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कैप्टन को कभी कैप्टन माना ही नहीं सिद्धू ने, इसी बयान से शुरू हुई थी खींचतान



जालंधर. पंजाब में कैप्टन की टीम (कैबिनेट) के मेंबर रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने कभी कैप्टन को कैप्टन माना ही नहीं है। जिस वक्त सिद्धू भाजपा में थे, तब की बात और है। राजनीति में एक-दूसरे के खिलाफ जहर उगलना आम बात है। बात की जाए सबसे चर्चित विवाद की तो यह बहुत पुरानी बात नहीं है। महज 1 साल भी नहीं हुआ है, जब एक ही पार्टी और प्रदेश की सरकार चलाने वाली एक ही टीम में होते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू एक-दूसरे के सामने आन खड़े हुए थे। इसके बाद दाेनों के बीच की यह खाई होने की बजाय बढ़ती ही चली गई।

दैनिक भास्कर प्लस पिछले इस लगभग एक साल के विवाद की चुनिंदा टिप्पणियों से रू-ब-रू करा रहा है। आइए जानते हैं कि किसने कब क्या कहा…

पाकिस्तान जाने पर थे जुदा मत

18 अगस्त 2018 को पूर्व क्रिकेटर इमरान खान ने पाकिस्तान के प्रधनमंत्री के रूप में पदभार संभाला। इसमें जाने के लिए तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू समेत देश के कई नेताओं को निमंत्रण आया था। पाकिस्तान नहीं जाने को लेकर सुषमा स्वराज और कैप्टन अमरिंदर एक-दूसरे के राजनैतिक विरोधी होते हुए भी एक ही फैसले पर साथ खड़े नजर आए। न सुषमा गईं और न ही कैप्टन। दूसरी ओर पंजाब के कैबिनेट के मेंबर होते हुए नवजोत सिंह सीएम के खिलाफ जाकर एक दिन पहले ही पाकिस्तान पहुंच गए। वहां पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल कमर बाजवा के गले लगने का विवाद तो पनपा तो करतारपुर साहिब गलियारे की बात कह सिद्धू ने सबका ध्यान बंटा लिया था।

कहा था, ‘मेरे कैप्टन राहुल हैं…’

इसके बाद करतारपुर गलियारे की नींव रखी जानी थी तो 26 नवंबर को भारत की तरफ आयोजित कार्यक्रम में सिद्धू नदारद रहे, लेकिन 28 नवंबर को पाकिस्तान में आयोजित शिलान्यास समारोह के वह एक दिन पहले ही चले गए। इस वक्त कैप्टन अमरिंदर ने कहा था कि सिद्धू हाईकमान की परमिशन के बिना वहां गए हैं। वापसी के बाद सिद्धू से कैप्टन की नाराजगी पर मीडिया ने बात की तो सिद्धू ने बड़े व्यंग्यात्मक लहजे में कहा था, ‘कौन कैप्टन? ओह कैप्टन? ओह आर्मी दे कैप्टन, मेरे कैप्टन तो राहुल गांधी हैं।’ हालांकि बाद में उन्होंने बात संवार ली थी। इसी दौरान पाकिस्तान से तीतर की खाल वाली एक ट्रॉफी कैप्टन के लिए लाने की बात कहकर भी सिद्धू विवादों में रहे।

आतंकी हमले पर बोले-आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता

फरवरी 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतकी हमले को लेकर भी कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बयान एक-दूसरे अलग थे। एक तरफ कैप्टन अमरिंदर ने 41 के बदले 82 मारने की बात कहते हुए पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा था कि इमरान खान पाकिस्तान फौज की एक ही पौध है, वहीं इस मसले पर सिद्धू का बयान था, ‘आतंकियों का कोई देश और मजहब नहीं होता। कुछ लोगों की करतूत के लिए किसी राष्‍ट्र को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

पत्नी का टिकट कटने के बाद की नाराजगी

कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच की खींचतान का एक कारण सिद्धू की पत्नी का टिकट कटना भी माना जा रहा है। सिद्धू की पत्नी ने आरोप लगाया कि कैप्टन अमरिंदर और पंजाब मामलों की पार्टी प्रभारी आशा कुमारी के कहने पर उनका टिकट काटा गया है। इस पर सिद्धू ने कहा था कि उनकी पत्नी झूठ नहीं बोलतीं। दूसरी ओर कैप्टन अमरिंदर ने कहा था कि चंडीगढ़ से नवजोत कौर का टिकट काटने के पीछे वह कहीं भी जिम्मेदार नहीं हैं। चंडीगढ़ से पार्टी हाईकमान को पवन बंसल से बेहतर ऑप्शन कोई नजर नहीं आया। यह पार्टी हाईकमान का फैसला था।

बेअदबी मामले पर टिप्पणी, कैप्टन ने बताया सिद्धू को महत्वाकांक्षी

फिर 17 मई को सिद्धू ने राज्य में कांग्रेस सरकार को धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के मुद्दे पर घेरते हुए सवाल किया था कि 2015 की बेअदबी और गोलीबारी की घटनाओं के संबंध में बादल के खिलाफ कोई प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज की गई? क्या कोई फ्रेंडली मैच चल रहा है। बठिंडा में कांग्रेस के उम्मीदवार अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के पक्ष में प्रचार कर रहे सिद्धू ने यहां तक कहा था कि अगर 2015 की बेअदबी की घटनाओं पर कार्रवाई नहीं होती है तो वे इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था, ‘सिद्धू महत्वाकांक्षी हैं। वह मुझे साइड करके खुद सीएम बनना चाहते हैं। उनकी बयानबाजी से पार्टी को नुकसान हो रहा है। उन्हें पार्टी से बाहर निकाल देना चाहिए।’

विभाग बदलने का विवाद

मई का अंत होते-होते कैप्टन ने सिद्धू से उनका विभाग छीनने का ऐलान कर दिया। कैप्टन ने कहा था कि वह (नवजोत सिंह सिद्धू) स्थानीय निकाय विभाग को कुशलतापूर्वक नहीं संभाल पा रहे हैं। इस पर लंबी-चौड़ी जानकारी सांझा करते हुए सिद्धू ने अपने आपको को पाक-साफ बताया था। उन्होंने कहा कि सीएम साहब ने आरोप लगाए मुझसे किसी ने नहीं पूछा कि वे क्या करते हैं। जब मैं आया था उसमें एक एसटीपी नहीं चलता था, लेकिन मैंने शुरू करवाए. तीन हजार करोड़ रुपए सीएम से लेकर काम शुरू करवाए। मेरा एक भी काम ऐसा नहीं है, जिसमें ट्रांसपेरेंसी न हो। वो (अमरिंदर सिंह) जो भी फैसला लें उनकी मर्जी, मैं अपने विभाग की रिपोर्ट जारी करूंगा। नहरों का जो पानी शहरों को देने जा रहे हैं, वह कहां से हो रहा है? मैंने पूरा योगदान दिया है, पर उंगली किसी पर नहीं उठाई।’

मैंने कांग्रेस केकिसी वर्कर के खिलाफ नहीं बोला…

सिद्धू ने अपनी सफाई में कहा था, ‘मैंने आज तक कांग्रेस के किसी वर्कर के खिलाफ नहीं बोला, जबकि उनसे मुझे गालियां दिलाई जाती हैं। मैनें बठिंडा में स्टेज पर जो कहा उसमें किसी का नाम नहीं लिया, सिर्फ इतना कहा कि कांग्रेस की पीठ पर जो छुरा मार रहा है, उसको ठोक दो। बस यही कहा, मैं अपनी बात से नहीं मुकरता।’

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several major statements in Captain Amrinder Singh and Navjot Sidhu Controversy

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