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भूपेन हजारिका के बेटे ने कहा- अभी न्योता ही नहीं मिला तो सम्मान लौटाने का सवाल ही नहीं



गुवाहाटी. असमिया गायक-संगीतकार भूपेन हजारिका के बेटे तेज ने कहा कि जब अभी तक सरकार की तरफ से न्योता नहीं मिला है तो भारत रत्न लौटाने का सवाल ही उठता। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अमेरिका में रह रहे तेज हजारिका ने असम के एक न्यूज चैनल पर कहा कि राज्य के हालात के मद्देनजर वह पिता को मरणोपरांत दिया जा रहा भारत रत्न नहीं लेंगे।

  1. सोमवार को तेज हजारिका ने कहा कि उनके पिता के नाम और शब्दों पर सार्वजनिक रूप से कार्यक्रम किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्वोत्तर के लोगों की इच्छा के खिलाफ नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित करने की योजना भी बनाई जा रही है। नागरिकता संशोधन बिल को लेकर जो कुछ हो रहा है, वह भूपेन की सोच के उलट है। जनवरी में केंद्र सरकार ने भूपेन हजारिका को भारत रत्न (मरणोपरांत) देने की घोषणा की थी। हजारिका का 2011 में निधन हुआ था।

  2. फेसबुक पोस्ट पर तेज ने लिखा- “कई पत्रकार मुझसे पूछ रहे हैं कि पिता को दिया जाने वाला भारत रत्न सम्मान स्वीकार करूंगा या नहीं। इस पर मैं दो बातें कहना चाहता हूं। एक- जब मुझे निमंत्रण ही नहीं मिला तो उसे अस्वीकार करने का प्रश्न ही नहीं है। दूसरा- पूरे मामले में यह भी देखा गया कि केंद्र सरकार ने जिस तरह सम्मान देने का फैसला किया और देशभर में इसे अहमियत मिली। इसे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जरिया कहा जा सकता है।”

  3. तेज के मुताबिक- “उनके प्रशंसकों में पूर्वोत्तर के लोगों का एक बड़ा हिस्सा है। उन्होंने (भूपेन हजारिका) भारत की महान विविधता को विखंडित करने का प्रयास नहीं किया। सरकार ने जो विधेयक पेश किया है वह भूपेन की इच्छा के खिलाफ है। यह एक तरह से असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक और गैर-भारतीय प्रतीत होता है।”

  4. भूपेन के बेटे ने कहा कि इस बिल के किसी भी रूप इस समय या भविष्य में दुखद होगा। इससे न केवल लोगों का जीवन, उनकी भाषा, पहचान और क्षेत्र में सत्ता का संतुलन प्रभावित होगा बल्कि इससे मेरे पिता की स्थिति भी कमतर होगी। इससे एक लोकतांत्रिक गणराज्य के सांप्रदायिक सद्भाव और आंतरिक अखंडता झटका लगेगा।

  5. नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 में लोकसभा में नागरिकता अधिनियम 1955 में बदलाव के लिए लाया गया है। केंद्र सरकार ने इस विधेयक के जरिए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैन, पारसियों और ईसाइयों को बिना वैध दस्तावेज के भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए उनके निवास काल को 11 से घटाकर 6 वर्ष कर दिया गया है।

  6. यानी अब ये शरणार्थी 6 साल बाद ही भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस बिल के तहत सरकार अवैध प्रवासियों की परिभाषा बदलने के प्रयास में है। यह बिल लोकसभा में 15 जुलाई 2016 को पेश हुआ था जबकि 1955 नागरिकता अधिनियम के अनुसार, बिना किसी प्रमाणित पासपोर्ट, वैध दस्तावेज के बिना या फिर वीजा परमिट से ज्यादा दिन तक भारत में रहने वाले लोगों को अवैध प्रवासी माना जाएगा।

  7. भाजपा की असम में सहयोगी गठबंधन पार्टी असम गण परिषद बिल को स्वदेशी समुदाय के लोगों के सांस्कृतिक और भाषाई पहचान के खिलाफ बता रही है। असम गण परिषद के अलावा कृषक मुक्ति संग्राम समिति और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) भी इसके विरोध में हैं। इसके अलावा कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने भी इसका विरोध किया है।

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      2011 में भूपेन हजारिका का निधन हो गया था। (फाइल)


      केंद्र ने जनवरी में भूपेन हजारिका, प्रणब मुखर्जी और नानाजी देशमुख को भारत रत्न देने का ऐलान किया था।

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