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अजब स्थिति में और सबके रोल में है यह सरकारी कर्मचारी धर्मेंद्र, कभी चपरासी बनकर झाडू-पोंछा करते हैं तो कभी जिला अधिकारी बन सभांलते हैं पूरा काम



बांसवाड़ा (राजस्थान)।ये है धर्मेंद्र, अब आप इन्हें चपरासी मान लो या एलडीसी या खुद रोजगार अधिकारी। यहां सबकुछ यही है। कार्यालय खुलने से लेकर बंद होने तक यहां के तमाम काम ये ही संभाल रहे हैं। कहने को तो ये सहायक कर्मचारी है लेकिन दफ्तर में एकमात्र यहीं हाेने से कभी चपरासी बनकर झाडू-पोंछा कर लेते हैं तो कभी अधिकारी बनकर आवेदनों के पंजीयन और जांच का जिम्मा संभाल लेते है। बेरोजगार युवाओं को समय पर भत्ता दिलाने की जद्दोजहद में खुद के लिए समय नहीं बच पाता। इस सहायक कर्मचारी का काम बस यही खत्म नहीं होता है, फाइलों पर साइन के लिए पोटली बांधकर भीलवाड़ा में कार्यरत जिला रोजगार अधिकारी के यहां तक महीने में एक-दो बार दौड़भाग करनी पड़ रही है।

60 वर्षीय धर्मेंद्र निनामा की दिनचर्या कुछ ऐसी ही है। वह बीते 40 साल से डायलाब तालाब रोड स्थित रोजगार कार्यालय में है। यहां 11 कर्मचारियों की स्वीकृत पोस्ट वाले इस कार्यालय में बीते 8 महीनों से केवल वहीं एकमात्र कर्मचारी है। धर्मेंद्र के अलावा एक सहायक कर्मचारी और चपरासी था वह भी बीते साल मई और जुलाई में रिटायर्ड हो गए। इसके बाद से अब कार्यालय में वह अकेले ही बचे है। धर्मेंद्र का अकेलापन सरकार की बदइंतजामियों पर भी करारा तमाचा है। लाखों सरकारी भर्तियां करने का चुनावी दावा करने वाली सरकारों की नजर में कई सालों से यह कार्यालय नजर में नहीं आया है। अव्वल तो उन बेरोजगारों की उम्मीदों का कार्यालय है जिनके पर पर राजनीति पार्टियां वोट की उम्मीद रखती है। फिर इन्हीं बेरोजगारों को समय पर भत्ता दिलाने वाले कार्यालय की ही सरकार ने ऐसी भद बिगाड़ रखी है। बुजुर्ग धर्मेंद्र के अकेले होने से कई बार कार्यालय के काम प्रभावित होते है और जिससे भत्ता समय पर दिलाने में परेशानी हो रही है। ऐसी ही दशा कुशलगढ़ के उप रोजगार कार्यालय की भी है। जहां सिर्फ एक लिपिक नियुक्त है। धर्मेंद्र साल 1979 से इस कार्यालय में कार्यरत है। 2020 में वह भी रिटायर्ड होने वाले है।

फैक्ट फाइल: रोजगार कार्यालय की स्थिति
रोजगार कार्यालय में 7 पद स्वीकृत हैं। इनमें जिला रोजगार अधिकारी, कार्यालय सहायक, अनुदेशक, सूचना सहायक, लिपिक ग्रेड प्रथम व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 1-1 और लिपिक ग्रेड द्वितीय के दो पद शामिल हैंं।

रोजगार मेले लगाने के आदेश, फंड का टोटा
बेरोजगारों के इस कार्यालय पर सरकार की बे रुखी देखिए कि रोजगार मेला लगाने और दूसरे विभागीय कामकाजों के लिए भी पर्याप्त फंड नहीं है। हर बार मेले लगाने के लिए प्रशासन को पत्र भेजने पड़ते हैं। कार्यालय का पूरा भवन खंडहर हो चुका है। इस कार्यालय का एडिशनल चार्ज भीलवाड़ा में कार्यरत रोजगार अधिकारी मुकेश गुर्जर को दे रखा है। लेकिन एक भी बार वो यहां नहीं आए है। उनके फाइलाें पर साइन करवाने के लिए भीलवाड़ा जाना पड़ता हैं।

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Government employee dharmendra In role of everyone peon to officer

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