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भगवान…ऐसा दर्द किसी को न मिले…चलती ट्रेन में हुई महिला की डिलेवरी, रेलवे विभाग ने दिखाई ऐसी लापरवाही की मासूम की हो गई मौत, दो घंटे तक बेटे के शव को झोले में रख निहारती रही महिला



रांचीरेल प्रशासन की लापरवाही व संवेदहीनता की वजह से एक प्रसूता की ट्रेन में प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई। यह घटना सुबह हटिया स्टेशन पर घटी। लोहरदगा के सेंगरा गांव की रहनेवाली इंद्रमणि देवी को एलेप्पी एक्स. की स्लीपर क्लास की एस-8 बोगी में प्रसव पीड़ा उठी और और बच्चे को जन्म दिया। इंद्रमणि के पति तेतरू खरवार के अनुसार रेलवे को इसकी जानकारी दी गई। उन्हें कहा गया है कि रांची स्टेशन पर डॉक्टर आएंगे और देख लेंगे। ट्रेन हटिया से रांची के लिए खुली। रास्ते में ही बच्चे की मौत हो गई। जब ट्रेन रांची स्टेशन पहुंची तो रेल डॉक्टर संजीव कुमार आए और इंद्रमणि की जांच करने के बाद उन्हें एंबुलेंस से सदर अस्पताल भेज दिया। एंबुलेंस पर ना तो नर्स थीं और ना ही कोई और। पति और ननद को उसमें बैठाकर अस्पताल भेज दिया।

एंबुलेंस चालक सदर अस्पताल गेट पर पीड़िता को छोड़ भाग गया। दो घंटे तक पीड़िता अस्पताल परिसर में झोले में अपने बेटे के शव को लिए बैठी रही। जब मामला तूल पकड़ा तब दिन के 12 बजे रेल अस्पताल रांची से ड्रेसर श्याम देव को भेजा गया। उसके बाद उसने पीड़िता को सदर अस्पताल के लेबर वार्ड में भर्ती कराया। पूछने पर ड्रेसर श्याम देव ने कहा कि रेल डॉक्टर संजीव ने भेजा है और कहा है कि देखकर आओ कि महिला को एडमिट किया गया है या नहीं। पूरी घटना सुबह 10 से 12 बजे के बीच की है।

बड़े सवाल

1 रांची स्टेशन से सदर अस्पताल तक महिला को वैसी स्थिति में बिना नर्स के कैसे भेज दिया गया
2 रेलवे प्रशासन ने सदर अस्पताल में प्रसूता को भर्ती क्यों नहीं कराया, दो घंटे तक अस्पताल परिसर में क्यों पड़ी रही, सदर अस्पताल को सूचना दी गई थी क्या
3 अगर रेलवे की लापरवाही नहीं थी तो दो घंटे बाद रेल डाॅक्टर ने ड्रेसर को सदर अस्पताल क्यों भेजा। सिर्फ यह देखने के लिए कि एडमिट हुई है या नहीं
4 डीआरएम ऑफिस के पास रेल अस्पताल में महिलाओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं है क्या

दो घंटे तक खोजे नहीं मिल रही थी प्रसूता
जब घटना की जानकारी सदर अस्पताल की डॉक्टर किरण को हुई तो वे मीडिया के साथ लेबर वार्ड सहित सभी वार्ड में प्रसूता को खोजने गईं। करीब डेढ़ घंटे तक अस्पताल में खोजा गया, पर वह रिसेप्शन के पास कोने में कुर्सी पर बैठी मिली। साथ में दो झोले थे। जब पूछा गया कि बच्चा कहां है तो बोली- झोले में। तब तक भीड़ लग गई। डॉ किरण ने बताया कि बच्चे की मौत हो गई है। महिला की स्थिति ठीक नहीं है, लेकिन स्थिर है। उसकी कई जांच कराई जाएगी। उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

तमिलनाडु से पति और ननद के साथ गांव जाने को आ रही थी रांची
इंद्रमणि देवी अपने पति तेतरू खरवार और ननद मंतियारे के साथ तमिलनाडु से रांची आ रही थी। तेतरू नारियल की फैक्ट्री में काम करता है। पति तेतरू खरवार पत्नी और बहन को अस्पताल में छोड़ रांची रेलवे स्टेशन चला गया था। उसने बताया कि वह मदद मांगने स्टेशन गया था। हालांकि उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि करे तो क्या करे। उसकी स्थिति ऐसी थी कि मुंह से बोली नहीं निकल रही थी।

रेलवे ने कहा: एटेंड किया था महिला को
हटिया स्टेशन और रांची रेलवे स्टेशन पर रेल डाॅक्टर ने पीड़िता को अटेंड किया है। हमारे पास फिलहाल यही जानकारी है। और जानकारी ली जा रही है, इसके बाद ही आपको बता सकते हैं कि आखिर क्या हुआ। नीरज कुमार, सीपीआरओ, रांची।

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Ranchi Jharkhand News Delivery of woman in moving train

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