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करतारपुर: पाक सेना ने कहा, पासपोर्ट अनिवार्य

इस्लामाबाद
पाकिस्तान में इमरान खान सरकार पर सेना के हावी होने की खबरें लगातार आ रही हैं। करतारपुर कॉरिडोर को लेकर भी एक बार फिर सेना और सरकार के बयान 2 अलग दिशा से आ रहे हैं। इसी महीने की 1 तारीख को इमरान खान ने अपने ट्विटर पर ऐलान किया था करतारपुर कॉरिडोर के लिए भारतीय तीर्थयात्रियों को पासपोर्ट की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, अब सेना के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में पासपोर्ट को अनिवार्य बताया गया है।

पाक सेना ने कहा, तीर्थयात्रियों के लिए पासपोर्ट अनिवार्य
पाकिस्तानी मीडिया में सेना के प्रवक्ता जनरल आसिफ गफूर के हवाले से बयान जारी किया गया है। सेना की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि भारत से आनेवाले सिख तीर्थयात्रियों के लिए पासपोर्ट का प्रयोग करना अनिवार्य है। इमरान खान ने कुछ दिन पहले ही ट्वीट किया था कि भारतीय तीर्थयात्री किसी भी सरकारी प्रमाणपत्र के साथ आ सकते हैं।

इमरान ने कहा था, पासपोर्ट अनिवार्य नहीं
इमरान खान ने 1 नवंबर को ट्वीट किया था, ‘करतारपुर आनेवाले भारतीय सिख तीर्थयात्रियों के लिए मैंने दो बाध्यता समाप्त कर दी हैं। तीर्थयात्रियों को अब पासपोर्ट की जरूरत नहीं होगी, उन्हें अपने साथ बस एक वैध प्रमाण पत्र लेकर आना होगा। इसके साथ ही तीर्थयात्रियों के लिए 10 दिन पहले रजिस्टर कराने की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। इसके साथ ही गुरुजी के 550वें जन्मदिन के मौके पर उद्घाटन का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।’

करतारपुर पर पाक कर रहा डर्टी पॉलिटिक्स
करतारपुर कॉरिडोर के पीछे पाकिस्तान की घिनौनी साजिश खुलकर सामने आ गई है। कभी उसने वीजा और श्रद्धालुओं से शुल्क लेने पर बातें बनाता रहा और अब उसने खुलकर खालिस्तानी आतंकियों को प्रमोट किया है। भारत विरोधी गतिविधियों के लिए अब उसने सिखों की धार्मिक भावनाओं से खेलने की घिनौनी साजिश की है। खालिस्तानी आतंक को हवा देने के लिए उसने करतारपुर पर अपने विडियो में भिंडरावाले को ‘हीरो’ की तरह प्रमोट किया है। हालांकि भारत मानकर चल रहा है कि करतारपुर कॉरिडोर से दोनों देशों के बीच विश्वास और एक तरह से मित्रता के रास्ते खुलेंगे।

पढ़ें : 20 साल बाद अब पाक की तत्परता पर संदेह
दरअसल, भारत सरकार 20 साल पहले से ही कॉरिडोर खोलने के लिए पाक से कहती आ रही है लेकिन एक साल पहले इस प्रॉजेक्ट में पाक सेना ने जो दिलचस्पी दिखाई, वह अपने आप में शक पैदा करता है। पाक की तरह से यह धार्मिक पहल ऐसे समय में की जा रही है जब भारत विरोधी मंसूबों को पूरा करने की उसकी हर कोशिश नाकाम रही है। उधर, पाक दुनिया में आतंकवाद को लेकर बदनाम है। कई प्रतिबंध लगने वाले हैं। अर्थव्यवस्था बदहाल है। इन बुरे दिनों में पीएम इमरान खान पाक को एक शांति पसंद देश के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं। इससे इमरान की नजरों में पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार से उलट दुनिया में पाक की एक नई तस्वीर बनेगी।

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