loading...
Hindi News / राज्य / बिहार / म्यांमार आर्मी की एके 47 की खेप पिछले साल पहुंची थी पटना

म्यांमार आर्मी की एके 47 की खेप पिछले साल पहुंची थी पटना



पटना.म्यांमार आर्मी के हथियारों की खेप पहले भी बिहार पहुंची है। पिछले साल एक कंसाइनमेंट की डिलिवरी पटना में हुई थी। एडीजी (मुख्यालय) कुंदन कृष्णन के मुताबिक तब 4 एके 47 राइफल के अलावा 5 हजार गोलियों की बड़ी खेप को हथियार तस्कर मुकेश सिंह ने रिसीव किया था।

ताजा मामले में पिछले सप्ताह पूर्णिया में दालकोला चेकपोस्ट के पास जांच के दौरान सफारी से बरामद 3 एके 47 के अलावा 1600 से अधिक गोलियों के कंसाइनमेंट की डिलिवरी भी आरा निवासी हथियार तस्करों मुकेश सिंह व संतोष सिंह के पास होनी थी। पुलिस की रिकॉर्ड में हथियार तस्करी को लेकर इन दोनों का पुराना रिकॉर्ड रहा है। गंभीर सवाल यही है कि पूर्व में लाई गई असलहों को कहां-कहां खपाया गया है?अपराधियों के अलावा नक्सलियों तक भी हथियार सप्लाई किए जाने के साथ अन्य पहलुओं पर जांच जारी है। गिरफ्तार हथियार सप्लायरों के पास से मिले 3 मोबाइलों की भी जांच की जा रही है। इसके जरिए उनके कनेक्शन के साथ ही तस्करों के नेटवर्क के बारे में अहम जानकारी मिल सकती है।

उग्रवादी संगठनों के सदस्यों से भी कनेक्शन के संकेत
पूर्णिया में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई सच्चाई सामने आई है। आरंभिक पड़ताल में पता चला है कि हथियार तस्करी के तार मणिपुर के साथ नगालैंड से भी जुड़े हैं। इनमें उग्रवादी संगठन एनएससीएन-आईएम (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम-इजाक मोयेका) के सदस्यों की संलिप्तता सामने आ रही है। उल्फा आदि भी शक के घेरे में है। दरअसल एनएससीएन-आईएम के दो संस्थापकों में शामिल इजाक की मौत हो चुकी है, जबकि एक अन्य मोटेना उखरुल (मणिपुर) का रहने वाला है। पूर्णिया में एके 47 के ताजा कंसाइनमेंट के साथ पुलिस के हत्थे चढ़े तीन आरोपियों में दो वीआर कहोरनगम व क्लियरसन काबो उखरुल इलाके के ही निवासी हैं।

अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर दे रहा खतरनाक संकेत

पूर्णिया में मिले म्यांमार आर्मी के एके 47 राइफल के साथ अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर (यूबीजीएल) व गोलियों के प्रकार खतरनाक संकेत दे रहे हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक मोडिफाई किए गए एके 47 में यूबीजीएल को सेट कर ग्रेनेड फायर किया जाता है। एंटी नक्सल ऑपरेशन में लगी सीआरपीएफ व अन्य एजेंसियां यूबीजीएल वाले एके 47 का इस्तेमाल करती हैं। बरामद गोलियों में 9.96 एमएम व अन्य बोर की हैं। इनमें 9.96 एमएम की गोलियों का इस्तेमाल इनसास जैसे राइफलों में किया जाता है। इन परिस्थितियों में संभव है सुरक्षा बलों से मुकाबले के लिए नक्सली यूबीजीएल वाले हथियारों की खेप मंगवा रहे हों। हालांकि, समय रहते नापाक योजना पर पुलिस ने पानी फेर दिया। भारत-म्यांमार बॉर्डर के जरिए संगठित तरीके से अत्याधुनिक हथियारों की तस्करी हो रही है। हालांकि, पहली बार इसका खुलासा बिहार पुलिस ने किया है। तस्करों का इंटरनेशनल सिंडिकेट हथियारों को सीमा पार कराने में अहम रोल निभाता है।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


AK-47 consignment of Myanmar Army reached last year Patna

Check Also

कुरीतियों के खिलाफ व महिला सशक्तीकरण के लिए आवाज बुलंद करेगा मातृ शक्ति संगठन

एजुकेशन रिपोर्टर | मोतिहारी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ व महिला सशक्तीकरण को लेकर मातृ शक्ति …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *