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Hindi News / राशिफल / Mahavir Jayanti 2019: एक राजा महावीर स्वामी के पास जाकर बोले- मुझे मन की शांति चाहिए, इसके लिए मैं कोई भी कीमत चुका सकता हूं, महावीर ने कहा- तुम्हारे राज्य में एक गरीब व्यक्ति रहता है, तुम उससे मन की शांति खरीद सकते हो

Mahavir Jayanti 2019: एक राजा महावीर स्वामी के पास जाकर बोले- मुझे मन की शांति चाहिए, इसके लिए मैं कोई भी कीमत चुका सकता हूं, महावीर ने कहा- तुम्हारे राज्य में एक गरीब व्यक्ति रहता है, तुम उससे मन की शांति खरीद सकते हो



रिलिजन डेस्क। एक राजा अपने सेवकों के साथ भगवान महावीर से मिलने पहुंचे। राजा ने महावीर से कहा- हे प्रभु, मेरे पास वो हर चीज है जो कोई मनुष्य इस दुनिया में प्राप्त करना चाहता है। अब मेरी कोई महत्त्वाकांक्षा नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि अब भी मैं अपूर्ण हूं।
मैंने सुना है कि आपने समाधी (मनी की शांति) जैसी कोई चीज प्राप्त कर ली है, क्या मैं भी उसे प्राप्त कर सकता हूं, इसके लिए मैं कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हूं।
राजा की बात सुनकर महावीर मुस्कुराए और बोले- अगर आप समाधी पाना चाहते हैं तो आपके राज्य में एक बेहद गरीब व्यक्ति रहता है, उसने भी समाधी प्राप्त कर ली है, गरीब होने के कारण शायद वो आपको बेच दे। इस स्थिति में वो ही आपकी मदद कर सकता है।
उस व्यक्ति का पता जानकर राजा उसके पास पहुंचे। राजा ने देखा कि वो व्यक्ति एक टूटी-फूटी झोपड़ी में रहता है। राजा ने उसे मिलने के लिए बाहर बुलवाया और कहा कि- तुम चाहे जितना धन मुझसे ले लो, मगर इसके बदले में मुझे समाधी दे दो।
राजा की बात सुनकर वो व्यक्ति बोला- ये संभव नहीं है महाराज।
राजा ने पूछा- क्यों?
उस व्यक्ति ने राजा से कहा- समाधी मन की स्थिति है, न कि कोई वस्तु, जिसे खरीदा या बेचा जा सके। समाधी पाने के लिए निरंतर आध्यात्मिक अभ्यास करना पड़ता है। इसके बिना समाधी पाना असंभव है। समाधी का अर्थ है मन की शांति। जब आपके मन में किसी तरह की भावना न हो, उसी अवस्था में आप समाधी यानी मन की शांति प्राप्त कर सकते हैं।
राजा समझ गए कि समाधी कोई वस्तु नहीं, जिसे खरीदा जा सके उसे तो अपने तप के बल पर ही प्राप्त किया जा सकता है। वे फ़ौरन भगवान् महावीर के पास वापस लौटे और उसी दिन से उनके शिष्य बन गए।

लाइफ मैनेजमेंट
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान के पास सबकुछ है, लेकिन मन की शांति नहीं है। मन की शांति पाने के लिए मन को निर्मल करना पड़ता है यानी इसके अंदर से सभी तरह की भावनाएं जैसे- अहंकार, द्वेष, जलन आदि को बाहर निकालना पड़ेगा। तभी मन की शांति पाई जा सकती है।

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