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BCA-MBA की डिग्री लेकर भी ये महिला बन गई अघोरी, 8 साल पहले बेटी-पति को छोड़ चुना श्मशान, गले में रुद्राक्ष की माला-सिर पर काले रंग की पगड़ी…अब ऐसी है इनकी लाइफ



प्रयागराज (इलाहाबाद)। कुंभ 2019 (Kumbh 2019) में तरह-तरह के साधु-संन्यासी बाबाओं के बारे में आपने सुना-पढ़ा। लेकिन इस बार एक ऐसी महिला अघोरी भी कुंभ में आई हैं जो एक बेटी की मां हैं और MBA की डिग्री हासिल कर चुकी हैं। इससे पहले वे एक नामी सॉफ्टवेयर कंपनी में काम भी कर चुकी हैं। उन्होंने 8 साल पहले सबकुछ त्याग कर श्मशान का रास्ता चुना और महिला अघोरी बन गईं। आइए जानते हैं इनके बारे में रोचक बातें…..

शादी के बाद लिया संन्यास

– इस महिला अघोरी (Mahila Aghori) का नाम प्रत्यंगिरा (Pratyangira) है। वे आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) की रहने वाली हैं। इन्होंने कंप्यूटर एप्लीकेशन में ग्रेजुएशन (BCA) की डिग्री हासिल की। इसके बाद एचआर में एमबीए (MBA) भी किया है।
– वे बताती हैं कि अघोरी बनने से पहले वे एक नामी सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी करती थीं। इसके साथ ही गृहस्थ जीवन बिता रही थीं। उनकी एक बेटी भी है।
– उन्होंने बताया कि करीब 8 साल पहले उनके मन में अघोर का ख्याल आया और उसके बाद तो दुनिया ही बदल गई। आमतौर पर महिलाओं का श्मशान-कब्रिस्तान जाना मना है। लेकिन ये महिला अघोरी श्मशान-कब्रिस्तान में ही शिव साधना करती हैं।

कहती हैं अघोरी हलो नहीं कहते…

– ये महिला अघोरी गले में नरमुंडों और रुद्राक्ष की माला पहनती हैं। काले रंग के कपड़े पहनने के साथ सिर पर भी काले रंग की पगड़ी और एक विशेष अंगूठी भी धारण करती हैं। ये रात में भगवान शिव और मां काली की साधना करती हैं।
– महिला अघोरी प्रत्यंगिरा ने बताया कि वे महाकाल की भक्त हैं। महाकाल का स्थान श्मशान है। उन्होंने बताया कि महाकाल और महाकाली को संयुक्त रूप से अघोरियों की भाषा में आदेश कहते हैं। अघोरी हलो नहीं बोलते।
– वे बताती हैं कि उन्हें श्मशान जाकर आत्मिक सुख की अनुभूति होती है। वे लोक कल्याण के लिए महिला अघोरी बनीं हैं। उनकी सोच है कि वे सभी की मदद करें। उन्होंने स्वीकारा कि वे रुपए-पैसे से मदद नहीं कर सकतीं पर दैवीय ऊर्जा से लोगों के दुख दूर कर सकती हैं।

ये है इनका स्थान

– प्रयागराज कुंभ के अघोर अखाड़े में एक स्थान पर कुंड बना है। कुंड के पास दो दीपक हैं। त्रिशूल गड़ा है जिस पर फूल-माला चढ़ाई गई है और इसके बीच वाले सिरे पर नींबू लगाया गया है।
– इस त्रिशूल पर एक डमरू भी बंधा है। महिला अघोरी ने बताया कि उनकी साधना रात 11 बजे से शुरू हो जाती है, जो देर रात 3 से 4 बजे तक चलती रहती है।

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