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नई शिक्षा नीति में ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान और धरोहर को आगे रखने का संकल्प: निशंक

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने बुधवार को कहा कि 33 वर्ष के अंतराल के बाद तैयार की गई में ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान के साथ धरोहर को आगे रखने का संकल्प एवं विश्व रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचने का खाका खींचा गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार है और यह पेश किए जाने के अंतिम चरण में है। इस पर संभवत: दुनिया का सबसे बड़ा परामर्श कार्य हुआ है।

सामाजिक-आर्थिक विषयों से जुड़ी संस्था स्कॉच के कार्यक्रम में ‘मानव संसाधन एवं नया भारत’ विषय पर अपने संबोधन में निशंक ने कहा कि नई शिक्षा नीति के बारे में 3 वर्षो से अधिक समय तक अध्यापकों, छात्रों, जन प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, राज्य सरकारों आदि के साथ परामर्श किया गया।

निशंक ने कहा कि 33 वर्ष के अंतराल के बाद तैयार नई शिक्षा नीति में ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान के साथ धरोहर को आगे रखने का संकल्प एवं विश्व रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचने का खाका है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिये कृत संकल्प है। इस दिशा में स्कूली शिक्षा पर 56 हजार करोड़ रूपये से अधिक व्यय किया जा रहा है।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में 15-16 लाख स्कूल हैं, 92 लाख से अधिक अध्यापक हैं और करीब 27 करोड़ छात्र हैं। छात्रों की संख्या कई देशों की जनसंख्या से अधिक हैं। ऐसे में हमें स्कूली शिक्षा पर खास ध्यान देना है क्योंकि यह पीढ़ी निर्माण से जुड़ा है।

रमेश पोखरियाल ने कहा कि देश में 1000 विश्वविद्यालय और 45 हजार डिग्री कॉलेज हैं और ऐसे में हम इन उच्च शिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाना चाहते हैं ताकि उनकी रैंकिग बेहतर हो सके। समारोह के दौरान निशंक को स्कॉच गवर्नेस चैलेंजर अवार्ड प्रदान किया गया।

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