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कविता

कुछ रंग मैंने भरे नही

लेखिका : आशु शर्मा, किताब ए ज़िन्दगी कुछ रंग मैंने भरे नहीं और कोई रंग मुझ पर खिला नहीं मैं यूँ भी चाहता हूँ खैर सबकी मुझे कोई  किसी से गिला नहीं ख़्वाब ताकते रहते हैं मुझको पास आकर कोई मिला नहीं मेरा जख़्म भरता क्यूँ नहीं है जबकि वक़्त …

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