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13 साल के ललित को है दुर्लभ बीमारी, बालों से ढका चेहरा भेड़िए जैसा दिखता है



हेल्थ डेस्क. मध्यप्रदेश के रतलाम का 13 वर्षीय ललित पाटीदार वरवोल्फ सिंड्रोम से जूझ रहा है। इस दुर्लभ बीमारी के कारण चेहरे पर बाल उगे हुए हैं और भेड़िए जैसा दिखने लगा है। जन्मजात बीमारी के बावजूद ललित ने हार नहीं मानी है और उनका सपना पुलिस अफसर बनकर चोरों और अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजना है।

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    • जहां बीमारी के बाद लोग भावनात्मक रूप से टूट जाते हैं लेकिन ललित की सोच इसके उलट है। ललित का कहना है अजनबी मुझ पर पत्थर फेकते है और बंदर बुलाते हैं लेकिन मैंने अपने रूप को स्वीकार लिया। मैं पुलिस अफसर बनना चाहता हूं।
    • ललित के मुताबिक, एक समय ऐसा भी था जब बच्चे मुझे पत्थर मारते थे और मेरे साथ खेलने से बचते थे। लेकिन मेरे परिवार और दोस्तों ने मुझे उनसे बचाया और ध्यान रखा।
    • सबसे बुरा समय वो था जब मुझे बालों के कारण सांस लेने और दाएं-बाएं देखने में दिक्कत होती थी। कभी-कभी इच्छा होती है मैं भी दूसरे बच्चों जैसा दिखूं लेकिन कुछ नहीं कर सकता है। इसलिए जैसा हूं वैसे ही खुश हूं।
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    • ललित की 42 वर्षीय मां पर्वतबाई के मुताबिक, परिवार में 14 लाेग हैं। ललित पांच बहनों में अकेला भाई है। जन्म के बाद जब पहली बार इसे देखा तो शरीर बालों से ढका हुआ था। आम बच्चों के मुकाबले शरीर पर बाल बहुत ज्यादा थे।
    • पर्वतबाई बताती हैं कि हमने तत्काल बालरोग विशेषज्ञ से संपर्क किया तो उन्होंने बताया, इसे कंजेनिटल हायरट्राइकोसिस नाम की जन्मजात बीमारी है और यह लाइलाज है। मैं जानती हूं वह अलग है लेकिन मेरे लिए खास है।
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    • ललित के पिता 45 वर्षीय पिता बंकटलाल पेशे से किसान हैं। बंकटलाल बताते हैं जब ललित दो साल का था तो डॉक्टरों को बड़ौदा के बड़े अस्पताल में दिखाया गया। डॉक्टरों ने इसे लाइलाज बताया और भविष्य में इलाज उपलब्ध होने पर जानकारी देने का वादा किया।
    • ललित के स्कूल के हेडमास्टर बाबूलाल मकवाना कहते हैं कि वह स्कूल में दो साल से पढ़ रहा है। पढ़ाई साथ खेलों में अच्छा प्रदर्शन करता है। ललित अपनी कक्षा में सबका प्रिय है। स्कूल के शुरुआती दिनों में लोग ललित से बात करने में कतराते थे लेकिन धीरे-धीरे सब सामान्य व्यवहार करने लगे।
    • यह एक जन्मजात लाइलाज बीमारी है। जन्म में बाद शरीर पर बालों की लंबाई तेजी से बढ़ते लगती है और यह करीब 5 सेमी तक होती है। चेहरा, हाथ और पीठ पर खासतौर पर अधिक बाल दिखाई देते हैं। बीमारी का कारण क्या है, यह अब पता नहीं चल सका है।
    • अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल डर्मेटोलॉजी के मुताबिक, इलाज के तौर महज कुछ थैरेपी हैं लेकिन इनके परिणाम हमेशा संतोषजनक नहीं होते। बालों की ग्रोथ, जगह, उम्र जैसे कई फैक्टर के आधार पर हेयर रिमूवल तकनीक अपनाई जाती है।
    • वर्तमान में ब्लीचिंग, ट्रिमिंग, शेविंग, वैक्सिंग, इलेक्ट्रोलसर्जिकल एपिलेशन और लेजर हेयर रिमूवल ही इलाज के विकल्प हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, उम्र के साथ बढ़ते बालों के कारण कई बार मरीज भावनात्मक रूप से टूट जाता है।
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      13 year old lalit patidar from ratlam suffers from a rare condition that caused his face to be covered in HAIR called w


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