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ग्राम विकास अधिकारी ने की आत्महत्या, किसान संगठनों के पदाधिकारों की जांच की उठी मांग

लखनऊ
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले की गोला तहसील में तैनात त्रिवेंद्र कुमार के मामले में कथित किसान नेताओं पर लगे आरोपों के बाद राष्ट्रीय किसान मंच ने भी किसान नेताओं की आलोचना की है। राष्ट्रीय किसान मंच के नेता स्वामी सारंग ने यह भी मांग की कि किसानों के नाम पर चलने वाले संगठनों तथा उनके पदाधिकारियों की जांच की जाए।

आपको बता दें कि गोला तहसील में तैनात ग्राम विकास अधिकारी त्रिवेंद्र कुमार ने आत्महत्या कर ली थी। मामले में त्रिवेन्द्र के परिजनों ने किसान यूनियन और प्रधान पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। राष्ट्रीय किसान मंच के नेता स्वामी सारंग ने शनिवार को कहा, ‘किसानों के नाम पर जो भी संगठन काम कर रहे हैं उनके सभी पदाधिकारियों की जांच की जाए। आज कुछ लोगों ने भोले-भाले किसानों को बरगलाकर अपनी दुकान चलाने के लिए संगठन बना लिए हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि इन संगठनों का सरोकार किसानों से है ही नहीं। ये सिर्फ खुद के स्वार्थ और अपनी आजीविका के लिए इस तरह से संगठन बना कर अधिकारियों पर रौब झाड़ते हैं।’

मंच के प्रदेश संगठन मंत्री वेद प्रकाश शास्त्री ने कहा कि अगर ये लोग वास्तव में किसानों के प्रति गंभीर होते तो आज किसान आत्महत्या नहीं कर रहे होते, जो ग्राम्य विकास अधिकारी मरा है वह भी हमारे किसान परिवार का है। हम सरकार से मांग करते हैं कि इस तरह के संगठनों पर प्रतिबंध लगाए और इनके पदाधिकारियों संपत्ति की जांच की जाए, इनके ऊपर कितने मुकदमे दर्ज हैं, उसकी जांचकर इनके संगठित अपराध का पर्दाफाश करके इनकी दुकानें बंद करवाई जाएं।

शास्त्री ने कहा कि हम किसान भाइयों से भी अपील करते हैं कि वह जब भी किसी से जुड़ें तो पूरी जांच पड़ताल करके ही जुड़ें। इस तरह के संगठनों के कारण ही आज किसान छला जा रहा है और अपनी गाढ़ी कमाई का हिस्सा इन स्वार्थी संगठनों को चंदे के रूप में दे देता है। गौरतलब है कि गौतम ने सुसाइड नोट में किसानों के एक राजनीतिक संगठन के जिलाध्यक्ष, एक गांव के ग्राम प्रधान और एक ग्राम प्रधान के पुत्र पर अपमानित करने और मानसिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था। गौतम का शव मिलने के बाद एक विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसमें उसे कथित रूप से किसान यूनियन के नेताओं द्वारा सार्वजनिक तौर पर अपमानित करते हुए देखा जा सकता है।

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