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ग्लुटेन एलर्जी में गेहूं, राई, जौ बंद नहीं किया तो इंटेस्टाइन कैंसर का खतरा



हेल्थ डेस्क. भोपाल एम्स के पैथोलॉजी विभाग द्वारा 24वीं इंटरनेशनल सीएमई आयोजित की गई।इसमें यूएसए, यूके, कनाडा, स्वीडन सहित मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद के सीनियर डॉक्टर शामिल हुए। शनिवार तक चलने वाली सीएमई में अलग-अलग प्रकार की बीमारियों की जांचों पर परिचर्चा एवं लेक्चर आयोजित किए जा रहे हैं। गुरुवार को अलग-अलग देशों से आए डॉक्टर्स ने एक-दूसरे को उपलब्ध कराए गए मरीजों के सैंपल के आधार पर उसकी जांच रिपोर्ट पर भी चर्चा की।

  1. ग्लुटेन सेंसिटिव यानी सिलिएक डिसीज के मरीजों को गेंहू, जौ और राई से एलर्जी होती है। जो एलर्जी के बावजूद ये अनाज बंद नहीं करते, उन्हें इंटेस्टाइन कैंसर हो सकता है। रोटी या ऐसा अनाज खाने से पेट दर्द शुरू हो जाता है। बार-बार डायरिया और वजन भी कम होता जाता है।

    डॉ. एएन झाला, टेम्पल यूनिवर्सिटी यूएसए

    • चुनौती: इस एलर्जी की पहचान करना बड़ी चुनौती है क्योंकि ज्यादातर मरीज सही तरीके से अपने सिम्टम्स नहीं बताते हैं, जबकि इसके सिम्टम्स बचपन में ही दिख जाते हैं।
    • 70 लाख पीड़ित इंडिया में: इंडिया में यह बीमारी काफी कॉमन है। यहां करीब 70 लाख लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं।
    • उपाय: एक ही उपाय है कि एलर्जी वाले अनाज बंद कर दें।
  2. अमेरिका में ब्रेस्ट कैंसर के 15 प्रतिशत मरीज ट्रिपल निगेटिव हैं, वहीं इंडिया में 30 प्रतिशत ट्रिपल निगेटिव हैं। सामान्य ब्रेस्ट कैंसर की तुलना में ये ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि इलाज मुश्किल है। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए हम सर्जरी के बाद हरटू प्रोटीन रोकने के लिए कीमो देते हैं, लेकिन ट्रिपल निगेटिव कैंसर में यह इलाज कारगर नहीं होता क्योंकि मरीज की बॉडी में हारमोन्स निगेटिव होते हैं।

    डॉ. अशरफ खान, यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स
  3. यूरिन में ब्लड आना किडनी के कैंसर की निशानी है। पेट के साइड में दर्द होना या गांठ बनना भी किडनी कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत जांच बेहद जरूरी है। किडनी कैंसर के 70 प्रतिशत मरीज क्लीयर सेल कार्सिनोमा के होते हैं। इसकी कीमोथेरेपी में भी बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। किडनी कैंसर की पहचान में सबसे अहम भूमिका पैथोलाॅजिस्ट की होती है।

    डॉ. आशीष चंद्रा, सेंट थॉमस हॉस्पिटल, लंदन
  4. पेट में दर्द, जलन, स्टूल में खून आना गैस्ट्रिक कैंसर के लक्षण हैं। ज्यादातर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। पेट का संक्रमण अल्सर में और अल्सर कैंसर में तब्दील हो जाता है। समय रहते पहचान करने पर केवल दवाइयों से इसका इलाज संभव है।

    डॉ. जयंत शेट्‌टी, स्वीडन
  5. डॉक्टर काफी अर्ली स्टेज में प्रोस्टेट की सर्जरी कर रहे हैं जो सही नहीं है। मैं ऐसे डॉक्टरों से कहना चाहता हूं कि वे सर्जरी की जगह केवल मरीज का फॉलोअप करते रहें। मेट्रो सिटीज़ की बात छोड़ दें तो दूसरे देशों की तुलना में इंडिया में प्रोस्टेट कैंसर की जांच काफी लेट होती है। इसके इलाज में मुश्किल आती है।

    डॉ. संतोष मेनन, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, मुंबई
  6. सीएमई में सबसे ज्यादा लेक्चर व केस डिस्कशन कैंसर पर ही हैं क्योंकि इसकी जांच आज भी एक चुनौती है। रेयर किस्म के कैंसर की जांच पैथोलॉजिस्ट के लिए मुश्किल है। यह सीएमई पैथोलॉजिस्ट्स की जानकारी बढ़ाने वाली साबित होगी। 23 विशेषज्ञ प्रेजेंटेशन देंगे।

    डॉ. नीलकमल कपूर, एम्स

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