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इंडियन आर्मी को मिला इजरायली 'टैंक किलर'

भोपाल
भारतीय थल सेना ने इजरायल निर्मित टैंक रोधी ‘स्पाइक’ मिसाइलों का मध्य प्रदेश के महू में सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इस मिसाइल के जरिए दुश्‍मन के टैंकों और बंकर को पलक झपकते ही नष्‍ट किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि ‘स्पाइक’ चौथी पीढ़ी की मिसाइल है जो 4 किमी की दूरी तक किसी भी लक्ष्य को भेद सकती है। इससे आतंकी ठिकानों को भी ध्‍वस्‍त किया जा सकता है। इजरायली एटीजीएम को कंधे पर रखकर दागा जाता है और इसे ले जाना बेहद आसान है।

थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत और कई कमांडर बुधवार को हाल ही में नयी खरीदी गई इन मिसाइलों के परीक्षण के गवाह बने। स्‍पाइक मिसाइल के मिलने के बाद अब सेना को लड़ाकू क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है। ‘स्पाइक’ को जम्मू-कश्मीर में उत्तरी कमान के युद्ध क्षेत्र में नियंत्रण रेखा पर तैनात किया गया है। इससे पाकिस्तान के साथ लगी देश की सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक स्‍पाइक का इस्तेमाल नियंत्रण रेखा के करीब बंकरों, शेल्टरों, घुसपैठ के अड्डों और आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों को नष्ट करने के लिए किया जा सकता है।

स्पाइक एटीजीएमएस मिसाइल ‘दागो और भूल जाओ’ के सिद्धांत पर काम करती है। यह मिसाइल पूरी तरह से पोर्टेबल है और इतनी ज्‍यादा शक्तिशाली है कि 4 किमी के दायरे में किसी भी टैंक को नष्ट कर सकती है और दुश्‍मन के बंकर को तबाह कर सकती है। सेना के सूत्रों ने बताया कि इन टैंक रोधी गाइडेड मिसाइलों और इसके लांचर को उत्तरी युद्ध क्षेत्र में नियंत्रण रेखा के साथ 16-17 अक्टूबर से शामिल किया गया है। इस समय इनका इस्तेमाल किया जा रहा है।

भारत स्‍पाइक इस्‍तेमाल करने वाला 33वां देश
इजरायल ने सेना को ‘आपातकालीन खरीद’ तंत्र के तहत 280 करोड़ रुपये के सौदे में कुल 210 मिसाइलों और 12 लॉन्चरों की आपूर्ति की थी। इससे पहले भारत ने यह सौदा रद्द कर दिया था। बताया जा रहा है कि यह बहुप्रतीक्षित सौदा भारतीय वायुसेना के बालाकोट में आतंकी शिविरों पर हवाई हमलों के बाद पाकिस्तानी सेना द्वारा सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ाने के बाद हुआ था।

चौथी पीढ़ी की स्‍पाइक मिसाइल की एक और खासियत यह है कि इस मिसाइल को दागने के बाद बीच रास्‍ते में ही दूसरे लक्ष्‍य की ओर मोड़ा जा सकता है। भारत ऐसा 33वां देश है जो इस मिसाइल का इस्‍तेमाल करने जा रहा है। अब तक स्‍पाइक की 5 हजार मिसाइलें दागी जा चुकी हैं जिसमें से 95 प्रतिशत ने अपने लक्ष्‍य को भेदा है। अब तक भारत दूसरी पीढ़ी की फ्रांस निर्मित मिलान-2 मिसाइल का इस्‍तेमाल करता रहा है।

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