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गोल्ड में इन्वेस्ट कर रहे हैं? जान लीजिए ये जरूरी बातें

आदिल शेट्टी सोना आज भी भारत के लोगों का सबसे पसंदीदा इन्वेस्टमेंट ऑप्शन है। चाहे त्योहारों का मौसम हो या परंपरागत समारोह, प्रत्येक घर में इस पीली धातु की एक खास जगह है। इसके अलावा आर्थिक अनिश्चितता के दौर में इसे एक सुरक्षित इन्वेस्टमेंट भी माना जाता है। इसमें कम रिटर्न मिलने की संभावना रहती है लेकिन आर्थिक अस्थिरता के दौर में इसके दाम काफी बढ़ सकते हैं। अब जबकि त्योहारों का मौसम नजदीक आ गया है, इसलिए सोना खरीदने की होड़ फिर शुरू होने वाली है। यदि आप भी इन्वेस्टमेंट या किसी अन्य मकसद से इसे खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो पहले यह जान लेना जरूरी है कि आपको किन-किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

के समय ध्यान रखें…
सोने में निवेश करते समय भी आपको अपने अन्य इन्वेस्टमेंट्स की तरह सेफ्टी, लिक्विडिटी और रिटर्न को ध्यान में रखना चाहिए। सोना लंबे समय में आपको मध्यम रिटर्न दे सकता है, लेकिन आर्थिक अनिश्चितता के दौर में यह सबसे अच्छा रिटर्न देता है। इसे महंगाई के खिलाफ एक सुरक्षा कवच माना जाता है। लेकिन हाल ही में लंबे समय में इसका रिटर्न मध्यम से निम्न रहा है। सोने की कीमत वैश्विक और घरेलू आर्थिक कारकों के आधार पर घटती-बढ़ती रहती है। यदि आप सोना खरीद रहे हैं तो आपको इसको सुरक्षित रखने का इंतजाम करने के साथ इसकी शुद्धता का भी ध्यान रखना पड़ेगा।

गोल्ड में कितना निवेश करना अच्छा? कोई भी इन्वेस्टमेंट अपने फाइनैंशल लक्ष्यों के साथ इसके तालमेल का मूल्यांकन करने के बाद बड़ी सावधानी के साथ शुरू करना चाहिए। किसी अन्य इन्वेस्टमेंट की तरह, गोल्ड में इन्वेस्ट करने से पहले अपनी उम्र, आमदनी, जोखिम उठाने की क्षमता और फाइनैंशल लक्ष्य पर विचार करें। आम तौर पर यह सुझाव दिया जाता है कि आपका गोल्ड इन्वेस्टमेंट, आपके पोर्टफोलियो का 5% तक होना चाहिए, या यदि इसके लिए आपकी जोखिम उठाने की क्षमता अधिक है तो 10% तक होना चाहिए। लेकिन एक बात का ध्यान रखना जरूरी है, अपनी क्षमता से बाहर जाकर इसमें इन्वेस्ट न करें या गोल्ड में इन्वेस्ट करने के लिए अपने अन्य लक्ष्यों के साथ समझौता न करें।

गोल्ड में कैसे निवेश करना चाहिए गोल्ड में निवेश करने के चार मुख्य तरीके हैं: फिजिकल गोल्ड यानी सोने का सामान, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF), सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स, और डिजिटल गोल्ड। सोने का सामान खरीदना आसान है, लेकिन उसकी शुद्धता को सुनिश्चित करना और सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था करना किसी चुनौती से कम नहीं है जिसके पीछे आपको थोड़े पैसे खर्च करने पड़ेंगे। इसे गहने, सिक्के या बिस्कुट के रूप में ख़रीदा जा सकता है। सोने का सामान खरीदने के मामले में कोई सीमा नहीं है। लेकिन, टैक्स के उद्देश्य से इसकी रसीद और टैक्स इनवॉइस को सुरक्षित रखें।

गोल्ड इन्वेस्टमेंट के दो अन्य रूप भी हैं जिन्हें खरीदकर रखना सुरक्षित और आसान है। आप कम से कम 1 ग्राम की रकम के बराबर गोल्ड ETF में इन्वेस्ट कर सकते हैं और इसमें इन्वेस्ट करने के लिए आप एक लम्प सम या एक सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) का सहारा भी ले सकते हैं। सोने के सामान के विपरीत, गोल्ड ETF में सोने की शुद्धता की चिंता नहीं रहती है क्योंकि इन्हें डीमैट रूप में खरीदा जाता है।

दूसरी तरफ सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) ऐसे गवर्नमेंट सिक्यॉरिटीज हैं जिन्हें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा जारी किया जाता है। एक SGB को एक ग्राम सोने के मल्टीपल में खरीदा जा सकता है। SGB के मामले में सोने की शुद्धता, सोने के सामान की तुलना में चिंता का कोई विषय नहीं है क्योंकि बॉन्ड की कीमत, इंडियन बुलियन ऐंड जूलर्स असोसिएशन (IBJA) द्वारा प्रकाशित 999 शुद्धता वाले सोने की कीमत से जुड़ी होती है। SGB पर 2.5% प्रति वर्ष की दर से इंटरेस्ट मिलता है। इमरजेंसी में, SGB को जमानत के रूप में गिरवी रखकर लोन लिया जा सकता है।

आप बैंकों, फिनटेक, और MMTC के साथ मिलकर काम करने वाली कुछ ब्रोकरेज कंपनियों द्वारा प्रदान किए जाने वाले विभिन्न डिजिटल विंडो के माध्यम से भी आराम से गोल्ड खरीद सकते हैं। इसके अलावा, आप बहुत कम परिमाण में भी गोल्ड खरीद सकते हैं।

सोने में निवेश पर लगने वाला टैक्स
गोल्ड पर लगने वाले टैक्स का कैलकुलेशन आपके गोल्ड इन्वेस्टमेंट के टाइम पीरियड के आधार पर किया जाता है। तो यदि आप गोल्ड खरीदने की तारीख से तीन साल के भीतर इसे बेचते हैं तो इसे एक शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट माना जाता है, और यदि आप इसे तीन साल के बाद बेचते हैं तो इसे लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट माना जाता है। शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) को आपके इनकम के साथ जोड़ दिया जाता है, और आपके ऊपर लागू हो सकने वाले टैक्स स्लैब के आधार पर आपसे टैक्स लिया जाता है। गोल्ड के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर 20% टैक्स लिया जाता है जिस पर इंडेक्सेशन बेनिफिट भी मिलता है और उस पर लागू होने लायक सरचार्ज और 4% सेस भी लगता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के मैच्योरिटी अमाउंट पर कोई TDS (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) नहीं लगता है। यहाँ इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि फिजिकल गोल्ड यानी सोने के सामान पर सोने के वैल्यू का 3% GST (गुड्स ऐंड सर्विस टैक्स) और साथ में उस पर कोई मेकिंग चार्ज लगने पर वह भी लगता है।

त्योहारों का मौसम बड़ी तेजी से करीब आ रहा है, इसलिए सोच-समझकर कोई फैसला लें और सोना खरीदने के सभी तरीकों के विभिन्न पहलुओं को समझने की कोशिश करें। जब बाजार अस्थिर होता है और जब आप अपने इन्वेस्टमेंट को डाइवर्सिफाई करना चाहते हैं उस समय सोने में इन्वेस्ट करना एक बहुत बढ़िया ऑप्शन बन जाता है। लेकिन, अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों और जरूरतों के आधार पर ही कोई फैसला लेना चाहिए।

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