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सप्लीमेंट्स की ज्यादा डोज होने पर किडनी में दर्द व खराब होने का खतरा




बॉडी बिल्डर और खिलाड़ियों के अलावा सामान्य व्यक्तियों में भी सप्लीमेंट्स लेने का ट्रेंड बढ़ रहा है। हकीकत में, सामान्य व्यक्तियों को इन सप्लीमेंट्स की जरुरत नहीं है। फिटनेस व स्पोर्ट्स साइंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सबसे पहले न्यूट्रिशियन व हैल्दी डाइट से ही जरुरतों को पूरा किया जाना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह जरुरत से ज्यादा ये सप्लीमेंट्स पीना नुकसानदायक साबित हो सकता है। सही सप्लीमेंट का चयन व इसकी मात्रा की जानकारी के बिना इन्हें लेने से शरीर में यूरिक एसिड, प्रोटीन बढ़ सकता है। किडनी में दर्द और आंतरिक अंगों पर असर पड़ सकता है। इसलिए डॉक्टर चैकअप करवाने के बाद ही अपनी हाइट, बॉडी वेट व जरुरत के मुताबिक उनके सुपरविजन में सप्लीमेंट्स लेना शुरू करें। डाइट के साथ-साथ इनका चयन हमारी जरुरतों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। जैसे हमारी एक्टीविटी का लेवल, एक्सरसाइज शेड्यूल, उम्र, वजन, आदि। हाई इंटेेन्सिटी ट्रेनिंग, जिमिंग, स्पोर्ट्स, लोंग डिस्टेंस रनिंग के मुताबिक इन सप्लीमेंट्स की जरुरत पड़ती है।

महिलाएं सोया प्रोटीन लें

बढ़ते हूुए लड़कों में लड़कियों की तुलना में प्रोटीन और कोबोहाइड्रेट को उपयोग में लेने की क्षमता ज्यादा होती है। इसलिए बढ़ते हुए बच्चों की इसे ध्यान में रखते हुए न्यूट्रिशियनल काउंसलिंग की जानी चाहिए। साथ ही सोया प्रोटीन महिलाओं के लिए ज्यादा उपयोगी होते हैं, क्योंकि ये फीमेल हॉर्मोन इस्ट्रोजन को मदद करते हैं। सामान्य व्यक्ति व एक्सरसाइज करने वाले व्यक्ति को सोने से पहले कैसीन प्रोटीन लेना चाहिए। यानी इसके लिए रात में दूध पीना चाहिए। इससे मिलने वाले प्रोटीन से रात में मांसपेशियों के मेटाबॉलिज्म में मदद मिलती है। इससे मांसपेशियां कमजोर नहीं पड़ती है।

यह गलती नहीं करें

अक्सर लोग इंटरनेट के हिसाब से सप्लीमेंट्स लेना शुरु कर देते हैं। बच्चों को देना भी शुरू कर देते हैं। उदाहरण के लिए बच्चे की उम्र 16 साल और एवरेज बॉडी वेट करीब 70-80 किलोग्राम है। उसे 60-80 ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए। वहीं, इसी उम्र व वजन का का एथलेटिक बच्चा 80-100 ग्राम लें। इंटरनेट पर यह देखकर लेना शुरू कर देते हैं। जबकि यह सही नहीं है। शरीर की जरुरत के मुताबिक यह लेना चाहिए।

बच्चे पर ज्यादा वजन डालने से मसल्स में हो सकती है इंजरी

आजकल पेरेंट्स बच्चे की परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए उनमें दबाव बनाते हैं। वे उन्हें जल्द ही प्रोफेशनल लेवल पर ले जाना चाहते हैं। बच्चा बेहतर करें। इसके लिए उस पर ज्यादा लोड डालते हैं। जबकि पेरेंट्स को समझना चाहिए कि बच्चे की कैपेसिटी के मुताबिक ही उस पर लोड डालें। वो जितना लोड ले सकते हैं उतना ही खेलने दें। अन्यथा ज्यादा दबाव से उन्हें मसल्स इंजरी हो सकती है। हडिड्यों और मसल्स में दर्द हो सकता है। कई बार बोन के मुताबिक मसल्स नहीं बढ़ पाती है। उनकी हड्डी जल्दी व मसल्स नहीं बढ़ पाती है। बच्चा हमेशा थका हुआ महसूस करता है। ऐसे में, ज्यादा खेलने से लिगामेंट इंजरी और मसल्स रैप्चर हो सकती है। बॉक्सिंग व रेसलिंग में स्किन का लेवल अच्छा नहीं होने से चोट लग सकती है। वो खुद को बचा नहीं पाता है। इसे ध्यान में रखते हुए उसकी डाइट मैनेज करें।

फास्ट फूड नहीं, बच्चों को पनीर और चने खिलाएं

बच्चों को पिज्जा और बर्गर यह अवॉइड करना चाहिए, जो किसी भी तरह के खेल से जुड़े हुए हैं। इनमें कैलोरी की मात्रा ज्यादा होने से मोटापा आ सकता है। शरीर में कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ता है। उनकी हडिड्यां और मसल्स मजबूत बनाने के लिए अच्छी क्वालिटी का कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन,फैट और मिनरल्स दें। बच्चों को शुगर कम दें। उन्हें बिस्क्ुट,पेस्ट्री,िमठाई,कोल्ड ड्रिंक रुटीन में ज्यादा नहीं दें। इसकी बजाय घर का घी, मक्खन, नट्स और फ्रू टस िखलाएं। नॉन वेजेटेिरयन िचकन व अंडे से प्रोटीन ले सकते हैं। वेजेटिरयन दही, दूध, राजमा, पनीर, सोया, अलग-अलग तरह के चने व दाल से लें। बच्च्ों का एक एक्टिव रुटीन बनाएं। यह देेखा गया है कि एक्टिव रहने वाले बच्चे एग्जाम में अच्छा परफॉर्म करते हैं। बीमारियों से दूर रहते हैं।

…जिमिंग के दौरान साधारण पानी नहीं पीएं

ज्यादातर खिलाड़ियों को एक समान ही न्यूट्रीशियन दिया जाता है। जबकि हर खिलाड़ी को उसके खेल के हिसाब से अलग-अलग न्यूट्रीशियन सप्लीमेंट दिए जाना चाहिए। कुछ खिलाड़ी मैच के दौरान सिर्फ साधारण पानी पीते हैं। इससे उन्हें पर्याप्त मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट नहीं मिल पाता है। दो से तीन सेट के बाद उनकी परफोर्मेंस कम हो जाती है। डाइट से भी प्रोटीन की मात्रा काउंट होती है। वेज और नॉन-वेज डाइट से पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन मिलता है। हाई लेवल के स्पोट्रर्स के लिए .01 परसेंट का न्यूट्रीशियन व एनर्जी सिस्टम चाहिए। दुनियाभर में पांच सर्टिफाइड सप्लीमेंट्स हैं। इनमें से बीएससीसी सर्टिफाइड सबसे बेहतरीन सप्लीमेंट हैं। विदेशों में हर खेल के हिसाब से अलग-अलग न्यूट्रीशियन होते हैं। जेंडर के हिसाब से अलग-अलग सप्लीमेंट्स होने चाहिए। पुरुष खिलाड़ियों में महिलाओं की तुलना में कार्बोहाइड्रेट व फैट बर्न की क्षमता जयादा होती है।

-एक्सपर्ट पैनल:

डॉ. विक्रम शर्मा, स्पोटर्स मेडिसिन, जयपुर,

-डॉ. श्रीकांता, फिजियोथेरेपिस्ट, दिल्ली

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Vikram News – the risk of pain and worsening of kidney when excessive supply of supplements


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