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आतंकियों से लोहा लेते शहीद हुआ हरियाणा का लाल, भारत माता के जयकारों के बीच हुआ शहीद का अंतिम संस्कार, पिता का दर्द- पाक को सबक सिखाना होगा, मेरा बेटा देश पर कुर्बान हो गया, कब तक देश के बेटे शहीद होते रहेंगे 



करनाल (हरियाण)।शहीद हवलदार बलजीत सिंह का बुधवार को उनके पैतृक गांव डिंगर माजरा में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। तीन साल के बेटे अरनव ने पिता को मुखाग्नि दी। शहीद के पिता किशनचंद ने कहा कि ऐसे बेटा भगवान सबको दे। बेटे बलजीत का इतना ही साथ था। उन्हें बेटे की बहादुरी पर गर्व है।

सैकड़ों युवा शहीद के पार्थिव शरीर का घरौंडा पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। मोटरसाइकिलों के काफिले के साथ हाथों में तिरंगा उठाकर भारत माता के नारे लगाते हुए शहीद बलजीत सिंह के पार्थिव शरीर के काफिले की अगुवाई कर पैतृक गांव डिंगर माजरा पहुंचे। गांव में शहीद का पार्थिव शरीर शहीद के घर रखा, जहां पर ग्रामीणों व रिश्तेदारों ने अंतिम दर्शन किए। इसके बाद घर से श्मशान घाट तक हजारों की भीड़ ने नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी। सेना व पुलिस के जवानों ने हवाई फायर कर पार्थिव शरीर को सलामी दी, उस समय भारत माता की जय, शहीद बलजीत सिंह अमर रहे के नारे गूंजते रहे। पाकिस्तान मुर्दाबाद के भी नारे लगाए गए। गुरुकुल पाणिनी नलवी खुर्द के ब्रह्मचारियों ने आचार्य बिसंभर और पुरोहित राजीव आर्य ने वेद मंत्रों के साथ शहीद का अंतिम संस्कार करवाया। अंतिम संस्कार के दौरान हजारों की संख्या में जुटे लोगों ने नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी।

बेटे का इतना ही साथ था : पिता किशनचंद
पिता किशनचंद ने कहा कि बेटे बलजीत का इतना ही साथ था। बेटे की बहादुरी पर गर्व है। भगवान सबके घर ऐसा बेटा दे। सरकार को पाकिस्तान को भी सबक सिखाना चाहिए। मेरा बेटा देश पर कुर्बान हो गया। कब तक पाकिस्तान के कारण देश के बेटे शहीद होते रहेंगे। पाकिस्तान को खत्म करना जरूरी है। उसकी भाषा में जबाव देना चाहिए।

बड़ा भाई बोला : बहादुर था छोटा
शहीद के बड़े भाई कुलदीप ने कहा कि उनके भाई ने देश के लिए अपने प्राणों न्यौछावर कर दिए। हमारा छोटा बहुत बहादुर था। कभी भी अपनी पोस्टिंग के दौरान घबराता नहीं था। हमें बीच में छोड़कर चला गया। इस दौरान परिवार के सदस्य दिलबाग आर्य ने बताया कि उनके परिवार से चचेरा भाई सुरजीत व भतीजा अंकित भी इस समय भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सुरजीत 1999 में भर्ती हुआ था व इस समय श्रीनगर में हवलदार के पद पर सेवा दे रहा है व भतीजा अंकित पिछले तीन वर्ष पहले सेना में सिपाही भर्ती हुआ था इस समय लेह लद्दाख में पोस्टिंग है।

1962 में पिता भी चीन से बदला लेने के लिए सेना जॉइन करना चाहते थे
चाचा बलबीर लाठर ने बताया कि जिस समय चाइना से युद्ध चल रहा था तो शहीद के पिता किशनचंद सेना में जाने के लिए तैयार थे। आगे से पहले तो बुला लिया गया, लेकिन युद्ध बंद होने के चलते बाद में अधिकारियों ने मना कर दिया था।

17 वर्षों की सेवा में अपना फर्ज कभी नहीं भूला
शहीद बलजीत सिंह 2002 में भर्ती हुआ था व उसका जज्बा देश सेवा को समर्पित था। परिवार के सदस्यों के साथ भी वह हमेशा देश सेवा की बातें करता था। ग्रामीणों व परिवार ने सरकार से शहीद के परिवार से एक सरकारी नौकरी व गांव के स्कूल को अपग्रेड कर शहीद के नाम से करने की मांग की।

परिवार को मिलेगी सभी सुविधाएं : विधायक
विधायक हरविंद्र कल्याण ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा शहीदों को जो आर्थिक सहयोग दी जाती है, वह बलजीत के परिवार को भी मिलेगा। जीटी रोड कुटेल पर उनका सनराइजिंग वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल है आगे से शहीद के दोनों बच्चों को 12वीं कक्षा तक निशुल्क पढ़ाया जाएगा।

मेजर बोले- बहादुरी से लड़ा आपका बेटा बलजीत
शहीद बलजीत सिंह 50 राष्ट्रीय राइफल में हवलदार के पद पर तैनात थे। सेना के मेजर जनरल ने बताया कि सोमवार रात 2:30 बजे आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिलते ही रत्नीपुरा इलाके में सर्च अभियान चलाया गया। आतंकी एक घर और स्कूल में छिपे थे। आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसमें शहीद बलजीत सिंह ने एक आतंकी को ढेर कर दिया, तभी सामने से आतंकियों की गोली ने बलजीत सिंह समेत 2 जवानों को घायल कर दिया, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया और वहां उनको मृत घोषित कर दिया।

पार्थिव शरीर देख विलखने लगे बच्चे और पत्नी
जिस समय बच्चों को शहीद के पार्थिव शरीर के पास लाया गया दोनों पापा को देखकर चिल्लाने लगे साथ में पत्नी भी। साथ खड़े लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। तीन साल के मासूम अरनव को स्तब्ध होकर देख रहे थे कि यह क्या हो गया।

सीएम ने ट्वीट कर शहीद को दी श्रद्धांजलि

सीएम मनोहर लाल ने हवलदार बलजीत सिंह की शहादत पर ट्‌वीट किया कि मां भारती की सेवा में कर्तव्य पथ पर अपना जीवन न्योछावर करने वाले करनाल के गांव डिंगर माजरा के हवलदार बलजीत सिंह को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि। आपके बलिदान को हम कभी नहीं भुला पाएंगे, इस शहादत को मेरा नमन।

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