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आईआईटी खड़गपुर की रिसर्च टीम ने जैव ईंधन बनाने के लिए विकसित की नई तकनीक

कोलकाता
आईआईटी खडगपुर के अनुसंधानकर्ताओं ने एक विकसित की है जो जैव ईंधन बनाने के तरीकों को बदलकर इस प्रकिया को किफायती, तेज और प्रदूषण मुक्त बनाएगी। आईआईटी खडगपुर के एक प्रवक्ता ने बताया कि आईआईटी खडगपुर में जैव उर्जा के लिए पी के सिन्हा सेंटर में विकसित ‘सॉइल टू सॉइल’ निर्माण तकनीक को पेटेंट कराया जा रहा है। कृषि और खाद्य इंजिनियरिंग विभाग की प्रोफेसर डॉक्टर रिंतु बनर्जी ने कहा, ‘2जी बॉयोएथेनॉल को प्राकृतिक रुप से उपलब्ध लिंगो-सेल्युलॉसिक घटकों से बनाया जा सकता है, लेकिन ऐसा करने के लिए इसका रासायनिक उपचार जरुरी है। इस रासायनिक उपचार की प्रक्रिया के कारण पर्यावरण दूषित होता है।’

डॉ. बनर्जी ने कहा, ‘हमने इस रासायनिक उपचार को एन्जाइम से बदल दिया है जिससे लिग्निन में कमी आती है और इससे उत्पादन प्रक्रिया प्रदूषण मुक्त होती है।’ उन्होंने तकनीक के काम करने की विधि की जानकारी देते हुए कहा, ‘रासायनिक प्रक्रिया के विपरीत यहां अपशिष्ट उत्पाद प्रदूषण मुक्त है और इस तरह अपशिष्ट जैव ईंधन का जैव उर्वरक में इस्तेमाल संभव है।’

‘जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति’ के तहत वर्ष 2017 तक पेट्रोल के साथ जैव ईंधन के 20 प्रतिशत सम्मिश्रण का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि भारत में वर्ष 2022 तक जैव ईंधन कारोबार 50000 करोड़ रुपए पहुंच जाएगा। ऐसे में कम उत्पादन लागत एवं कम समय वाली यह नई हरित तकनीक अहम हो सकती है। इस परियोजना को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय फंड मुहैया करा रहे हैं। बनर्जी ने कहा कि यह तकनीक औद्योगिक इस्तेमाल के लिए तैयार है।

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