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जॉब छोड़ सीखा कालबेलिया डांस, अब अपने देश में सीखा रही है जापान की मयूमी



जोधपुर. मन में कुछ पाने की दृढ़ इच्छा शक्ति हो ताे वह चीज मिल ही जाती है, ऐसा ही कुछ हुआ जापान की मयूमी के साथ। 2008 में उन्होंने फ्रेंच डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘लच्चो द्रोम’ (सुरक्षित यात्रा) देखी, जो रोमन लोगों की उत्तर-पश्चिमी भारत से लेकर स्पेन तक की यात्रा की कहानी है। फिल्म में कालबेलिया नृत्य के बारे में भी दिखाया गया। यहीं से शुरू हुआ मयूमी का कालबेलिया से लगाव। वे इस नृत्य से इतनी प्रभावित हुईं कि 2012 में इसे जानने-समझने के लिए भारत आ गईं।

जयपुर, जैसलमेर और पुष्कर सहित कई जगहों पर घूम कर कालबेलिया कम्यूनिटी से मिलीं और नृत्य के बारे में जाना। जापान लाैटने के बाद भी वे इसी के बारे में सर्च करती रहतीं और यूट्यूब वीडियो देख कर डांस सीखतीं। इसी दौरान जोधपुर की कालबेलिया डांसर आशा कालबेलिया का वीडियो सामने आया। मयूमी ने फेसबुक से इनसे संपर्क किया और 2015 में डांस सीखने जोधपुर आ गईं। तब से लेकर वे हर साल दो बार सिर्फ कालबेलिया सीखने भारत आती हैं और इन दिनों जोधपुर आई हुई हैं। मयूमी ने बताया, वे इन दिनों कई राजस्थानी गाने भी सीख रही हैं ताकि लिरिक्स के अनुसार स्टेप्स सीखने-सीखने में आसानी हो।

टोक्यो और सपोरो में 50 से ज्यादा स्टूडेंट किए तैयार

मयूमी जापान की एक कंपनी में जॉब करती थीं, लेकिन जबसे कालबेलिया डांस सीखा, जॉब छोड़ दी। अब वे जापान के दो शहरो टोक्यो और सपोरो में कालबेलिया डांस की क्लास ले रही हैं। अब तक 50 से भी ज्यादा जापानियों को सीखा भी चुकी हैं। डांस के साथ ही मयूमी राजस्थानी कल्चर की भी फैन हैं। कालबेलिया ड्रेस से लेकर यह राजपूती पोशाक, लहरिया और बंधेज के दुपट्‌टे खुद भी पहनती हैं और अपनी फ्रेंड्स के लिए जापान भी लेकर जाती हैं।

फोटो एल देव जांगिड़

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कालबेलिया डांस प्रस्तुत करती मयूमी।


मयूमी पूरी तरह से राजस्थानी संस्कृति में रच बस गई है।


मयूमी का डांस।


मयूमी साल में दो बार जोधपुर आती है।


कालबेलिया डांस सीखने के लिए मयूमी ने जापान में अपना जॉब तक छोड़ दिया।


जोधपुर में डांस सीखती मयूमी।

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