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25 करोड़ रु. से ज्यादा के प्रोजेक्ट हाथ में नहीं लेगी सरकार



जयपुर.वित्तीय संकट से जूझ रही राज्य सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लेकर बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। अब प्रदेश में 25 करोड़ रुपए से ज्यादा लागत वाले सभी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को सरकार पहले पीपीपी मॉडल पर चलाकर देखेगी।

यदि पीपीपी मॉडल पर प्रोजेक्ट के लिए निवेशक नहीं आते हैं तो ही राज्य सरकार अपने फंड से इन्हें संचालित करेगी। मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने शुक्रवार को सभी वर्क्स डिपार्टमेंट्स को इसका सर्कुलर जारी कर दिया है। पिछली भाजपा सरकार ने किसान कर्जमाफी, फ्री मोबाइल फोन जैसी योजनाओं पर मोटा पैसा खर्च किया। वहीं मौजूदा सरकार ने आते ही बेरोजगारी भत्ता, कर्जमाफी, सामाजिक पेंशन जैसी योजनाओं में पैसा बांटा।

24 हजार करोड़ से ज्यादा के पीपीपी प्रोजेक्ट पाइपलाइन में

सरकार में मौजूदा समय में 24825 करोड़ रुपए के 95 पीपीपी प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं। 14706 करोड़ रुपए के 175 प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं तथा 4906 करोड़ रुपए के 45 प्रोजेक्ट अभी चल रहे हैं।

ये प्रोजेक्ट प्लानिंग में

रोड सेक्टर के लिए 9029 करोड़ के 67 प्रोजेक्ट, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 12843 करोड़ रुपए के 15 प्रोजेक्ट, पेयजल के लिए 2165 करोड़ रुपए के 2 प्रोजेक्ट, सामाजिक क्षेत्र में 298 करोड़ रुपए के 7 प्रोजेक्ट शामिल हैं।

ये प्रोजेक्ट चल रहे हैं

रोड सेक्टर के लिए 2878 करोड़ के 12 प्रोजेक्ट, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 646 करोड़ रुपए के 13 प्रोजेक्ट, ऊर्जा के लिए 1310 करोड़ रुपए के 8 प्रोजेक्ट, सामाजिक क्षेत्र में 46 करोड़ रुपए के 11 प्रोजेक्ट शामिल हैं।

ये प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं

रोड सेक्टर के लिए 6300 करोड़ के 63 प्रोजेक्ट, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 402 करोड़ रुपए के 22 प्रोजेक्ट, ऊर्जा के लिए 7097 करोड़ रुपए के 11 प्रोजेक्ट, सामाजिक क्षेत्र में 645 करोड़ रुपए के 62 प्रोजेक्ट शामिल हैं।

जरूरत क्यों : बिना बजट प्रावधान के पहले भाजपा फिर कांग्रेस लाई याेजनाएं

चुनावी साल में पहले ताे भाजपा सरकार और इसके बाद सत्ता में आई कांग्रेस सरकार ने बिना बजट प्रावधान के ही करीब 15 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर दिए। पिछली भाजपा सरकार ने 9257 करोड़ रुपए और मौजूदा सरकार ने करीब 6 हजार करोड़ रुपए खर्च किए। इसका असर यह हुआ कि सरकार में लगभग सभी बड़े प्रोजेक्ट भुगतान नहीं हाेने से ठप हो गए।

कर्मचारियों के वेतन को छोड़कर लगभग सभी तरह के भुगतान या तो रोक दिए गए या उनकी रफ्तार धीमी कर दी गई। इसकी वजह से सरकार का कैपिटल एक्सपेंडीचर भी पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले घट गया। सरकार की वित्तीय सेहत का सबसे बड़ा मानक उसका कैपिटल एक्सपेंडीचर ही होता है।इस पैसे को सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करती है। फरवरी में पेश किए गए वोट ऑन अकाउंट में कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए 19969 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। जबकि पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडीचर पर 20770 करोड़ रुपए खर्च किए थे।

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Rajasthan Government will not take over 25 crore projects

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