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अल्जाइमर का रिस्क कम करती है ऐरोबिक्स एक्सर्साइज

सप्ताह में 5 दिन और हर रोज आधा घंटा करना उन वयस्क लोगों के लिए अल्जामर का रिस्क कम करनेवाला या इस रोग की गति को धीमा करनेवाला हो सकता है, जिनके इस बीमारी की गिरफ्त में आने की संभावना बहुत अधिक है। रोग से संबंधित जर्नल में मंगलवार को प्रकाशित एक स्टडी में यह बात कही गई।

यूटी साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर में न्यूरोलजी के प्रोफेसर और इस रिसर्च के हेड रोंग झांग के अनुसार, अल्जामर के हाई रिस्क पर पहुंच चुके पेशंट या यादाश्त से संबंधित समस्या का समाना करनेवाले वयस्कों और वृद्धों में मस्तिष्क की संरचना, कार्य और अमाइलॉइड बर्डन पर व्यायाम के प्रभावों का आकलन करने के लिए यह पहला रेंडमाइज्ड कंट्रोल ट्रायल किया गया है।

इस अध्ययन में 55 साल की उम्र और इससे अधिक उम्र के 70 लोगों को शामिल किया गया, जिनमें अल्जामर डिजीज का हाई रिस्क था। इन्हें पूरे 12 महीने तक ऐरोबिक्स और स्ट्रेचिंग कराई गई। ऐसी ही समस्या से जूझ रहे अन्य लोगों के साथ परीक्षण में शामिल लोगों का अध्ययन करने पर सामने आया कि एरोबिक्स और स्ट्रेचिंग का असर ब्रेन पर इस तरह काम करता है कि लोगों में अल्जामर का खतरा बढ़ने की गति या तो बंद हो जाती है या धीमी हो जाती है।

हालांकि यह बात भी स्टडी में पता चली कि स्ट्रेचिंग के मुकाबले एरोबिक्स ज्यादा प्रभावशील है। क्योंकि स्ट्रेचिंग की तुलना में एरोबिक्स हिपोकैंपस सिकुड़न को कम करने पर अधिक काम करता है। हिपोकैंपस दिमाग का वह हिस्सा है जो क्रूशियल मैमोरीज को सहेजकर रखता है।

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