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जिस मुकाम पर हूं उसकी वजह एक 'स्त्री' नहीं, कई स्त्रियां हैं-पंकज त्रिपाठी

BZeba.HasanB@timesgroup.com

आठ साल पहले उन्हें अपने मोबाइल के बजने का इंतजार रहता था। काश! ऑडिशन के लिए कोई कॉल आ जाए और आज आलम यह है कि उनका फोन हर थोड़ी देर में बजता है और रोजाना दो से तीन फिल्मों के ऑफर आ जाते हैं। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले पंकज त्रिपाठी को बॉलिवुड में यह सफलता लम्बे संघर्ष के बाद मिली है। यही वजह है कि वह अपनी सक्सेस पर घमंड नहीं करते बल्कि उसे बड़े प्यार से सहेज रहे हैं। न्यूटन, स्त्री जैसी सफल फिल्में देने के साथ ही मिर्जापुर और क्रिमिनल जस्टिस जैसी वेब सीरीज से छा जाने वाले पंकज इन दिनों शहर में धर्मा प्रोडक्शन की फिल्म कारगिल गर्ल की शूटिंग कर रहे हैं। फिल्म में जाह्नवी कपूर के पिता का रोल निभा रहे पंकज ने कुछ फुर्सत के पल एनबीटी के साथ गुजारे। इन लम्हों में पंकज ने अपने करियर के संघर्ष, सफलता और जेल जाने तक का अनुभव हमारे साथ साझा किया।

Bमहिलाओं की स्थिति देखकर दुख होता हैB

मेरी जिंदगी में ‘स्त्री’ का बड़ा योगदान रहा है। सिर्फ फिल्म वाली एक स्त्री का नहीं बल्कि बहुत सारी स्त्रियों का। इनमें सबसे पहले मेरी मां और फिर बीवी का योगदान है। मुझे जिसने दिल्ली बुलाकर सबसे पहले काम दिया वह महिला डायरेक्टर अनुराधा कपूर थीं। मुझे धर्म जैसी बड़ी फिल्म में काम देने वाली डायरेक्टर भी एक स्त्री भावना तलवार थीं। मेरे जीवन में स्त्रियों का बड़ा योगदान है। मुझे फिल्म स्त्री के लिए जब अवॉर्ड मिला था तो मैंने कहा था, ‘जब आप स्त्री के संग रहेंगे तो अवॉर्ड मिलना तो आम बात होगी।’ कई बार समाज में महिलाओं की स्थिति देखता हूं तो दुख होता है। मुझे लगता है कि हमें लड़कियों को जितनी परवाज देनी चाहिए हम नहीं देते हैं। हम उन्हें उड़ान भरने नहीं देते हैं। हालांकि, पिछले कुछ साल में माहौल बदला है। फ्लाइट में जब फीमेल पायलट दिखती हैं तो गर्व की अनुभूति होती है। जिन औरतों को हमने घूंघट में चूल्हा चौके तक कैद करके रखा था वह आज हवाई जहाज उड़ा रही हैं।

Bदो साल से नहीं बैठा हूं B

मेरी व्यस्तता फिल्म स्त्री करने के पहले बढ़ गई थी और ‘स्त्री’ करने के बाद तो बैठने का मौका नहीं मिलता है। आठ साल पहले मैं एक फोन कॉल के लिए इंतजार करता था कि काश कोई फोन आ जाए और कोई रोल मिल जाए। आज यह हाल है कि तीस फिल्मों के ऑफर मेरे पास हैं। अगले साल मार्च तक मेरी डेट्स बुक हो चुकी हैं। कई फिल्म मेकर्स से मिलना चाहता हूं लेकिन मिल नहीं पा रहा हूं। यह सब समय का खेल है, समय बलवान होता है इनसान नहीं। जहां तक सवाल फिल्मों के चुनाव का है तो मेरा मानना है कि बतौर अभिनेता समाज ने मुझे स्वीकारा किया है। ऐसे में मेरी जिम्मेदारी है कि मैं ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनूं, जो लोगों का मनोरंजन करने के साथ ही समाज को एक संदेश भी दें। समाज से अलग होकर मैं अपने किरदार के साथ इंसाफ नहीं कर पाऊंगा।

Bनहीं है सफलता का घमंडB

मैं सूफी आदमी हूं। मुझे पता है कि जब चढ़ान आती है तो उसके बाद ढलान भी आती है। आज से आठ साल पहले मेरी स्थित कुछ और थी लेकिन मैं असफलताओं में परेशान नहीं था। आज मेरे पास काम की कमी नहीं है, लोग मुझे सफल कह रहे हैं तो इस बात का कोई घमंड भी नहीं है। मेरे लिए सक्सेस हैंडल करने से ज्यादा जरूरी संबंधों को बचाए रखना है। मुझे मालूम है कि कुछ भी स्थाई नहीं है फिर वह चाहे असफलता हो या सफलता, यह एक चक्र है। हालांकि, अगर यह सफलता मुझे जल्दी मिल जाती तो शायद संभालना मुश्किल हो जाता। बगैर मेहनत के जब कोई चीज हासिल हो जाती है तब हम उसकी कीमत नहीं समझते हैं। जब एक किसान खाना खाता है तो वह अपनी थाली में दो दाने भी फेंकने के लिए नहीं छोड़ता है। उसे इस बात का अहसास होता है कि जो खाना उसकी थाली में उसे वह कितनी मेहनत से मिला है। गेंहू बोकर लंबे इंतजार के बाद वह खाने को मिलता है। जो इसकी कीमत नहीं जानते वह अपनी थाली में रोटी छोड़ देते हैं। मैं भी एक किसान का बेटा हूं। मैं अन्न की कीमत जानता हूं, उसी तरह मैं अपनी सफलता की कीमत भी जानता हूं क्योंकि यह मुझे लंबी मेहनत के बाद मिली है। मुंबई में स्ट्रगल के दौरान मैंने घर से पैसे नहीं लिए बल्कि होटल में काम किया। उस वक्त जिसने मेरा सपोर्ट किया वह मेरी पत्नी थी। वह टीचर थी और उसी की सैलरी हमारे लिए मुंबई में सहारा बनी थी। उस वक्त ढाई हजार रुपये देकर हम रेंट पर रहते थे। आज हमारे पास एक बड़ा घर है, जिसकी हर महीने तीन लाख ईएमआई जाती है। मुझे लगता है कि घर से ज्यादा दिल बड़ा होना जरूरी है।

Bइरफान के लिए की गेस्ट अपीयरेंसB

इरफान खान के काम को देखकर मैं हमेशा प्रेरित हुआ हूं और उन्हें देखकर बहुत कुछ सीखा है। उनके साथ अंग्रेजी मीडियम में काम करने का मौका मुझे मिला था। फिल्म में एक बड़ा रोल मुझे मिला था लेकिन मेरे पास डेट्स नहीं थी इसलिए वह रोल मुझे नहीं मिला। हालांकि, मैंने प्रोड्यूसर से कहा कि मैं फिल्म में मेहमान भूमिका करना चाहता हूं। वह एक सीन मेरा इरफान के साथ करवा दें। वह मान गए और अब फिल्म में मेरा एक ही सीन है, जिसमें मैं इरफान से मिलता हूं। मैं बस इरफान के लिए फिल्म में मेहमान कलाकार बन गया।

Bराजनीति में मतभेद हो मनभेद नहींB

कॉलेज के दिनों में मैं छात्र राजनीति में सक्रीय था। एक वक्त वह भी आया जब हमने सरकार का विरोध किया और सात दिनों के लिए मुझे जेल जाना पड़ा था। वहां मैं पॉलिटिकल प्रिजनर था। दिन भर करने के लिए कुछ नहीं था तो लाइब्रेरी में जाकर खूब पढ़ता था। वहीं से मेरा हिंदी से लगाव शुरू हुआ था। सात दिन बाद जब जेल से बाहर आया तो फ्रीडम फाइटर जैसा अहसास हो रहा था क्योंकि मेरे हाथ पर जेल की मुहर लगा कर मुझे छोड़ा गया था। उस मुहर को दिखाकर आप बस या ट्रेन में फ्री में सफर कर सकते हैं। जहां तक आज की राजनीति का सवाल है तो मैंने महसूस किया है कि लोग सियासत के चलते ओछी हरकतें कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक दूसरे को गालियां दे रहे हैं। मुझे लगता है कि राजनीति में मतभेद होना चाहिए मनभेद नहीं।

Bजाह्नवी से सीखता हूंB

फिल्म कारगिल गर्ल में मैं जाह्वनी के पिता का किरदार निभा रहा हूं। जाह्वनी कमाल की ऐक्ट्रेस हैं। वह बहुत मेहनती और अपने काम को लेकर सीरियस रहती हैं। मैं कई बार उनसे सीखता हूं। आज कल के यंग ऐक्टर्स काफ काफी मेहनती हैं। वह अपने हर सीन पर काम करते हैं। जाह्नवी स्टार्स जैसे नखरे नहीं करती हैं। हमारी बहुत अच्छी बॉडिंग है। उसने इस शहर को बहुत अच्छी तरह से एक्सप्लोर कर लिया है। कहीं से वह लस्सी मंगाती हैं तो कहीं से बिरयानी और फिर कहती है कि सर खाइए बहुत ही लजीज है। जहां तक इस शहर का सवाल है तो यहां मेरी तीसरी फिल्म है। अभी तो पार्टी शुरू हुई और कागज की शूटिंग मैं यहां कर चुका हूं। यह शहर मुझे अद्भुत लगता है।

Bकोट

B

Bजिन मेकर्स के साथ काम करने की मेरी ख्वाहिश थी, उनके साथ मैं काम कर चुका हूं। बस इम्तियाज अली के साथ काम करना चाहता हूं। मैं एक भोजपुरी फिल्म भी बनाना चाहता हूं ताकि भोजपुरी सिनेमा को असली पहचान मिले।

मैं सनसनी फैलाने के लिए कोई किरदार नहीं करता हूं। मिर्जापुर में मैंने सिर्फ दो जगह गाली दी, मैं सेल्फ सेंसर वाला कलाकार हूं। जब मुझे यह नहीं लगेगा कि गाली दिए बिना मैं अपने किरदार के साथ इंसाफ नहीं कर पा रहा हूं तो ही मैं गाली का प्रयोग करता हूं। B

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