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इन्वेस्टमेंट प्लान के लिए फंड मैनेजर की मदद लें

धीरेंद्र कुमार, नई दिल्ली
आजकल जब निवेश की बात निकलती है, तब ‘स्टोरी’ का जिक्र खूब होता है। किसी कंपनी से जुड़ी स्टोरी बताती है कि वह निवेश के लिहाज से अच्छी है। असल में इन्वेस्टमेंट स्टोरी होती क्या है? हमाने सामने यह सवाल बार-बार आता है। असल में स्टोरी एक समस्या है, क्योंकि यह स्टोरी जैसी कुछ ज्यादा ही हो जाती है। मेरे कहने का मतलब यह है कि लोगों को स्टोरी अच्छी लगती हैं और अगर उसमें कुछ उतार-चढ़ाव, कुछ सस्पेंस और क्लाइमेक्स हो तो ज्यादा रोमांचक लगती है।

स्टोरी बनाकर प्रोडक्ट बेचना आसान होता है
बदकिस्मती से कहानियों की तरफ स्वाभाविक खिंचाव का असर में हमारे निवेश पर देखने को मिलता है। इसे यह कंपनियों के मुकाबले ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। पिछले कई वर्षों से म्यूचुअल फंड कंपनियों में स्टोरी वाले फंड्स जारी करने का रुझान बना है, क्योंकि मेरा मानना है कि स्टोरी बेचना ज्यादा आसान होता है।

कहानी के रूप में समझाना फंड मैनेजर के लिए आसान
मैं आपके सामने एक उदाहरण रखता हूं जो काल्पनिक है लेकिन असल जिंदगी में अक्सर होता है। म्यूचुअल फंड के दो सेल्समैन आपके पास आते हैं और दो अलग-अलग फंड में पैसा लगाने के लिए कहते हैं। पहले सेल्समैन के पास नई स्कीम है, जो म्यूचुअल फंड कंपनी के हिसाब से डिवेलप्ड कंट्रीज से इमर्जिंग इकॉनमी की तरफ होने वाले इकॉनमिक पावर शिफ्टिंग का फायदा उठाने के मकसद से बनाई गई है। इस स्कीम के पोर्टफोलियो के लिए इन्वेस्टमेंट मैनेजर खासतौर पर उन कंपनियों को चुनेंगे, जिनके बिजनेस को इस तरह के शिफ्ट से फायदा होगा। सेल्स ब्रोशर में इसके बारे में विस्तार से बताया गया है और उसमें यह समझाने की पूरी कोशिश की गई है कि शिफ्ट होना क्यों तय है और कैसे कुछ कंपनियां इसका फायदा उठाने में कामयाब रहेंगी और कुछेक कंपनी इससे महरूम रह जाएंगी।

कहानी के झांसे में आते हैं इन्वेस्टर्स
दूसरी तरफ दूसरा सेल्समैन एक शानदार म्यूचुअल फंड स्कीम के बारे में बताता है। यह स्कीम लगभग दो दशक से बिक रही है और इसका ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा है। इसमें आने वाला पैसा व्यापक रूप से कई सेक्टर और कंपनियों में लगाया जाता है, साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि स्कीम हर समय पूरी तरह डायवर्सिफाइड रहे। दूसरी स्कीम के बारे में बताने के लिए और कुछ भी नहीं है। यह समझने के लिए ज्यादा अनुभवी होने की जरूरत नहीं है कि कौन सी स्कीम ज्यादा आकर्षित करेगी। दूसरी स्कीम में साफ तौर पर कोई स्टोरी नहीं है, कम से कम ऐसा लगता जरूर है।

इन्वेस्टमेंट में स्टोरी नहीं, रिटर्न महत्वपूर्ण
असल में दूसरी वाली स्कीम के पास असली स्टोरी है क्योंकि यह सच्ची स्टोरी है। असल में ऐसा हुआ है और ऐसा आगे भी होगा, इस बात की बड़ी संभावना है। इसके उलट, पहली स्कीम वाली को लेकर सुनाई गई स्टोरी परियों की कहानी जैसी लगती है। वह सच हो भी सकता है और नहीं भी। अगर इस उदाहरण वाली काल्पनिक स्कीम के बजाय कोई पुरानी असली स्कीम भी हुई तो भी कोई यह नहीं कह सकता कि यह स्टोरी असलियत न होकर कहानी ही रह जाएगी।

सेबी स्टोरी वाली स्कीम पर लगा रहा लगाम
रोमांचक कहानियों वाले नए फंड्स के उदाहरण सेबी के ऑपरेशन क्लीनअप से घटे हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड कंपनियों की तरफ से आज भी विचित्र थीम और स्टोरी वाली स्कीमें बड़े पैमाने पर बेची जा रही हैं। अच्छे ट्रैक और बिना स्टोरी वाले यानी डायवर्सिफाइड फंड्स हमेशा बेहतर विकल्प होते हैं, क्योंकि ये हर तरह की स्टोरी वाली स्कीमों के सुपरसेट मॉडल होते हैं।

फंड मैनेजर को अपना काम करने दें
मैं आपको यही बताने की कोशिश कर रहा हूं। हो सकता है कि कुछ स्टोरी आगे चलकर सही साबित हों, पिछले दो दशकों में टेक से लेकर फार्मा, कंज्यूमर गुड्स से बैंक तक, हर स्टोरी के साकार होने का वक्त जरूर आया। सवाल यह उठता है कि म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर्स होने के नाते सही समय पर सही स्टोरी चुनने का काम आपका है? नहीं। यह फंड और फंड मैनेजर्स का है। आपका काम सिर्फ उनमें से चुनने और उन पर नजर रखने का है।

(लेखक वैल्यू रिसर्च के CEO हैं)

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