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एक और सेलेब्रिटी OCD की चपेट में, अब हॉलिवुड से खुलासा

इस साल की शुरुआत में बॉलिवुड की खूबसूरत और संजीदा अदाकारा विद्या बालन के बारे में खबर आई थी कि वह ओसीडी से जूझ रही हैं। वहीं, अब इस बीमारी पर एक बार फिर इसलिए चर्चा हो रही है क्योंकि हॉलिवुड ऐक्ट्रेस लिली रेनहार्ट ने एक टीवी शो के दौरान इस बात को स्वीकार किया कि अपनी रियल लाइफ में वह ओसीडी का शिकार रह चुकी हैं। यह चर्चा इसलिए छिड़ी क्योंकि अपनी फिल्म ‘Hustlers’ में लिली ने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है, जो स्ट्रैस की मरीज है और अपने जब यह स्ट्रैस उस पर हावी होता है तो वह वॉमिटिंग यानी उल्टी होने जैसा फील करती है। इस कैरेक्टर के बारे में बात करते हुए लिली ने कहा कि वह अपनी रियल लाइफ में ओसीडी का शिकार रही हैं।

ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर () एंग्जाइटी से संबंधित एक मानसिक स्थिति है। अगर यह गंभीर अवस्था में पहुंच जाए तो इससे पीड़ित व्यक्ति कई तरह की डिसेबिलिटीज का शिकार हो जाता है। ओसीडी महिला और पुरुष दोनों को समान रूप से अपना शिकार बनाता है। यह उम्र के किसी भी पड़ाव पर हावी होने वाला डिसऑर्डर है। खास बात यह है कि कम हो या ज्यादा यह डिसऑर्डर एक बार हो जाने के बाद लंबे समय तक बना रहता है। हालांकि इसका इलाज बेहद आसान है। जाने-माने बिजनस मैन और गूगल सीईओ सुंदर पिचाई भी ओसीडी से पीड़ित रह चुके हैं।

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ओसीडी के लक्षण
ओसीडी में रीपिटेड थॉट्स और इमेजेज ये इंट्रूसिव होते हैं। ये बार-बार आते हैं और लगता है कि अंदर से आ रहे हैं। ऑब्सेसिव थॉट्स होते हैं और कंपल्सिव उनका ऐक्ट है और ये इगो डिस्टॉनिक होते हैं। यानी जिस तरह का आपका इगो होता है आपके विचार उसके एकदम विपरीत आते हैं। ओसीडी के मरीजों में सामान्य लक्षण देखे जाते हैं, उनमें बार-बार हाथ धोना, गंदगी को लेकर बहुत अधिक परेशान रहना। बार-बार नोट गिनना, गैस सिलेंडर, घर के लॉक्स और लाइट के स्विच बार-बार चेक करना जैसी चीजें शामिल हैं।

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इलाज बहुत आसान लेकिन लंबा है
ओसीडी का इलाज बहुत ही आसान होता है। इसके लिए आप किसी अच्छे साइकाइट्रिस्ट की मदद ले सकते हैं।कॉग्नेटिव बिहेवियर थेरपी, एक्सपोजर ऐंड रिस्पॉन्स प्रिवेंशन थेरपी, मॉर्डन साइकाइट्रिक मेडिसिन्स और r-TMS (रिपेटेड ट्रासं मैग्नेटिक स्टीमूलेशन थेरपी) के जरिए मरीजों का इलाज करते हैं। ये एक्सपर्ट आपके दिमाग में यह सवाल भी आ रहा होगा कि आखिर यह बीमारी होती क्यों है? तो इसका जवाब यह है कि यह बीमारी जेनेटिक भी होती है और एंग्जाइटी के कारण भी हो सकती है।

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