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स्वाइन फ्लू से 20 साल की स्टूडेंट की मौत, अनजान घर वाले शव घर ले गए, बिना मास्क पहने किया संस्कार, चाची और दादी भी बीमार




भार्गव कैंप में रहने वाली 20 साल की बीकॉम छात्रा की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। शनिवार को उसकी डेडबॉडी पीजीआई चंडीगढ़ से लाई गई। जानकारी के अभाव में परिजन चारू की डेड बॉडी घर ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि स्वाइन फ्लू मरीज का जल्द से जल्द संस्कार कर देना चाहिए। तब घरवालों ने उसका अंतिम संस्कार किया। चारू बीमार थी और घरवाले बिना कोई सावधानी बरते उसके साथ एंबुलेंस और अस्पताल में रहे। अनजाने में हुई चूक के बाद घर के दो सदस्य और बीमार हैं। परिजनों का कहना है कि पता होता कि स्वाइन फ्लू के लक्षण हैं तो वे भी अलर्ट रहते। सेहत महकमा सुबह चारू के परिवार को दवा मुहैया कराएगा। तंदुरुस्त पंजाब मुुहिम के तहत शहरी और देहाती एरिया में स्वाइन फ्लू के बारे लोगों को जागरूक किया जा रहा है, लेकिन स्वाइन फ्लू से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। जिले में अब तक 4 संदिग्ध और 3 पॉजिटिव लोगों की मौत हो चुकी है।

हल्के बुखार की शिकायत, पांचवें दिन दम तोड़ा…शहर में स्वाइन फ्लू से तीसरी मौत है। सेहत विभाग का कहना है कि उन्हें चारू की मौत के बारे में नहीं पता। चारू के चाचा हरीश ने बताया कि भतीजी को 4 तारीख को हल्का बुखार हुआ था। एक-दो दिन फेमिली डॉक्टर से दवा ली, मगर सुधार नहीं हुआ। सिविल में डॉक्टर को दिखाया तो एक्सरे करवाने के लिए कहा। एक्सरे से मालूम हुआ कि चारू की चेस्ट में इंफेक्शन है। 7 फरवरी को चारू को सांस लेने में तकलीफ होनी शुरू हो गई। उसे पटेल अस्पताल दाखिल कराया, जहां डॉक्टरों ने स्वाइन फ्लू की पुष्टि की। बुखार के पांचवें दिन शुक्रवार को उसने दम तोड़ दिया।

<img src="images/p3.png"चारू

स्वाइन फ्लू के बारे में जागरूक होते तो आज बच्ची हमारे बीच होती : हरीश

भार्गव कैंप के हरीश ने बताया कि भतीजी की हेल्थ इंश्योरेंस के चलते उन्होंने पटेल अस्पताल से इलाज के लिए सोचा, मगर वहां डॉक्टरों ने उसे किसी बड़े अस्पताल ले जाने की बात कही तो वे वेंटीलेटर लैस एंबुलेंस में पीजीआई चले गए लेकिन वहां डॉक्टरों ने वेंटीलेटर न होने के कारण चारू को कहीं और ले जाने के लिए कह दिया। उसके बाद पंचकूला के नजदीक अस्पताल में ले जाते समय चारू की मौत हो गई। परिजनों ने कहा कि अगर स्वाइन फ्लू के बारे जागरूक होते तो आज बच्ची हमारे बीच होती।

बाकी सदस्यों को भी हल्का बुखार

परिजनों ने बताया कि हमें नहीं पता था कि- स्वाइन फ्लू वाले मरीज के पास नहीं जाना चाहिए। जब चारू का संस्कार किया तो वे बिना सावधानी के डेडबॉडी के पास खड़े रहे। चाचा हरीश ने कहा कि – उनकी 85 साल की मां और प|ी सीमा को 2 दिन से बुखार है। इसके अलावा घर में 11 और 13 साल के बच्चे हैं।

चारू के घर वालों को 48 घंटे में दवा लेनी चाहिए

<img src="images/p2.png"किसी मरीज के साथ रहते वक्त घरवालों को डब्ल मास्क पहनकर रखना चाहिए। मौत के बाद भी शव का जल्द संस्कार करना चाहिए और मास्क पहनकर ही पास जाना चाहिए। जिस मरीज को डाक्टर संदिग्ध भी कह दें। उसके साथ भी पूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। चारू के घरवालो को 48 घंटे के अंदर अदर टैमी फ्लू या स्वाइन फ्लू की दवा ले लेनी चाहिए। -डॉक्टर एसपीएस ग्रोवर, कार्डियोलॉजिस्ट

कैंप लगाकर कर रहे जागरूक

डिस्ट्रिक्ट फैमिली वेलफेयर आर्गेनाइजेशन के हेड डॉ. सुरिंदर कुमार ने बताया कि – शहर और देहात में जागरूकता बसों के जरिये जागरूक किया जा रहा है। टीमें अपना काम कर रही हैं। भार्गव नगर में भी चारू के घर पर सोमवार सुबह टीम भेजेंगे और घरवालों का इलाज कराएंगे।

वो सब कुछ जो आपके लिए जानना बेहद जरूरी

मास्क लगाकर मरीज से 6 फुट दूर रहें

ये लक्षण दिखें तो हो जाएं

सावधान

भूख कम लगना

जी मिचलाना

उल्टी होना

डायरिया

सावधानियां

1. छींकते समय टिश्यू पेपर से मुंह, नाक को ढकें और फिर उस पेपर को फौरन सावधानी से कचरे के डिब्बे में डाल दें.

2. अपने हाथों को लगातार साबुन से धोते रहें अपने घर, ऑफिस के दरवाजों के हैंडल, की-बोर्ड, मेज आदि साफ करते रहें यदि आपको जुकाम के लक्षण दिखाई दें तो घर से बाहर और दूसरों के नजदीक ना जाएं.

3. यदि आपको बुखार आई हो तो उसके ठीक होने के 24 घंटे बाद तक घर पर रहें.

4. लगातार पानी पीते रहें ताकि डिहाइड्रेशन ना हो.

5. घर से बाहर निकल रहे हों तो फेसमास्क पहनकर ही निकलें।

क्या न करें…

1. भीड़भाड़ वाली सार्वजनिक जगहों पर न जाएं।

2. बिना मास्क अस्पताल में दाखिल न हों।

3. अनजान लोगों से हाथ मिलाने और गले मिलने से बचें।

4. खुली जगहों पर न थूकें।

5. खांसते समय मुंह को ढंकेें।

6. खांसने, छींकने या नाक साफ करने के बाद आंख, नाक और मुंह पर हाथ कतई न लगाएं. शरीर के ये हिस्से सबसे जल्दी फ्लू की चपेट में आते हैं।

बुखारसिरदर्द

नाक बहना

गले में खराश

खांसी

शरीर में एेंठन

ऐसे भी फैलता है वायरस

<img src="images/p3.png" यह एक संक्रमण बीमारी है जो इंसान से इंसान को लगती है. जब कोई स्वाइन फ्लू का मरीज छींकता है तो उसके आसपास 3 फीट की दूरी तक खड़े व्यक्तियों के शरीर में इस फ्लू का वायरस प्रवेश कर जाता है। मरीज से कम से कम 6 फीट की दूरी बना कर रखें।

<img src="images/p3.png" यदि व्यक्ति छींकते समय मुंह और नाक को हाथ से ढक लेता है तो फिर यदि वह जहां कहीं भी उस हाथ को लगाता है (दरवाजे, खिड़कियां, मेज, कीबोर्ड इत्यादि) वहां यह वायरस चिपक जाता है और फिर वहां से किसी अन्य व्यक्ति के हाथों पर लगकर शरीर में दाखिल हो जाता है।

शव में भी 8 से 10 घंटे जिंदा रहता है वायरस

स्वाइन फ्लू का वायरस बारिश के मौसम में बॉडी में 8 से 10 घंटों तक जिन्दा रहता है और इसके बाद बॉडी खुद डिकंपोज होने लगती है। इस दौरान मृतक की बॉडी के सम्पर्क में आने वाले सभी लोगों को सावधानी रखनी चाहिए, वरना उनके भी स्वाइन फ्लू से संक्रमित होने का खतरा रहता है।

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