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50 लाख से अधिक लोगों के पुरी पहुंचने की संभावना, 1300 होटल अभी से बुक



पुरी/भुवनेश्वर (धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया).बालीगांव, जगन्नाथ पुरी से सिर्फ 28 किलोमीटर दूर है। यहीं के तुलसीवन से रोजाना भगवान जगन्नाथ के शृंगार के लिए तुलसी जाती है। फानी से तबाह हो चुके इस गांव में अभी तक बिजली सप्लाई चालू नहीं हो पाई है। गांव की अर्थव्यवस्था को चलाने वाले नारियल के पेड़ जमींदोज हो गए हैं। धान की फसल बर्बाद हो गई है।

गांव के लगभाग 200 घरों में से कोई भी घर ऐसा नहीं है जहां फानी का दुर्भाग्यपूर्ण असर दिखाई न पड़ रहा हो। लेकिन ये सारे हालात एक तरफ हैं। ये दुश्वारियां गांव के लोगों की भागवान जगन्नाथ के प्रति आस्था को रंचमात्र भी डिगा नहीं सकी हैं। बदन पर सिर्फ घुटने तक धोती पहने नारायण पोलाई कहते हैं कि मेरे 45 नारियल के पेड़ टूट गए। 3.5 एकड़ में लगी धान की फसल उजड़ गई। बावजूद इसके मैं और गांव वाले जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने पुरी अवश्य जाएंगे। बालीगांव, धार्मिक स्थल दासियापीठ के लिए प्रसिद्ध है। पोलाई की तरह यहां 4 जुलाई से 15 जुलाई तक चलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए हर किसी में जोश है।

पर्यटन निगम के असिस्टेंट डायरेक्टर विजय जैना के मुताबिक इस राजकीय उत्सव में इस दौरान 50 लाख से अधिक लोगों के पहुंचने की संभावना है। स्वर्ण शृंगार वाले दिन ही 10 लाख से अधिक लोग आएंगे। पुरी में करीब 1300 होटल हैं, जिनमें मई महीने में 10 फीसदी भी ऑक्यूपेंसी नहीं थी, लेकिन अब होटलों के कमरे पूरी तरह एडवांस में बुक हो चुके हैं। जैना आगे बताते हैं कि फानी से पहले पुरी में करीब 15 हजार पर्यटक थे जिन्हें हमने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। ओडीशा के साथ ही बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र से सर्वाधिक लोग रथ यात्रा में शामिल होते हैं। वहीं फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और बांग्लादेश से भी लोग पहुंचेंगे। राज्य सरकार जहां बुनियादी सुविधाओं को पूरा करने में जुटी है, वहीं श्री जगन्नाथ टेंपल ऑफिस रथ यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है।

जिला प्रशासन का कहना है कि फानी तूफान से मंदिर को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है और न ही रथ यात्रा के रास्ते- जगन्नाथ मंदिर से जनकपुरी गुंढ़ीचा मंदिर तक भी किसी प्रकार की बाधा आई है। इसलिए वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुरूप रथ यात्रा निकाली जाएगी। जगन्नाथ मंदिर के सामने ही कार्यशाला बनी है। 200 से अधिक कारीगर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ बनाने के कार्य में बीते दो माह से जुटे हैं। जबकि इनमें से अधिकांश कारीगरों के घर-परिवार-खेतों-पेड़ों को फानी ने नुकसान पहुंचाया है। 30 साल से रथ बना रहे शिवशंकर भोई कहते हैं कि यह मेरी तीसरी पीढ़ी है जो रथ बना रही है। अक्षय तृतीया के दिन से रथ बनाने का कार्य शुरू किया है। हम दो-तीन जुलाई तक रथ को पूरा कर देंगे। यह रथ धौरा, साझ और कस्सी की लकड़ी से तैयार हो रहे हैं। जगन्नाथजी का रथ 13.5 मीटर ऊंचा और 16 पहियों वाला होगा। जबकि बलभद्र के रथ की ऊंचाई 13.2 मीटर होगी और इसमें 14 पहिए होंगे। सुभद्राजी के रथ की ऊंचाई 12.9 मीटर और 12 पहिए होंगे।

मंदिर ऑफिस के सूचना अधिकारी सुदीप कुमार चटर्जी के अनुसार वन विभाग की ओर से 832 लॉग्स (मोटे लट्‌ठे) पहले ही मिल गए थे। हर रथ के लिए एक मुख्य कारपेंटर है जो अपने साथ 50 लोगों को लेकर रथ निर्माण का कार्य कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त कुछ लोग अलग से लकड़ी की छंटाई और कटाई का कार्य करते हैं। जितने दिन भी कारीगर रथ को तैयार करते हैं, वे इस दौरान बिना प्याज-लहसुन का बना सात्विक खाना खाते हैं। पूरा कार्य बिना जूते-चप्पल पहने करते हैं। जगन्नाथजी की पूरे दिन में 36 प्रकार की सेवा होती है, जिसे पंडों के द्वारा पूरा कराया जाता है और आरती के समय सभी पंडे उपस्थित रहते हैं।

वीणाकार सेवा यानी जगन्नाथजी को सुलाने के लिए वीणा बजाने की सेवा करने वाले पंडा मुक्तिनाथ मिश्रा कहते हैं कि 17 जून से जगन्नाथजी बीमार हैं और मंदिर के अंदर आराम कर रहे हैं। 2 जुलाई को वे नवजोवन दर्शन देंगे। 3 को नेत्र उत्सव होगा और उसके बाद 4 तारीख को रथ यात्रा शुरू होगी। सामान्य दिनों में 125 मन (50 क्विंटल) चावल का भोग बनता है। यह प्रसाद 100 रसोइए बनाते हैं, जिसमें 500 लोग सहयोग करते हैं। जब भगवान गुंढ़ीचा मंदिर में होते हैं तो 500 से 800 मन चावल का भोग बनता है। रथ में प्रयोग होने वाली लकड़ी सेे बाद में तीन महीने तक जगन्नाथजी का प्रसाद बनता है। वे बताते हैं कि यहां के सभी होटल बुक हो चुके हैं और तीन दिन से कम का पैकेज दे रहे हैं। तूफान में मुक्तिनाथ के 520 नारियल के पेड़ थे। सभी पेड़ टूट गए हैं। वे कहते हैं कि फानी आने के कारण पुरी कम से कम 15 साल पीछे चला गया है।

हर कहीं दिख जातेे हैं जर्जर स्कूल, टूटे पेड़, झुके खंभे
पुरी से कोणार्क रोड पर बेलाडाल गांव पड़ता है, यहीं फानी तूफान सबसे पहले टकराया था। पहली से आठवीं तक चलने वाले नुआनाई गवर्मेंट स्कूल में पहली, दूसरी और तीसरी के बच्चे एक साथ बरामदे में पढ़ रहे हैं। तो अन्य क्लॉस के बच्चे दो कमरों में एक साथ पढ़ रहे हैं। फानी तूफान के कारण चार कमरे क्षतिग्रस्त हो गए हैं। स्कूल टीचर पुष्पांजलि मिश्र और सुमित्रा जेना कहती हैं कि अभी तक लाइट नहीं आई है, इसलिए हम बरामदे में ही क्लास ले रहे हैं। वे कहती हैं कि सामने बालूखंड वन क्षेत्र है जिसमें पहले 4.5 हजार हिरन थे, लेकिन तूफान के बाद से अभी तक हमने एक भी हिरन नहीं देखा। वन क्षेत्र में लाखों पेड़ टूटे पड़े हैं।

फानी तूफान के दौरान 180 से 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी के बाद भुवनेश्वर, पुरी सहित ओडीशा के 14 जिलों में जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कुल 64 लोगों की जान गई, सर्वाधिक 32 लोग पुरी में मारे गए। 20,367 गांव और करीब 1.5 करोड़ लोग प्रभावित हुए। 1.46 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में फसल बर्बाद हो गई। ऐसे मकान जिनकी छत घास-फूस, टीन या एजबेस्टस की बनी थी, वो घर पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। राज्य सरकार का अनुमान है कि 9300 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। आलम यह रहा कि राजधानी भुवनेश्वर में लगातार आठ और पुरी में लगातार 19 दिन बिजली ही नहीं आ पाई।

अभी भी यहां घंटों बिजली नहीं रहती है। ओडीशा स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के स्पेशल रिलीफ अधिकारी बिष्णुपद सेठी कहते हैं कि हमने 72 घंटों में रास्ते की बाधाएं दूर कर दी थीं। 13 जिलों के गांवों में बिजली आ गई है, सिर्फ पुरी के 9 फीसदी गांव में ही बिजली आना बची है। मेंटेनेंस के कारण कटौती हो रही है। बिजली की स्थिति सामान्य होने में अभी एक माह का समय और लगेगा। वहीं, स्कूल की बिल्डिंग आदि बनाने में एक वर्ष का समय लगेगा। वर्ल्ड बैंक, केंद्र सरकार और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर हम स्थायी समाधान की योजना बना रहे हैं। जैसे बिजली के खंभे फानी में गिर गए, लेकिन रेलवे लाइन या खंभों को कोई नुकसान नहीं हुआ। हम इसका अध्ययन करेंगे। ये आंकड़े 25 जून तक के है।

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जगन्नाथ मंदिर के सामने भगवान का रथ बनाते कारीगर। रथों को बनाने में करीब 200 कारीगर मजदूर दिन-रात काम कर रहे हैं।

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