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धड़कनों से रिचार्ज होंगे इम्प्लांटेड डिवाइस, अमेरिकी वैज्ञानिकों ने विकसित की सिक्के के आकार की किट



हेल्थ डेस्क. शरीर में पेसमेकर इम्प्लांट लगाने के बाद हर 5-10 साल में बैटरी बदलने के लिए हाेने वाली सर्जरी से अब बचा जा सकेगा। अमेरिकी इंजीनियरों ने एक ऐसी किट बनाई है जो हृदय की धड़कनों से बिजली बनाकर इम्प्लांट को ऊर्जा देती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, धड़कनों से निकलने वाली गतिज ऊर्जा को किट बिजली में बदल देगी और पेसमेकर जैसे इम्प्लांटेड डिवाइस रिचार्ज हो सकेंगे।

  1. अमेरिका के डार्थमाउथ कॉलेज के वैज्ञानिकों ने सिक्के के आकार की किट का आविष्कार किया है। जो गतिज ऊर्जा को बिजली में बदलने का काम करती है। इसके लिए मौजूदा डिवाइस (पेसमेकर इंप्लांट) में पॉलिमर पीज़ोइलेक्ट्रिक फिल्म के पतले टुकड़े जोड़ने होंगे। यह किट उसे रिचार्ज करती रहेगी। इसकी मदद से मरीज की सेहत पर नजर भी रखी जा सकेगी।

  2. शोधकर्ता लिन डॉन्ग के मुताबिक, किट काफी हल्की और फ्लैक्सिबल है। इसे इंप्लांट के साथ आसानी से फिट किया जा सकता है। खास बात है कि डिवाइस शरीर में सामान्य कार्यशैली में छेड़छाड़ नहीं करती है। टीम ने इसका परीक्षण जानवरों पर किया है, जो सफल रहा है। लिन डॉन्ग का कहना है कि उम्मीद है जल्द ही सेल्फ रिचार्जिंग पेसमेकर मार्केट में उपलब्ध होगा।

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      Self charging pacemakers are powered by patients heartbeats

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