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कविता

वे सैनिक हैं, वे रक्षक हैं

सुकून भरी गहरी नींदजब हम रात में सोते हैंसीमा पर जो जागते रहते हैंवे सैनिक हैं वे रक्षक हैंदोपहर की गर्मी में जब हमए सी में बैठे सुस्ताते हैंसीमा पर जो खून पसीना बहाते हैंवे सैनिक हैं वे रक्षक हैंकड़ाके की सर्दी में जब हमदुबक के बिस्तर में घुस जाते …

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मासूम बचपन

न आंखों में सपने न दिल में उमंगें मासूम बचपन इनका ईंट गारे में गुम है इन बच्चों को हमने बचपन है लौटाना इन्हें काबिल है बनाना इन्हें है पढ़ाना नन्हें नन्हें हाथों में किताबें ही सजती हैं जुगनू सी आँखों की लौ रोशन जो करती हैं बचाना है अपने …

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