loading...
Hindi News / राज्य / हरियाणा / देशभर से चुनी गईं 12 महिला स्वच्छता ग्रहियों ने पाया लक्ष्य, आज पीएम करेंगे सम्मानित

देशभर से चुनी गईं 12 महिला स्वच्छता ग्रहियों ने पाया लक्ष्य, आज पीएम करेंगे सम्मानित



कुरुक्षेत्र (संजीव राणा).गांवों को निर्मल और खुले में शौच मुक्त बनाने का प्रयास देशभर में पिछले करीब एक दशक से चल रहा है। पिछले पांच साल से तो सरकार भी इसे मिशन के रूप में ले रही है। सकारात्मक परिणाम भी सामने हैं, लेकिन कई प्रांतों में गांवों को खुले में शौच मुक्त और निर्मल बनाना इतना आसान नहीं था, जितना अब लग रहा है।

खासतौर पर उन गांवों में, जहां महिलाओं के हाथ में पंचायत की बागडोर है। वहां महिला नेतृत्व को इसके लिए खासा संघर्ष करना पड़ा। देश में ऐसी सैकड़ों महिलाएं हैं, जिन्होंने अपने गांवों को खुले में शौच मुक्त कराया। ऐसे ही देशभर से 12 उन महिलाओं को स्वच्छता पुरस्कार के लिए चुना गया, जिन्होंने तमाम बाधाओं के बावजूद गांव को निर्मल व ओडीएफ बनाया और कई नई परंपराएं भी शुरू की। देशभर के राज्यों से 12 महिला पंच व सरपंचों को मंगलवार को स्वच्छ शक्ति-2019 कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी पुरस्कृत करेंगे।

स्वच्छता और ओडीएफ में बेहतर काम को लेकर पिछले साल वाटर एंड सेनिटेशन मंत्रालय की तरफ से आवेदन मांगे थे। इसके बाद देशभर से 12 महिला पंच-सरपंचों को चुना गया। इनमें गांव ठरवा, पंचकूला हरियाणा की सरपंच रेखा, धनवाड़ा, हरदा- एमपी की लक्ष्मीजाट, सोनूबेनकालेरानाथ, अंबोली-महाराष्ट्र भाग्यलक्ष्मी सरागली, तेलंगाना-फांगफू याकिया, अरुणाचल प्रदेश, अमरतबाई मणिकांत जोलाव, दमनदीव, माधुरी गोडमारे ब्राह्मी, नागपुर, मार्शल, मावखंज, मेघालय, रीटा रानी, छडियाला, मोहाली, पींकू राव झारखंड, पुष्पा, मिर्जापुर यूपी, राधिका तमिलनाडु को कुरुक्षेत्र आमंत्रित किया है।

नहीं की परवाह, घर-घर की मान मनौव्वल : उक्त सभी अपने गांवों की पंचायत की लीडर हैं। लगभग सभी ने खुले में शौच मुक्त गांव बनाने के लिए एक जैसी बाधाएं पार की। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के देहात में लोगों को समझाना मुश्किलों भरा रहा। लोगों का विरोध भी झेला, लेकिन परवाह नहीं की। सरकार की तरफ से गांवों में टारगेट मिले, उनसे बढ़कर काम किया।

चित्रकारी से सजाए हैं शौचालय :
इन महिला सरपंचों के गांव जहां पूरी तरह खुले में शौच मुक्त हैं। वहीं इन्होंने हर घर में शौचालयों को भी बाहर व अंदर से सजावटी बनाया है। पींकूराव, सोनूबेन, अमरतबाई और लक्ष्मी बताती हैं कि उन्होंने लोगों को शौचालय सुंदर बनाने के लिए प्रेरित किया। देखादेखी हर किसी ने अपने शौचालयों को सुंदर चित्रकारी से सजाया। प्रतियोगिता में उनके गांवों के शौचालय स्वच्छ व सुंदर निकले।

इन महिलाओं ने असंभव को बनाया संभव –गाली-गलौच तक सही, बनाए डेढ़ हजार शौचालय : तमिलनाडु की राधिका कहती हैं कि गांव काफी देहात में है। जब लोगों को घरों में शौचालय के लिए कहा, तो वे लड़ाई करने तक पर उतरे। गाली-गलौच तक सही। उन्हें गांव में 990 शौचालय का टारगेट था, उन्होंने डेढ़ हजार टायलेट अपने और आसपास के गांवों में बनवाए।

माधुरी ने श्रमदान की परंपरा शुरू कराई :
ब्राह्मी गांव की सरपंच माधुरी गोडमारे को भी ऐसे ही विरोध झेलना पड़ा। बताती हैं कि शुरू में लोग घरों में शौचालय बनाने को तैयार नहीं हुए। बाद में किसी तरह वे लोगों को मनाने में सफल रही। इसके साथ उन्होंने गांव में हर रविवार सामूहिक श्रमदान की परंपरा शुरू की। पिछले 42 रविवार से ग्रामीण एकजुट होकर गांव की सफाई करते हैं।

पांच शौचालयों के लिए मशक्कत : अरुणाचल से आई फांगफू बताती हैं कि उनके गांव में पांच घर हैं। वहां भी खुले में ही लोग शौच जाते थे। इन पांच घरों में शौचालय बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। अब उनके गांव में सुंदर शौचालय हैं।

पहले अपने घर में बनाया शौचालय : मेघालय से मार्शल बताती हैं कि उनके यहां करीब 180 घर हैं। वहां भी किसी घर में शौचालय नहीं था। उन्होंने पहले अपने घर में शौचालय बनाया। फिर घर-घर जाकर लोगों को मनाया। आज गांव ओडीएफ ही नहीं, स्वच्छता के मामले में भी अव्वल है। लोगों में सफाई की आदत पड़ चुकी है।

2500 शौचालय बनवाए: मोहाली की रीटा और मिर्जापुर की पुष्पा ने भी स्वच्छता को अपना मिशन बनाया है। पुष्पा बताती हैं कि अपने व आसपास के गांवों में घूम कर वे और उनके साथी ढाई हजार के करीब शौचालय लोगों से बनवा चुकी हैं।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


कुरुक्षेत्र. बेहतर काम करने पर प्रधानमंत्री से सम्मानित होंगी ये महिलाएं।

Check Also

सांपला में पूर्व सैनिक कल्याण सोसायटी के सदस्यों ने की सभा कर जताया शोक

सांपला में पूर्व सैनिक कल्याण सोसायटी के सदस्यों ने की सभा कर जताया शोक सांपला …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *