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केएल राहुल के सामने बड़ी चुनौती, कैसे करेंगे सामना

पार्था भारती, धर्मशाला
कहते हैं खेल व्यक्तित्व निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। और देखने वाले जानते हैं कि क्रिकेट उस व्यक्तित्व की परख करता है। और कई बार बहुत कड़े तरीके से। दुनिया के बड़े से बड़े खिलाड़ी करियर में एक न एक बार इस दौर से जरूर गुजरते हैं।

खेल कई बार आपके अहंकार को तोड़ देता है। कई बार आपका अहं सामने आ जाता है। क्रिकेट को यूं ही ‘लेवलर’ नहीं कहते। यह हिसाब बराबर रखता है। पर कई बार जो आईना आपको नजर आता है उसमें विभिन्न छवियां नजर आती हैं। कई बार वक्त से परिचय कराती हुईं, कई बार चालाक और कई बार भ्रम में डालती हुईं। और भी इस बात को जानते हैं कि अव्यवस्थित मन ने उनका काफी नुकसान किया है।

टेस्ट क्रिकेट में इस साल राहुल का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। और जब आप उनकी प्रतिभा और प्रदर्शन को देखते हैं तो यह निराशा काफी बढ़ जाती है। राहुल वही बल्लेबाज हैं जिनके बारे में कई दिग्गज खिलाड़ियों ने बहुत अच्छी बात कही हैं।

साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए इस बार रोहित शर्मा को आजमाने की योजना है। वॉइट बॉल से उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। वर्ल्ड कप में उन्होंने पांच शतक लगाए। इसके बाद ही चयनकर्ता उन्हें खेल के सबसे लंबे प्रारूप के लिए चुनने को मजबूर हुए। सिलेक्टर्स को उम्मीद है कि रोहित घरेलू परिस्थितियों में खेली जाने वाली इस सीरीज में अपनी तकनीक की छोटी-मोटी खामियों से पार पाने में सफल होंगे।

यह तो आने वाला वक्त ही बताया कि सिलेक्टर्स का फैसला सही है अथवा नहीं। फिलहाल, राहुल की खराब फॉर्म ने उनके हाथ बांध दिए हैं और कर्नाटक का यह बल्लेबाज प्लेइंग इंलेवन से बाहर है। राहुल के पास अब एक ही रास्ता बचा है कि वह वाइट बॉल क्रिकेट में जाकर अच्छा प्रदर्शन करें और प्रभाव छोड़ें। पर यहां फिर एक सवाल है, क्या उन्हें इतने मौके मिलेंगे?

राहुल की समस्याओं ने आधुनिक युग के प्रतिभाशाली बल्लेबाज के सामने नई चुनौतियां पेश की हैं। चुनौती खेल के तीनों प्रारूपों में कामयाब होने की। तीनों प्रारूपों में खेलते रहने के लिए असीमित तालमेल बनाना, और साथ ही अपनी तकनीक व मानसिकता में बदलाव करना कई बार बहुत मुश्किल होता है। इससे किसी खिलाड़ी के बुनियादी खेल पर भी असर पड़ता है।

याद कीजिए, राहुल ने अपने करियर की शुरुआत कथित रूप से टेस्ट विशेषज्ञ के रूप में की थी। 2013-24 के रणजी सीजन में जब उनकी टीम ने कर्नाटक ने खिताब जीता तो राहुल का प्रदर्शन बहुत अच्छा था। इसके बाद आईपीएल अनुबंध हासिल करने से पहले उन्होंने अपने खेल को नए आयाम देने में काफी मेहनत की।

इस बीच एक शो में महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियों के चलते उन पर बैन लगा। इसका राहुल पर मानसिक रूप से बहुत बुरा असर पड़ा।

2017 में उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 9 बार 50 का आंकड़ा पार किया। लेकिन इनस्विंगर और शॉर्ट बॉल पर उनकी परेशानी जगजाहिर हो चुकी थी। एक दौर में वह लगातार नौ पारियों में बोल्ड या LBW हुए थे।

भारतीय टीम अब रविवार को साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज का आगाज कर रही है। रवि शास्त्री को दोबारा कोच बनाने के बाद अब इंडिया की नजरें अगले साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप पर हैं। राहुल की कोशिश अपने प्रदर्शन से खुद को उस टूर्नमेंट के दावेदारों में बनाए रखने की होगी।

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