जाता है…

याद है तुमने एक दफ़ा मुझसे कहा था…
“मैं तुम्हारी नस-नस को तोडूँगा..
तुम्हें अपना बना कर छोडूँगा”

तब मैं सच में यह नहीं जानती थी कि तुम वाकई मुझे अपना बनाने के बाद छोड़ दोगे….

किसी चीज़ के मिलने के बाद शायद तुम्हारे लिए उसका आकर्षण समाप्त हो जाता है.. फिर चाहे वों बातें हों… या इंसान….

शायद… नहीं लिखती ये सब… लेकिन तुम्हारी याद भी न… अपने आने के बहाने ढूंढ ही लेती है… ठीक वैसे ही… जैसे तुम न आने के….

अब शहरयार शाह की यह पंक्तियाँ ही ले लो..

“वो जज़्बों की तिजारत थी
ये दिल कुछ और समझा था
उसे हँसने की आदत थी
ये दिल कुछ और समझा था

मुझे उसने कहा आओ नई दुनिया बसाते हैं
उसे सूझी शरारत थी
ये दिल कुछ और समझा था

हमेशा उसकी आँखों में धनक के रंग होते थे
ये उसकी आम आदत थी
ये दिल कुछ और समझा था”

ख़ैर…. तुम्हारे ग़लत होने… या तुम्हें ग़लत समझने का ग़म नहीं… ग़म तो इस बात का है…. कि तुमने सब कुछ सहीं समझ कर भी नहीं समझा….

लेखिका- पूनम सोनछात्रा (कोलकाता)

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