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एमआरआई, सिटी स्कैन, हिस्टोपैथाेलॉजी की सुविधा नहीं हो पाई शुरू




सरकारी अस्पताल में एमआरआई और सिटी स्कैन की सुविधा न होने पर मरीज पिछले लंबे समय से परेशान हो रहे हैं। निजी स्कैनिंग सेंटरों के संचालक मरीजों से मनमाने रेट वसूल कर उनका आर्थिक शोषण कर रहे हैं। सरकारी अस्पताल बना तो जरूर लेकिन सुविधाएं वही पुराने अस्पताल जैसी हैं। अस्पताल में न तो सीटी स्कैन की व्यवस्था है और न ही एमआरआई की। नतीजतन डॉक्टरों द्वारा लिखे जाते टेस्ट मरीज निजी स्कैनिंग सेंटरों से करवाने को मजबूर हैं। करीब 7 वर्ष पूर्व अस्पताल में सिटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा शुरू करने की योजना बनी थी। जिसका काम प्राइवेट कंपनी को देना था लेकिन कोई भी निजी कंपनी आगे आने के कारण उक्त सुविधा शुरू नहीं हो सकी। तब से लेकर आज तक अस्पताल के सभी मरीजों को डाॅक्टर निजी सेंटरों में रेफर कर देते हैं। रोजाना 10 से 15 मरीज निजी स्कैन सेंटरों पर रेफर किए जाते हैं। सिविल अस्पताल के वुमेन एंड चिल्ड्रन अस्पताल की ओपीडी में काउंटर के नजदीक अस्पताल प्रशासन की ओर से अस्पताल में उक्त सुविधा नहीं होने का बोर्ड भी लगाया गया है। जिसमें लिखा गया है कि अस्पताल में एमआरआई, सिटी स्कैन, हिस्टोपैथाेलॉजी, टर्सरी व सुपरस्पेशलिस्ट डाॅक्टरों की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

रोजाना 10 से 15 मरीज निजी स्कैन सेंटरों पर किए जाते हैं रेफर

सीटी स्कैन का निजी सेंटर संचालक मरीज से दो से तीन हजार रुपए और एमआरआई जांच के तीन से पांच हजार रुपए या इससे ज्यादा तक चार्ज करते हैं। अगर यही सुविधा सरकारी अस्पताल में मिले तो सीटी स्कैन एमआरआई बहुत कम रुपए में हो सकती है। अस्पताल में अधिकांश मामले लड़ाई-झगड़े और दुर्घटनाओं के होते हैं। ऐसे गंभीर घायलों को कई बार सीटी स्कैन और एमआरआई की जरूरत होती है। लेकिन यह सुविधा यहां नहीं होने के कारण ऐसे मरीजों को तत्काल शहर के निजी अन्य अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।

सुविधा न मिलने का वुमेन एंड चिल्ड्रेन अस्पताल की ओपीडी में लगा बोर्ड।

दवा की कमी|मरीज व उनके परिजन सुदेश रानी, गगन दीप कौर, जसप्रीत कौर, रेखा, विमला देवी आदि ने कहा कि वह अस्पताल में दूसरी बार इलाज के लिए आई हैं। करीब चार माह पहले भी अस्पताल में दवाई की समस्या थी आज भी हैं।

एक अल्ट्रासाउंड मशीन के भरोसे अस्पताल

अस्पताल में एक अल्ट्रासाउंड के भरोसे मरीजों का इलाज हो रहा है। सिविल अस्पताल में रोजाना 500 से 600 और वुमेन एंड चिल्ड्रन अस्पताल में 300 से 400 से अधिक की ओपीडी होती है। हर रोज 100 से अधिक मरीजों को अल्ट्रासाउंड की भी जरूरत पड़ती है, जिसमें अधिकतर निम्न परिवार से संबंधित गर्भवती महिलाएं होती हैं, लेकिन पूरे अस्पताल में महज एक अल्ट्रासाउंड मशीन स्थापित किया गया है। जिस पर प्राइवेट अनट्रेंड डाक्टर तैनात किया गया है। बताया जाता है अल्ट्रासाउंड की जांच विशेषज्ञ डाक्टर कर सकते हैं।

<img src="images/p3.png"टेंडर जारी किया गया था

एसएमओ डाॅ. सतीश गोयल ने कहा कि अस्पताल परिसर में एक बिल्डिंग भी बनाई गई थी, जिसमें निजी कंपनियों के अधीन राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में सीटी स्कैन एमआरआई मशीन लगाने की योजना बनाई थी, शर्तें तय कर पंजाब हेल्थ सिस्टम कॉर्पोरेशन की ओर टेंडर भी जारी किए गए थे लेकिन किसी भी कंपनी ने टेंडर नहीं लिया।

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Bathinda News – mri city scan histopathalogy not started

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