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अब झारखंड में भी उठी एनआरसी की मांग, सीएम रघुबर दास बोले- केंद्र के सामने रखेंगे प्रस्ताव

रांची
असम में जारी फाइनल लिस्ट पर विवाद पूरी तरह थमा नहीं है और देश के कई हिस्सों में इसे जारी करने की मांग उठने लगी है। झारखंड के मुख्यमंत्री ने भी कहा है कि प्रदेश में एनआरसी लागू होना चाहिए। एक टीवी न्यूज चैनल के कार्यक्रम में रघुबर दास ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र के समक्ष असम एनआरसी की तरह झारखंड में भी बांग्लादेशी घुसपैठियों की समस्या से निपटने के लिए नागरिक सूची अपडेट करने का प्रस्ताव रखेगी।

झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले रघुबर दास ने कहा, ‘एनआरसी लागू होने से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की पहचान होगी और परिणामस्वरूप उन्हें यहां से निकाला जा सकेगा।’ बता दें कि इससे पहले देश के अलग-अलग हिस्सों में एनआरसी को लेकर मांग उठ चुकी है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी एनआरसी को महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि एनआरसी देश के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है, खासकर आंतरिक सुरक्षा के लिए। यह अच्छा होगा यदि इसे देश के अन्य हिस्सों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।

मणिपुर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में भी एनआरसी की मांग
इसके अलावा मणिपुर, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में भी एनआरसी लागू होने की मांग की गई है। मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह ने कहा कि असम की तरह ही उनके राज्य में भी राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की जरूरत है। उन्होंने यह भी दावा किया कि एनआरसी की जरुरत सिर्फ मणिपुर में नहीं बल्कि पूर्वोत्तर के सभी राज्यों को है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में एनआरसी के लिए मणिपुर कैबिनेट पहले ही एक प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है।

पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि अगर 2021 विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी सत्ता में आती है तो वह बंगाल में भी एनआरसी लेकर आएगी। दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी भी केंद्रीय राजधानी में एनआरसी लागू करने की मांग कर चुके हैं।

असम और महाराष्ट्र में डिटेंशन सेंटर शुरू होगा
उधर, ट्राइब्यूनल्स द्वारा विदेशी घोषित किए गए लोगों के लिए असम और महाराष्ट्र में डिटेंशन सेंटर बनाया जाएगा। असम के गोलपरा जिले में अगले साल से देश का सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर शुरू हो जाएगा। इस डिटेंशन सेंटर में विदेशी अपराधियों और उन लोगों को रखा जाएगा, जिन्हें ट्राइब्यूनल्स ने विदेशी घोषित किया हो। पिछले साल जून में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुवाहाटी से 124 किमी दूर मटिया में 20 बीघा जमीन पर 46.5 करोड़ की लागत के इस सेंटर को मंजूरी दी थी। इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। इस सेंटर में 3000 लोगों को रखा जा सकेगा। वहीं, महाराष्ट्र के गृह विभाग ने पिछले हफ्ते नवी मुंबई की प्लानिंग अथॉरिटी सिडको (CIDCO) को खत लिखकर डिटेंशन सेंटर के लिए नेरुल में तीन एकड़ जमीन मांगी है।

हर राज्य में एक कैंप
इसी साल मई में गोवा में भी एक डिटेंशन सेंटर खोला गया था। साल 2014 में केंद्र ने सभी राज्यों से एक डिटेंशन सेंटर/होल्डिंग सेंटर/कैंप खोलने के लिए कहा था जिनमें ऐसे लोगों को रखा जा सके जो अवैध पलायन करके आए हों, विदेशी नागरिक जो डिपोर्टेशन या नागरिकता न मालूम होने पर अपने देश भेजे जाने का इंतजार कर रहे हों। इन सेंटर्स को खोले जाने के पीछे यह मकसद था कि जेल में बंद अपराधियों से उन लोगों को को अलग किया जा सके जो विदेशी हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने विदेशियों के डिटेंशन की सीमा 3 साल तय की थी। यह सीमा खत्म होने के बाद ये लोग दो भारतीय नागरिकों की ओर से एक लाख रुपये का बॉन्ड देने के बाद जमानत ले सकेंगे। इन्हें अपना रिहायशी पता और बायोमेट्रिक डीटेल्स भी देने होंगे।

एनआरसी से बाहर लोगों के लिए 90 दिनों का वक्त
असम में हाल ही में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस) की अंतिम सूची जारी होने के बाद इसे अहम माना जा रहा है। इसमें तकरीबन 19 लाख लोग जगह बनाने में नाकाम रहे थे। जो लोग NRC से बाहर हैं उनके पास फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल में अपील करने के लिए अभी 90 दिन का वक्त है और उन पर डिटेंशन सेंटर में भेजे जाने का खतरा मंडरा रहा है।

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