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कमाल! आरओ के वेस्ट वॉटर को बना रहे पीने लायक

दीपक आहूजा, गुड़गांव
ट्यूलिप वाइट सोसायटी के इंजिनियर अमित सक्सेना ने जब आरओ के वेस्ट वॉटर को सीवर लाइन में बहते देखा तो उनके दिमाग में इसके संरक्षण का ख्याल आया। इसके लिए उन्होंने इस पानी को ट्रीट कर फिर से पीने के पानी के टैंक में पहुंचाने का फैसला किया। आज उनकी यह छोटी सी कोशिश रंग ला रही है। ‌वे अपने टावर के रेजिडेंट्स और रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन के सहयोग से पिछले 20 दिन के अंदर करीब 25 हजार लीटर पीने के पानी को व्यर्थ बहने से बचा सके हैं। उनके इस प्रयास की सराहना आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी भी कर रहे हैं। अब आरडब्ल्यूए उनके इस प्रयास से पूरी सोसायटी को जोड़ने का प्लान बना रही है।

आरओ के वेस्ट वॉटर को बहता देख आया आइडियाजल संरक्षण में अहम योगदान दे रहे अमित सक्सेना ने बताया कि आरओ का पानी बेकार बह जाता है। एक व्यक्ति को पीने से लेकर खाना बनाने तक औसतन 4 लीटर पेयजल की रोजाना आवश्यकता होती है। ऐसे में एक सामान्य परिवार में रोज 20 लीटर पानी आरओ में ट्रीट किया जाता है। ऐसे में करीब 40 लीटर पानी बेकार बह जाता है। उन्होंने पाया कि अमूमन घरों में इस पानी का कोई इस्तेमाल नहीं होता है। यह पानी सीवर लाइन में चला जाता है।

जल संरक्षण के लिए आरडब्ल्यूए से किया संपर्कइस पानी को बचाने की मुहिम के तहत उन्होंने आरडब्ल्यूए से संपर्क साधा। आरडब्ल्यूए ने पहले इस योजना को एक टावर में शुरू करने की परमीशन दी। बजट नहीं होने पर उन्होंने पुराने पाइप और पानी के टैंक के माध्यम से टावर नंबर ए-1 के 52 में से 32 घरों को जोड़ दिया। इन घरों के आरओ का पानी इस टंकी में इकट्ठा होना शुरू को गया। पानी की जांच की तो पाया कि इसका टीडीएस भी 130 से 140 के बीच है। इस पानी को दोबारा मुख्य टैंक (करीब ढाई लाख लीटर क्षमता) तक पहुंचाया गया।

मेन टैंक में पहुंचाने से पहले वेस्ट वॉटर की होती है जांचसक्सेना ने बताया कि घरों में जो पानी सप्लाई हो रहा है, उसका टीडीएस करीब 100 होता है। डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के मुताबिक पीने के लिए 500 टीडीएस तक का पानी ठीक माना जाता है। आरओ में ट्रीट करने के बाद जो पानी बचता है, उसका टीडीएस इस परिधि में आता है। टीडीएस के साथ-साथ वेस्ट वॉटर में तेजाब तो नहीं है, यह भी मुख्य टैंक में मिलाने से पहले जांचा जाता है। इस टावर को इस सिस्टम से जोड़ने में उन्हें 20 से 25 दिन का समय लगा। 12 अगस्त से लेकर अब 32 फ्लैट्स से 25 हजार लीटर आरओ का पानी बचा चुके हैं।

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