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जब डायबीटीज मरीज को उठने लगे कंधे का दर्द

50 वर्षीय मधु को पिछले 3 महीनों से बाएं कंधे में दर्द है। कंधा उठाने व हर तरफ चलाने में यह दर्द और बढ़ जा रहा है। रात में यह इतना ज्यादा होता है कि वह ठीक से सो नहीं पातीं। इसी समस्या को लेकर जब डॉक्टर के पास पहुंचती हैं, तो उन्हें बताया जाता है कि उन्हें या नामक रोग है।

अढेसिव कैप्सुलाइटिस या फ्रोजेन शोल्डर कंधे का गठिया-रोग नहीं है, बल्कि इस रोग में कंधे के जोड़ का कैप्सूल इन्फ्लेमेशन के कारण मोटा और कड़ा हो जाता है। इस रोग को फ्रोजेन शोल्डर के नाम से मरीज अधिक जानते हैं। इसे यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि जितना ज्यादा कंधे में दर्द होगा, उतना रोगी कंधे को कम चलाएगा। नतीजन कंधे का हिलना-डुलना और चलना और कम होता जाएगा। डॉक्टर मधु से पूछ रहे हैं कि क्या उन्हें कोई अन्य बीमारी है। मधु बताती हैं कि उन्हें पिछले 4 सालों से है। वह इस के लिए दवाएं ले तो रही हैं, लेकिन कई बार लापरवाही हो जाती है।

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डॉक्टर का कहना कि डायबीटीज-रोगियों में अढेसिव कैप्सुलाइटिस ज्यादा देखने को मिलता है। 10-20% डायबीटीज-रोगियों में यह समस्या हो जाती है। अनेक अन्य स्वास्थ्य-समस्याओं के साथ भी कन्धे की यह बीमारी देखी जा सकती है। हायपोथायरॉयडिज़म, स्ट्रोक (फालिज), पार्किसंस रोग व हृदय-रोगों के साथ भी अढेसिव कैप्सुलाइटिस होती पाई गई है। कंधे में लगी किसी प्रकार की कोई चोट (मांसपेशी की चोट या फ्रैक्चर) भी यह समस्या पैदा कर सकती है।

ऐसे समझें फ्रोजेन शोल्डर कोः अढेसिव कैप्सुलाइटिस रोग के विकास को 3 चरणों में समझा जा सकता है। सबसे पहले चरण में कंधे में दर्द और जकड़न होते हैं, जो रात को बढ़ जाते हैं। 6 सप्ताह से 9 माह तक यह स्थिति रह सकती है और दर्द बढ़ सकता है। फिर अगले चरण में दर्द तो घट जाता है, लेकिन अकड़न बनी रहती है। कन्धा कम ही चल पाता है। यह स्थिति दो से छह माह तक रहा करती है। अन्तिम चरण में दर्द काफी घट चुका होता है एवं कन्धा बेहतर चलने लगता है। धीरे-धीरे कन्धा सामान्य हो जाता है।

ऐसे दूर होगा दर्द: अढेसिव कैप्सुलाइटिस को पहचानने के लिए डॉक्टर रोगी के लक्षणों को समझते हैं। उसका मुआयना करते हैं और कुछ जांचें भी कराते हैं। ध्यान इस बात पर रहता है कि कहीं यह कंधे की कोई अन्य समस्या तो नहीं। इसी क्रम में कंधे का एक्स रे, अल्ट्रासाउंड या एमआरआई में कराया जा सकता है। उपचार के लिए गर्म सिकाई के साथ दर्दनिवारकों का प्रयोग तो किया ही जाता है। फिजियोथेरेपी भी करवाई जाती है। कुछ मरीजों में कंधों के भीतर ग्लूकॉर्टिकॉइड के इंजेक्शन देने से भी लाभ मिलता है। टेंस विधि द्वारा दर्दकारी तन्त्रिकाओं के संदेशों को ब्लॉक करने से भी इस बीमारी का दर्द डॉक्टर घटाया करते हैं। यह सब कामयाब न होने पर एनेस्थीजिया में कंधे की जकड़ को ढीला करने अथवा आर्थ्रोस्कोप के द्वारा सर्जरी करके कंधे को ठीक करने के प्रयास किए जाते हैं। डॉक्टर मधु से कह रहे हैं कि डायबीटीज नियंत्रित करें। इसके अलावा जिस तरह से वे अढेसिव कैप्सुलाइटिस के उपचार को आरम्भ कर रहे हैं, उसे लें। आशा है कि दर्द-जकड़न से उन्हें मुक्ति मिल जाएगी और वे पूरी तरह ठीक हो जाएंगी।

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