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दशहरे पर शुरू हो सकता है 'फेसलेस' टैक्स असेसमेंट

दीपशिखा सिकरवार, नई दिल्ली
अगर आप मुंबई, दिल्ली या अहमदाबाद में टैक्स का भुगतान करते हैं, तो जल्द ही यह हो सकता है कि आपकी आय का आकलन करने वाला टैक्स ऑफिसर देश के किसी सुदूर क्षेत्र में बैठा हो। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) ने ‘फेसलेस टैक्स ऐडमिनिस्ट्रेशन’ की दिशा में पहला ठोस कदम उठाते हुए एक प्रोग्राम को मंजूरी दी है, जो कार्यक्षेत्र से मुक्त असेसमेंट की महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत करेगा। इस योजना का मकसद अधिकारी और टैक्सपेयर्स के बीच आमने-सामने मुलाकात की जरूरत को खत्म करना है, जिससे भ्रष्टाचार को सीमित किया जा सके।

4 मेट्रो और 4 बड़े शहरों से होगी शुरुआत
इस मामले से वाकिफ एक सीनियर अधिकारी ने बताया, ‘यह अहम सुधार है। इस प्रोग्राम को सबसे पहले 4 मेट्रो और 4 बड़े शहरों के 60,000 टैक्सपेयर्स के साथ पायलट बेसिस पर शुरू किया जाएगा।’ चार मेट्रो के अलावा अन्य शहरों में पुणे, बेंगलुरु, अहमदाबाद और हैदराबाद शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त में ईटी को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा था कि जल्द ही सरकार जल्द ही फेसलेस असेसमेंट की शुरुआत करेगी। एक अन्य सूत्र ने बताया कि प्रोग्राम को 8 अक्टूबर को दशहरे के मौके पर लॉन्च किया जा सकता है।

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शुरुआत में एक या दो सवाल पूछेंगे अधिकारी
यह योजना शुरुआत में असेसमेंट तक ही सीमित रहेगी, जिसमें टैक्स अधिकारियों के पास अधिकतम एक या दो सवाल होंगे और उसके बाद धीरे-धीरे इसे बढ़ाया जाएगा। डायरेक्ट टैक्स पर गठित टास्कफोर्स ने टैक्स ऐडमिनिस्ट्रेशन को फेसलेस बनाने के लिए कई अहम बदलावों का सुझाव दिया था। इनमें ‘असेसिंग ऑफिसर’ के कॉन्सेप्ट को खत्म करने और उसकी जगह ‘असेसमेंट यूनिट्स’ लाने का सुझाव था। यह रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। रिपोर्ट में अधिकारियों की ‘फंक्शनल यूनिट्स’ बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसके पास विभिन्न सेक्टर और इंडस्ट्री से जुड़ी जानकारी और विशेषज्ञता हो।

कार्यक्षेत्र से मुक्त असेसमेंट की हुई थी सिफारिश
सीबीडीटी की एक इंटरनल कमिटी ने 2017 में कार्यक्षेत्र से मुक्त असेसमेंट की सिफारिश की थी। रिटर्न की प्रक्रिया पहले से ही कार्यक्षेत्र से मुक्त है और यह इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बेंगलुरु में हो रही है। डिपार्टमेंट ने टैक्सपेयर्स तक सवालों को भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजना शुरू कर दिया है। रिस्पॉन्स को भी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भेजे जाने की जरूरत है।

बढ़ेगी जवाबदेही, आएगी पारदर्शिता
सीबीडीटी ने हाल ही में टैक्स डिपार्टमेंट की जवाबदेही बढ़ाने और उसके काम करने के तरीके में पारदर्शिता लाने के लिए कई उपाय लागू किए थे। इसके तहत 1 अक्टूबर से टैक्सपेयर्स के साथ किसी भी तरह के संवाद के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम को अनिवार्य कर दिया है, जिसे एक यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर के जरिए किया जाएगा। यह टैक्स अधिकारियों और टैक्सपेयर्स के बीच संवाद की क्वॉलिटी पर करीबी नजर रखने के लिए किया जा रहा है।

GST में क्यों नहीं हो सकता फेसलेस असेसमेंट?
यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि अगर में फेसलेस स्क्रूटनी संभव है तो हर महीने सरकारी खजाने में करीब एक लाख करोड़ रुपये डालने वाले जीएसटी सिस्टम में क्यों नहीं? टैक्स प्रोफेशनल और इंडस्ट्री के जानकार जीएसटी की कई जटिलताओं और जरूरतों के चलते अभी इसे व्यावहारिक नहीं मानते। कई जानकार कहते हैं कि जीएसटी असेसी वास्तव में एक कमर्शल या इंडस्ट्रियल एंटिटी हैं, जो वॉर्ड, जोन, स्टेट और सेंटर की प्रशानिक मशीनरी के ज्यादा निकट होता है। यहां असेसी और असेसर एक दूसरे को पहचानते हैं। रेवेन्यू और ग्रोथ की वैधानिक जरूरतें जहां फिजिकल सर्वे, जांच और ऑडिट को जरूरी बनाती हैं, वहीं टैक्स और फाइलिंग पीरियड छोटा और नियमित होने के चलते टैक्स, इनपुट क्रेडिट और रिफंड में गलतियों की आशंका बनी रहती है। ऐसे में पर्सनल कॉन्टैक्ट या सुनवाई जरूरी हो जाती है।

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